शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है और नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक उपासना की जाती है। शक्ति स्वरूपा देवी की पूजा-अर्चना में भक्तगण उनके प्रिय भोग, फल और विशेष फूलों का अर्पण करते हैं। लाल गुड़हल का पुष्प मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय माना गया है, जिसे पूजन के समय अर्पित करने का खास विधान है। सामान्य तौर पर लोग दैनिक पूजा के लिए बाजार से फूल खरीद लाते हैं, परंतु यदि अपने ही आंगन या बालकनी में लगा पौधा खिलने लगे तो न केवल नियमित पूजा आसान हो जाती है बल्कि घर का वातावरण भी भक्तिमय और हरा-भरा बना रहता है।
गुड़हल की बागवानी करना बेहद सरल है और इसे किसी बड़े बगीचे में जमीन पर लगाने के अलावा सीमित जगह होने पर गमले में भी आसानी से रोपा जा सकता है। साधारण परिस्थितियों में कलम लगाने के बाद इसमें नई कलियां और फूल दिखने में 1 से 2 महीने का वक्त लग जाता है। ऐसे में समय रहते पौधा लगाने और सही बागवानी तकनीकों का पालन करने से शाखाओं का विकास तेज हो जाता है। यदि विशेष पोषक तत्वों और संतुलित वातावरण का ध्यान रखा जाए, तो पौधे के विकसित होने की गति काफी बढ़ाई जा सकती है।
कलम से नया पौधा तैयार करने की सही विधि
घर में गुड़हल उगाने के लिए किसी स्वस्थ पौधे से 5 से 8 इंच लंबी अर्ध-पक्व यानी सेमी-हार्डवुड टहनी की कटिंग काटनी चाहिए। कलम तैयार करते समय उसके निचले हिस्से की सभी पत्तियों को सावधानी से छांटकर हटा दें और ऊपर के सिरे पर केवल 2 से 3 पत्तियां ही सुरक्षित छोड़ें। जड़ों के तेजी से फूटने के लिए कलम के कटे हुए निचले हिस्से को रूटिंग हार्मोन में डुबोया जा सकता है, जो शाखा को जल्द जड़ पकड़ने में सक्षम बनाता है।
रोपाई के लिए गमले में जलभराव न होने देने वाली मिट्टी का मिश्रण तैयार करना जरूरी होता है। इसके लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी, साफ रेत और जैविक कम्पोस्ट को समान अनुपात में मिलाकर गमला भरें। इसके बाद कलम को करीब 2 से 3 इंच की गहराई तक मिट्टी में दबा दें और हल्का पानी छिड़कें। गमले को सीधे चिलचिलाती तेज धूप में रखने के बजाय ऐसी जगह पर रखें जहां पर्याप्त छनी हुई रोशनी आती रहे।
मजबूत जड़ों और तेज विकास के जरूरी उपाय
पौधे पर नए फूल तभी खिल सकते हैं जब उसकी जड़ें मिट्टी में अच्छी तरह पकड़ बना लें। इसके लिए मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन अत्यधिक पानी देने से बचें ताकि तना सड़े नहीं। जब कटिंग जड़ पकड़ ले, तब उसे नियमित रूप से 5 से 6 घंटे की धूप मिलना सुनिश्चित करें।
यदि आप चाहते हैं कि पौधा जल्द विकसित होकर फूल देने लगे, तो बिल्कुल नई कोमल टहनी के स्थान पर पहले से परिपक्व और विकसित पौधे की शाखा का चुनाव करें। गमले में महीने में एक बार वर्मीकम्पोस्ट या अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर डालें। फूलों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए फॉस्फोरस और पोटाश युक्त उर्वरक विशेष लाभकारी साबित होते हैं। इसके साथ ही पौधे की सूखी, रोगग्रस्त और कमजोर टहनियों की नियमित प्रूनिंग करते रहें।
कलियों के खिलने की वास्तविक समय-सीमा
बागवानी में इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि नई लगाई गई किसी भी कटिंग पर महज 15 दिनों के भीतर फूल आने की कोई निश्चित गारंटी नहीं होती है। प्राकृतिक नियम के अनुसार जब जड़ें मिट्टी में पूरी तरह फैल जाती हैं और नई पत्तियां स्वस्थ रूप से फूटती हैं, तभी कलियां बननी शुरू होती हैं। पर्याप्त धूप, सही खाद और संतुलित सिंचाई के साथ कुछ महीनों में यह पौधा पूरी तरह सशक्त होकर लाल फूलों से लद जाता है।



















