बागवानी के शौकीन लोगों और किसानों के लिए अपनी पसंद के फलदार पेड़ों से नए पौधे बनाना अब बेहद सरल हो चुका है। एयर लेयरिंग अथवा गुटी कलम नाम से पहचानी जाने वाली यह बागवानी विधि किसी भी गुणवत्तापूर्ण पेड़ से ढेरों नए पौधे उगाने का एक सस्ता और कारगर जरिया बनती है। इस बागवानी तरीके के जरिए आम, अमरूद, लीची और नींबू जैसे लोकप्रिय फलों के नए पौधे सीधे मातृ वृक्ष की टहनी से तैयार किए जाते हैं, जिससे बाजार से महंगे पौधे खरीदने का झंझट समाप्त हो जाता है।
टहनी का चयन और छाल हटाने की सावधानी
वाटिका नर्सरी के विशेषज्ञ राधेश्याम के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा पैसे लगाने की आवश्यकता नहीं होती। सबसे पहले किसी ऐसे स्वस्थ और बेहतरीन फल देने वाले पेड़ को चुनें जिसकी किस्म आप बढ़ाना चाहते हैं। उस पेड़ से पेंसिल से थोड़ी अधिक मोटाई वाली एक मजबूत और निरोगी शाखा का चुनाव किया जाता है। इसके पश्चात उस शाखा के चारों तरफ लगभग एक इंच के घेरे में ऊपरी छाल को सावधानीपूर्वक काट कर निकाल दिया जाता है। इस दौरान यह ध्यान रखना बेहद आवश्यक है कि केवल छाल ही हटाई जाए और अंदर मौजूद कठोर लकड़ी को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
मिश्रण का लेप और नमी बनाए रखने का तरीका
शाखा की छाल हटाने के बाद जड़ें विकसित करने के लिए एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके तहत कोकोपीट, केंचुआ खाद यानी वर्मी कंपोस्ट और सामान्य मिट्टी को आपस में मिलाकर एक नम गोला तैयार करते हैं। इस मिश्रण को टहनी के उसी छिले हुए हिस्से पर चारों तरफ अच्छी तरह लपेट दिया जाता है। मिश्रण को अपनी जगह पर स्थिर रखने और उसमें नमी सुरक्षित बनाए रखने के लिए उसे प्लास्टिक की पन्नी से कसकर बांध दिया जाता है, जिससे बाहरी हवा का असर न हो और मिश्रण नीचे न गिरे।
जड़ें फूटने की अवधि और रोपाई की प्रक्रिया
विशेषज्ञ राधेश्याम के मुताबिक, प्लास्टिक के अंदर बंधे इस हिस्से में लगभग 45 दिनों के भीतर महीन नई जड़ें निकलना शुरू हो जाती हैं। जब प्लास्टिक के पार से जड़ें साफ तौर पर दिखने लगें और पूरी तरह विकसित हो जाएं, तब उस टहनी को मूल पेड़ से काटकर अलग कर लिया जाता है। इसके बाद उस नई कलम को किसी पॉलीथीन बैग में अथवा सीधे खेत और बगीचे की जमीन में रोपा जा सकता है।
कम समय में फलन और कमाई के अवसर
इस तकनीक की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि तैयार होने वाला नया पौधा पूरी तरह अपने मातृ वृक्ष के समान ही गुण रखता है। साधारण तौर पर बीज द्वारा उगाए गए पेड़ को फल देने में 5 से 6 वर्ष का लंबा समय लग जाता है, जबकि गुटी कलम से रोपा गया पौधा मात्र 2 साल के भीतर फल देना शुरू कर देता है। कम लागत और न्यूनतम संसाधनों में अपनी व्यक्तिगत नर्सरी शुरू करके किसान इस विधि से अच्छी अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं।



















