हिमंत बिस्वा सरमा ने ऊपरी असम को दी सौगात, जोरहाट और शिवसागर में 122 करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटननॉन स्टिक बर्तनों की उम्र बढ़ाने के आसान तरीके, सफाई के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियांझारखंड एथलेटिक्स मीट में पलामू के एथलीटों ने जीते 6 मेडल, 7 खिलाड़ी नेशनल चैंपियनशिप के लिए चयनितहिमाचल प्रदेश से बंदरों की नसबंदी का मॉडल सीखेंगे असम के 6 विधायकवैश्विक रक्षा बाजार में छाया भारत, वित्त वर्ष 2025-26 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन और निर्यात ने बनाया नया ऐतिहासिक रिकॉर्डजैसलमेर में कड़े सुरक्षा इंतजामों और चौबीस घंटे दर्शन व्यवस्था के साथ 642वां रामदेवरा मेला शुरूअसम के सड़क किनारे असमिया गमूसा लेकर खड़ी थी पैरा-एथलीट, गाड़ी से उतरकर मिले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमातीन महीने में खाली हो सकते हैं दुनिया भर के बैंक खाते, चीनी एआई मॉडल बने साइबर अपराधियों का हथियार90 की उम्र में भी नहीं घटा संगीत का जुनून, आशा भोसले के आखिरी रिकॉर्डिंग सेशन को अंशुमान झा ने किया यादमुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत झारखंड में बकरी और मुर्गी पालन पर मिल रही है नब्बे फीसदी तक सब्सिडी, ऐसे उठाएं लाभ
मानसून के बाद गुड़हल के पौधे में आएंगे अनगिनत फूल, बागवानी विशेषज्ञ मो आलम ने बताए देखभाल के आसान उपायजीवनशैली
13 सित॰ 2026, 4:44 pm (1 घंटे पहले)· 0

मानसून के बाद गुड़हल के पौधे में आएंगे अनगिनत फूल, बागवानी विशेषज्ञ मो आलम ने बताए देखभाल के आसान उपाय

मानसून का मौसम खत्म होते ही गुड़हल के पौधे की विशेष देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। पर्याप्त धूप, ड्रेनेज सुधार, वर्मीकंपोस्ट और नीम के तेल का नियमित छिड़काव पौधे को नई कलियों और चमकदार फूलों से भर सकता है।

मानसून की तेज बारिश का दौर थमते ही बगीचे में लगे पौधों को नए सिरे से संवारने का समय आ जाता है। लगातार बारिश और आसमान में छाए बादलों की वजह से धूप कम मिलने के कारण गुड़हल का पौधा अक्सर कमजोर पड़ जाता है। बागवानी विशेषज्ञ मो आलम के अनुसार, जैसे ही मानसून के बाद मौसम साफ होने लगे और धूप निकलने लगे, गुड़हल के पौधे को हर दिन कम से कम पांच से छह घंटे की सीधी धूप वाली जगह पर रखना चाहिए। सही धूप मिलने से पौधा अपनी खोई हुई ऊर्जा वापस पा लेता है और उसमें नई शाखाएं फूटने लगती हैं।

जलभराव की समस्या दूर करें और ड्रेनेज छिद्र खोलें

मानसून की बारिश के दौरान गमले में पानी जमा होना एक आम समस्या है। यदि गमले में पानी ठहरा रह जाए, तो गुड़हल की संवेदनशील जड़ें बहुत जल्दी सड़ने लगती हैं। इसलिए गमले में जमा अतिरिक्त पानी को तुरंत बाहर निकालना बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही गमले के निचले हिस्से में बने ड्रेनेज होल की जांच करें। अगर वह मिट्टी या कचरे से बंद हो गया है, तो उसे तुरंत किसी औजार की मदद से साफ कर खोलें ताकि फालतू पानी आसानी से बाहर निकल सके और जड़ों तक हवा का संचार बना रहे।

ये भी पढ़ें

मिट्टी की हल्की गुड़ाई और वर्मीकंपोस्ट का प्रयोग

गमले से पानी की निकासी सुनिश्चित करने के बाद मिट्टी की ऊपरी परत को हल्का सा सूखने दें। जब मिट्टी ऊपर से सूखी दिखने लगे, तो किसी खुरपी की मदद से गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें। गुड़ाई करने से जड़ों को ताजा ऑक्सीजन मिलती है, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके तुरंत बाद पौधे में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाएं। बारिश के दौरान मिट्टी के बह चुके पोषक तत्वों की भरपाई के लिए यह जैविक खाद पौधे के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है।

मिलीबग और फंगस के हमले से ऐसे बचाएं पौधा

नमी वाले मौसम के तुरंत बाद पौधों पर कीटों और फंगल इन्फेक्शन का खतरा काफी बढ़ जाता है। अक्सर गुड़हल की टहनियों और पत्तियों पर सफेद रंग के कीड़े, जिन्हें मिलीबग कहा जाता है, चिपक जाते हैं। इसके अलावा पत्तियों पर काले या भूरे रंग के धब्बे भी दिखाई देने लगते हैं। इनसे पौधे को सुरक्षित रखने के लिए हफ्ते में एक बार नीम के तेल का हल्का घोल तैयार करें। इस घोल का छिड़काव पौधे के हर हिस्से, पत्तियों के निचले भाग और कलियों पर अच्छी तरह करें ताकि कीट तुरंत समाप्त हो जाएं।

सूखी शाखाओं की छंटाई और पानी का संतुलन

पौधे को स्वस्थ और सुंदर आकार देने के लिए उसकी नियमित छंटाई करना बहुत जरूरी होता है। पौधे पर मौजूद सूखी, पीली या बीमार पत्तियों और पुरानी टहनियों को काटकर हटा दें। छंटाई करने से पौधे की ऊर्जा व्यर्थ की शाखाओं में नष्ट होने के बजाय नई कलियां और फूल उगाने में लगती है। छंटाई और खाद देने के कुछ ही दिनों बाद पौधे में नई हरी-भरी पत्तियां आने लगती हैं। इस दौरान सिंचाई का खास ध्यान रखें और मिट्टी में नमी का संतुलन बनाए रखें, न तो मिट्टी ज्यादा गीली हो और न ही पूरी तरह सूखी।

सर्दियों की शुरुआत से पहले पौधे को बनाएं मजबूत

गुड़हल के पौधे को यदि नियमित रूप से सीधी धूप, सही पोषण और कीटों से सुरक्षा मिले, तो उसमें लगने वाली कलियों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। सर्दियों का मौसम शुरू होने से ठीक पहले की गई यह देखभाल पौधे को पूरे सीजन चमकदार और बड़े आकार के फूलों से भरा रखती है। बागवानी प्रेमियों को हर हफ्ते पौधे की जांच करते रहना चाहिए ताकि किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही उसका उपचार किया जा सके।

सवाल-जवाब

मानसून के बाद गुड़हल के पौधे को कितनी धूप की आवश्यकता होती है?
बागवानी विशेषज्ञ मो आलम के अनुसार, मानसून के बाद गुड़हल के पौधे को रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप में रखना चाहिए।
गुड़हल में मिलीबग और फंगस से बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
कीटों और फंगस से सुरक्षा के लिए हफ्ते में एक बार नीम के तेल के घोल का पूरे पौधे पर अच्छी तरह छिड़काव करें।
मानसून के बाद गुड़हल में कौन सी खाद डालनी चाहिए?
मिट्टी की हल्की गुड़ाई करने के बाद उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।
गमले में पानी रुकने से पौधे पर क्या असर पड़ता है?
गमले में पानी रुकने से जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और जड़ें सड़ने लगती हैं, इसलिए ड्रेनेज होल को तुरंत खोलना जरूरी है।
गुड़हल की सूखी टहनियों की छंटाई क्यों जरूरी है?
सूखी और खराब शाखाओं की छंटाई करने से पौधे की ऊर्जा बचती है और नई कलियां व हरी-भरी टहनियां तेजी से निकलती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR