अपने घर की छत या बालकनी में ताजे फल उगाने का शौक रखने वालों के लिए हजारा नींबू एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह पौधा दिखने में संतरे की तरह काफी आकर्षक लगता है और इसके लिए बहुत ज्यादा जगह की भी आवश्यकता नहीं होती है। थोड़ी सी सही देखभाल के बाद इसकी शाखाओं पर एक साथ कई सारे फूल और फल लहलहाने लगते हैं। साल के उन महीनों में जब बाजार में नींबू के दाम आसमान छूने लगते हैं, तब घर का यह हरा-भरा पौधा बहुत काम आता है। गार्डनिंग एक्सपर्ट चंद्रशेखर मिश्रा ने गमले में इस पौधे को उगाने की पूरी प्रक्रिया समझाई है।
गमले का चुनाव और ड्रेनेज सिस्टम
नींबू के पौधे की जड़ें गहराई और चौड़ाई दोनों तरफ फैलती हैं, इसलिए शुरुआत से ही बड़ा बर्तन चुनना समझदारी है। इसके लिए करीब 15 से 18 इंच का गमला सबसे उपयुक्त माना जाता है। आप चाहें तो मिट्टी का गमला ले सकते हैं या फिर सीमेंट का विकल्प चुन सकते हैं। पौधे की सेहत के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि गमले के निचले हिस्से में पानी निकलने के लिए पर्याप्त छेद होने चाहिए। यदि पानी अंदर ही रुका रहा, तो जड़ें सड़ सकती हैं और पूरा पौधा खराब हो सकता है।
मिट्टी तैयार करने का सही तरीका
इस पौधे की बेहतर बढ़वार के लिए हमेशा हल्की और भुरभुरी मिट्टी तैयार करनी चाहिए जिसमें पानी रुक न सके। इसके मिश्रण के लिए लगभग 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी लें, जिसमें 30 प्रतिशत वर्मी कम्पोस्ट या पुरानी गोबर की खाद मिलाई जाए। इसके अलावा शेष 20 प्रतिशत हिस्से में रेत मिलाना फायदेमंद होता है ताकि ड्रेनेज अच्छा रहे। इस तैयार मिश्रण में थोड़ी सी नीम खली मिला देने से मिट्टी उपजाऊ बनती है और पौधों को जरूरी पोषण मिलता रहता है।
पौधा खरीदने और लगाने के टिप्स
यद्यपि नींबू के पौधे को बीज के जरिए भी उगाया जा सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया में फल मिलने में काफी लंबा वक्त लग जाता है। यदि आप कम समय में फल पाना चाहते हैं, तो किसी अच्छी नर्सरी से ग्राफ्टेड या पूरी तरह तैयार स्वस्थ पौधा लाना चाहिए। नर्सरी से पौधा खरीदते वक्त उसकी जड़ों, तने और पत्तियों की अच्छी तरह जांच-परख कर लेनी चाहिए ताकि किसी बीमारी या कमजोरी का खतरा न रहे।
धूप और पानी की सही मात्रा
हजारा नींबू के पौधे को स्वस्थ रखने और उस पर भरपूर फल लाने के लिए तेज धूप की बहुत जरूरत होती है। अपने गमले को घर में ऐसी जगह पर स्थापित करें जहां हर रोज कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप आसानी से मिल सके। धूप की कमी होने पर पौधे की ग्रोथ रुक जाती है और उस पर असर पड़ता है। इसके अलावा पौधे में नियमित रूप से पानी डालें लेकिन यह भी ध्यान रखें कि गमले में कीचड़ न जमे। गर्मियों के दिनों में मिट्टी जल्दी सूखती है इसलिए नमी बनाए रखनी पड़ती है, जबकि सर्दियों में पानी की खपत कम हो जाती है। पानी देने से पहले हमेशा मिट्टी की ऊपरी परत को छूकर नमी की जांच जरूर कर लें।
खाद और समय पर प्रूनिंग
इस पौधे को अधिक मात्रा में पोषण की आवश्यकता होती है, इसलिए हर महीने एक बार वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद डालना जरूरी है। जब पौधे पर फूल खिलने शुरू हों, तो पोषण का संतुलन विशेष तौर पर बनाए रखें। आप चाहें तो केले के छिलकों से तैयार घर की खाद का भी उपयोग कर सकते हैं, बशर्ते उसकी मात्रा सीमित रखी जाए। पौधे की समय-समय पर छंटाई यानी प्रूनिंग करना भी बहुत आवश्यक है ताकि सूखी या कमजोर टहनियां हटाई जा सकें। इससे पौधे को एक बेहतरीन आकार मिलता है और नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं। चंद्रशेखर मिश्रा का कहना है कि यदि छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो सीमित जगह में भी घर पर ताजे फल प्राप्त करना बेहद आसान हो जाता है।



















