राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा कस्बे के एक घर में उस समय अफरातफरी मच गई, जब परिवार के सदस्यों ने अपनी खिड़की पर एक अनोखा सांप बैठा देखा। खिड़की पर अचानक सांप को देखकर घर के लोग सहम गए और किसी को भी यह समझ नहीं आ रहा था कि यह किस प्रजाति का जीव है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए परिवार ने बिना किसी देरी के वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले स्थानीय स्नेक रेस्क्यूअर को घटना की जानकारी दी।
पिपरड़ा के नवीन गहलोत ने सुरक्षित तरीके से निकाला बाहर
घर में सांप मिलने की खबर मिलते ही पिपरड़ा क्षेत्र के निवासी और वन्यजीव प्रेमी नवीन गहलोत मौके पर पहुंचे। उन्होंने खिड़की पर मौजूद जीव को बहुत करीब से देखकर उसकी प्रजाति की पुष्टि की। पहचान के बाद उन्होंने सुरक्षा उपकरणों और पूरी सावधानी का इस्तेमाल करते हुए सांप को काबू में किया। रेस्क्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवीन गहलोत ने इस जीव को आबादी से दूर उसके प्राकृतिक आवास जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। इस सफल बचाव अभियान के बाद परिवार ने राहत की सांस ली और एक दुर्लभ वन्यजीव भी सुरक्षित बच गया।
हवा में उड़ान नहीं, शाखाओं पर लंबी छलांग के लिए है मशहूर
खिड़की पर मिले इस जीव की पहचान ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक के रूप में हुई, जिसे आम बोलचाल में लोग उड़ने वाला सांप भी कह देते हैं। हालांकि, इस नाम के पीछे यह भ्रम पैदा हो सकता है कि यह पक्षियों की तरह पंख फैलाकर आकाश में उड़ता होगा, लेकिन वास्तविकता इससे काफी अलग है। यह प्रजाति असल में उड़ती नहीं है, बल्कि वृक्षों की ऊंचाई पर असाधारण तेजी से चलने और एक टहनी से दूसरी टहनी तक जबरदस्त छलांग लगाने में माहिर होती है।
फुर्ती और दिशा बदलने का अनोखा हुनर
पेड़ों की डालियों पर विचरण करते हुए यह सांप अपनी अद्भुत गतिशीलता और लचीलेपन का प्रदर्शन करता है। यह टहनियों के बीच काफी ऊंची छलांग लगा सकता है और पलक झपकते ही अपनी दिशा बदलने में सक्षम होता है। इसकी यही असाधारण गति और छलांग लगाने की क्षमता लोगों को ऐसा अहसास कराती है मानो यह हवा में तैर रहा हो। इसी विशिष्ट स्वभाव की वजह से इसे उड़ने वाले सांप की संज्ञा दी जाती है। नाथद्वारा में खिड़की पर दिखाई देने के बाद जब यह तेजी से हरकत कर रहा था, तब परिवार वाले इसकी फुर्ती देखकर चकित रह गए थे।
जहर मुक्त होता है यह दुर्लभ सांप
विशेषज्ञों के मुताबिक ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक पूरी तरह से विषहीन प्रजाति का सांप है। इसका अर्थ यह है कि इसमें इंसानों की जान लेने वाला विष नहीं पाया जाता। इसके बावजूद किसी भी अनजान सांप को देखकर आम लोगों को सतर्क रहना जरूरी है। बिना पुख्ता जानकारी के किसी भी सरीसृप को छूना या उसे खुद पकड़ने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है। नाथद्वारा की घटना यह संदेश देती है कि प्रकृति में मौजूद हर सांप खतरनाक या जानलेवा नहीं होता, बल्कि कई जीव हमारे पर्यावरण संतुलन का अहम हिस्सा होते हैं।
सांप दिखने पर सावधानी और समझदारी जरूरी
अक्सर घरों में या खिड़की के आसपास सांप दिखाई देने पर लोग घबराहट में उसे डंडे से भगाने या खुद पकड़ने की गलती कर बैठते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। नाथद्वारा के परिवार ने इस मामले में सूझबूझ दिखाई और जीव को नुकसान पहुंचाने की जगह सीधे विशेषज्ञ को बुलाया। ऐसी स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाकर रखना और वन विभाग या प्रशिक्षित वन्यजीव प्रेमियों को बुलाना ही सबसे सही कदम होता है, जिससे इंसान और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें।
















