गमले के पौधे बार-बार सूख जाते हैं? झारखंड का यह पुराना नुस्खा अपनाइए, बारहों महीने रहेगी हरियालीजीवनशैली
2 घंटे पहले· 0

गमले के पौधे बार-बार सूख जाते हैं? झारखंड का यह पुराना नुस्खा अपनाइए, बारहों महीने रहेगी हरियाली

गमले में पौधे लगाते समय अगर सही तरीका न अपनाया जाए तो वे कुछ ही दिनों में मुरझाने लगते हैं। पौधों के जानकार राजा बता रहे हैं कि गमले की सफाई, धान की भूसी की परत और जैविक खाद के सही इस्तेमाल से पौधे लंबे समय तक हरे-भरे रहते हैं।

जमशेदपुर में आज शायद ही कोई घर ऐसा हो जहां छत, बालकनी या आंगन में गमले न सजे हों। किसी को फूल पसंद हैं तो कोई हरी सब्जियां या सजावटी पौधे उगाता है। लेकिन एक शिकायत लगभग सबकी एक जैसी होती है। पौधा कुछ दिन तो खूब हरा-भरा दिखता है, फिर धीरे-धीरे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और आखिर में पूरा पौधा सूख जाता है। ज्यादातर लोग इसे पौधे की कमजोरी मान लेते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि गड़बड़ी पौधे में नहीं, बल्कि उसे लगाने के तरीके और देखभाल में होती है।

असली वजह कमजोर पौधा नहीं, गलत तरीका है

पौधों के जानकार राजा का कहना है कि अगर शुरुआत से ही सही विधि अपना ली जाए तो पौधे महीनों नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ और हरे बने रह सकते हैं। उनके मुताबिक सबसे पहली और सबसे जरूरी बात गमले की सफाई है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। पुराने गमले में पहले से मौजूद फंगस, छोटे कीड़े या खराब हो चुकी मिट्टी नए पौधे की बढ़वार पर सीधा असर डालती है। इसलिए नया पौधा लगाने से पहले गमले को अच्छी तरह धोकर और सुखाकर तैयार करना चाहिए। एक साफ-सुथरा गमला जड़ों को स्वस्थ माहौल देता है, जिससे पौधा बेहतर ढंग से पनपता है।

सबसे नीचे धान की भूसी की परत

राजा बताते हैं कि झारखंड में परंपरागत रूप से पौधे लगाने के लिए धान की भूसी का इस्तेमाल किया जाता है। तरीका यह है कि गमले के सबसे निचले हिस्से में सबसे पहले धान की भूसी की एक परत बिछा दी जाए। यह छोटी सी परत बड़ा काम करती है। यह जरूरत से ज्यादा पानी को संभाल लेती है और मिट्टी में नमी बनाए रखती है। इसका फायदा यह होता है कि जड़ों तक पर्याप्त हवा पहुंचती रहती है और गमले में पानी जमा होकर जड़ें सड़ने की जो आम समस्या होती है, वह काफी हद तक कम हो जाती है।

पोषण की परत, जो पौधे की असली खुराक है

धान की भूसी के ऊपर वर्मी कंपोस्ट, उपजाऊ मिट्टी और गोबर खाद को मिलाकर एक मिश्रित परत तैयार की जाती है। यही परत पौधे के लिए पोषण का मुख्य जरिया बनती है। वर्मी कंपोस्ट में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व पौधे की वृद्धि को रफ्तार देते हैं, वहीं गोबर खाद मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है। इसके बाद पौधे को बहुत संभलकर गमले में लगाना चाहिए, ताकि उसकी जड़ों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। पौधा बैठ जाने के बाद उसके ऊपर एक बार फिर मिट्टी, गोबर खाद और कंपोस्ट की एक हल्की परत डाल देनी चाहिए। इससे जड़ें अच्छी तरह ढकी रहती हैं और उन्हें लगातार जरूरी पोषण मिलता रहता है।

पानी और जगह का संतुलन सबसे अहम

राजा के अनुसार पानी देने में संतुलन रखना बेहद जरूरी है। पौधे को नियमित रूप से, मगर उसकी जरूरत के हिसाब से ही पानी देना चाहिए। बहुत ज्यादा या बहुत कम, दोनों ही स्थितियां पौधे के लिए नुकसानदेह साबित होती हैं। जगह के मामले में उनकी सलाह है कि पौधे को ऐसी जगह रखा जाए जहां हल्की धूप और छांव, दोनों मिलती रहें। लगातार तेज धूप में या पूरी तरह छांव वाली जगह पर रखा गया पौधा ठीक से विकसित नहीं हो पाता।

संतुलन में ही छिपा है हरियाली का राज

कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि सही मिट्टी, जैविक खाद, संतुलित धूप-छांव और थोड़ी सी सावधानी के साथ लगाया गया पौधा लंबे समय तक हरा-भरा और सेहतमंद बना रहता है। झारखंड का यह पारंपरिक तरीका न सिर्फ पौधों की उम्र बढ़ाता है, बल्कि घर की हरियाली को भी सालों तक कायम रखने में मदद करता है।

सवाल-जवाब

गमले में पौधा लगाने से पहले सबसे जरूरी काम क्या है?
जानकार राजा के अनुसार सबसे जरूरी काम गमले की अच्छी तरह सफाई है, क्योंकि पुराने गमले में मौजूद फंगस, कीड़े या खराब मिट्टी नए पौधे की बढ़वार पर असर डालती है। पौधा लगाने से पहले गमले को धोकर सुखा लेना चाहिए।
गमले के सबसे नीचे क्या डालना चाहिए और क्यों?
गमले के सबसे निचले हिस्से में सबसे पहले धान की भूसी की एक परत बिछानी चाहिए। यह अतिरिक्त पानी को नियंत्रित करती है, मिट्टी में नमी बनाए रखती है, जड़ों तक हवा पहुंचाती है और जड़ें सड़ने की समस्या कम करती है।
पौधे के लिए पोषण की परत कैसे तैयार होती है?
धान की भूसी के ऊपर वर्मी कंपोस्ट, उपजाऊ मिट्टी और गोबर खाद मिलाकर एक मिश्रित परत बनाई जाती है। वर्मी कंपोस्ट वृद्धि को बढ़ावा देती है और गोबर खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है।
पौधे को किस जगह रखना चाहिए?
पौधे को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां हल्की धूप और छांव दोनों मिलें। लगातार तेज धूप या पूरी तरह छायादार जगह पौधे के विकास को प्रभावित करती है।
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