घरों में अक्सर दोपहर या रात के भोजन में बैंगन का भरता बनाया जाता है, लेकिन बार-बार एक ही स्वाद चखने के बाद भोजन में नयापन खत्म होने लगता है। ऐसे में उत्तर भारत के देहाती इलाकों, खासकर हरियाणा के पारंपरिक रसोई घरों में तैयार होने वाली आलू और बैंगन की सूखी मसालेदार सब्जी भोजन में एक नया जायका जोड़ सकती है। कम मसालों और झटपट तैयारी के साथ बनने वाली यह देसी डिश सादी रोटियों के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है और रसोई में घंटों खड़े रहने की झंझट को भी खत्म करती है।
रसोई में मौजूद सामान्य सामग्री से तैयार होती है यह डिश
अंबाला क्षेत्र की घरेलू पाक कला में माहिर रोजी देवी के अनुसार, इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है। इसके लिए बाजार से किसी खास या महंगे मसाले की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि घर की रसोई में दैनिक उपयोग होने वाले आलू, बैंगन, प्याज, लहसुन और टमाटर से ही एक लाजवाब पकवान तैयार किया जा सकता है। सामग्री के सही अनुपात पर ध्यान देना जरूरी है, जिसमें एक मध्यम आकार का बैंगन और चार छोटे आकार के आलू लिए जाते हैं।
सब्जियों की कटाई और मसाले की तैयारी
इस विधि को शुरू करने के लिए बैंगन और आलुओं को एक समान छोटे टुकड़ों में काटकर साफ पानी से अच्छी तरह धो लिया जाता है। इसके साथ ही प्याज, लहसुन की कलियां और ताजे टमाटर को बारीक काटकर अलग बर्तनों में रख लें। सब्जी का असल स्वाद तड़के की सही भुनाई पर निर्भर करता है, इसलिए पारंपरिक रीति के अनुसार लोहे या साधारण कढ़ाई में लगभग दो चम्मच शुद्ध सरसों का तेल गर्म किया जाता है। तेल से हल्का धुआं उठने पर उसमें कटी हुई प्याज और बारीक लहसुन डाला जाता है। रोजी देवी का कहना है कि प्याज और लहसुन को धीमी आंच पर तब तक भूनना चाहिए जब तक उनका कच्चापन दूर न हो जाए और उनमें से सौंधी खुशबू न आने लगे।
मसालों का मेल और धीमी आंच पर पकाने का तरीका
जब प्याज और लहसुन सुनहरे हो जाएं, तब कढ़ाई में बारीक कटे टमाटर मिलाए जाते हैं। इसके तुरंत बाद स्वादानुसार नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और थोड़ा सा गरम मसाला डाला जाता है। टमाटर के पूरी तरह गलने और मसालों के तेल छोड़ने तक इस मिश्रण को अच्छी तरह भूना जाता है। मसाला भुन जाने के बाद इसमें कटे हुए आलू और बैंगन के टुकड़े डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि प्रत्येक टुकड़े पर मसालों की परत चढ़ जाए। इसके बाद कढ़ाई में आवश्यकतानुसार बेहद कम मात्रा में पानी डाला जाता है, क्योंकि सब्जियों को धीमी भाप में पकाना होता है।
परोसने की पारंपरिक शैली
सब्जियों को मसालों में मिलाने के बाद कढ़ाई को ढक्कन से ढक दिया जाता है और गैस की आंच बिल्कुल धीमी कर दी जाती है। रोजी देवी के मुताबिक, इसे करीब 15 से 20 मिनट तक भाप में पकने दिया जाता है, जिससे आलू और बैंगन पूरी तरह नरम और रसीले हो जाते हैं। जब सब्जी पूरी तरह पक जाए, तो ऊपर से ताजा बारीक कटा हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दी जाती है। इस देसी हरियाणवी सब्जी का असली आनंद गर्म और पतली फुल्का रोटियों पर शुद्ध देसी घी लगाकर खाने में मिलता है। लगभग 20 मिनट में तैयार होने वाली यह डिश रोजमर्रा के भोजन को खास बना देती है।

















