मानसून की तेज बारिश का दौर थमते ही बगीचे में लगे पौधों को नए सिरे से संवारने का समय आ जाता है। लगातार बारिश और आसमान में छाए बादलों की वजह से धूप कम मिलने के कारण गुड़हल का पौधा अक्सर कमजोर पड़ जाता है। बागवानी विशेषज्ञ मो आलम के अनुसार, जैसे ही मानसून के बाद मौसम साफ होने लगे और धूप निकलने लगे, गुड़हल के पौधे को हर दिन कम से कम पांच से छह घंटे की सीधी धूप वाली जगह पर रखना चाहिए। सही धूप मिलने से पौधा अपनी खोई हुई ऊर्जा वापस पा लेता है और उसमें नई शाखाएं फूटने लगती हैं।
जलभराव की समस्या दूर करें और ड्रेनेज छिद्र खोलें
मानसून की बारिश के दौरान गमले में पानी जमा होना एक आम समस्या है। यदि गमले में पानी ठहरा रह जाए, तो गुड़हल की संवेदनशील जड़ें बहुत जल्दी सड़ने लगती हैं। इसलिए गमले में जमा अतिरिक्त पानी को तुरंत बाहर निकालना बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही गमले के निचले हिस्से में बने ड्रेनेज होल की जांच करें। अगर वह मिट्टी या कचरे से बंद हो गया है, तो उसे तुरंत किसी औजार की मदद से साफ कर खोलें ताकि फालतू पानी आसानी से बाहर निकल सके और जड़ों तक हवा का संचार बना रहे।
मिट्टी की हल्की गुड़ाई और वर्मीकंपोस्ट का प्रयोग
गमले से पानी की निकासी सुनिश्चित करने के बाद मिट्टी की ऊपरी परत को हल्का सा सूखने दें। जब मिट्टी ऊपर से सूखी दिखने लगे, तो किसी खुरपी की मदद से गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें। गुड़ाई करने से जड़ों को ताजा ऑक्सीजन मिलती है, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। इसके तुरंत बाद पौधे में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिलाएं। बारिश के दौरान मिट्टी के बह चुके पोषक तत्वों की भरपाई के लिए यह जैविक खाद पौधे के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है।
मिलीबग और फंगस के हमले से ऐसे बचाएं पौधा
नमी वाले मौसम के तुरंत बाद पौधों पर कीटों और फंगल इन्फेक्शन का खतरा काफी बढ़ जाता है। अक्सर गुड़हल की टहनियों और पत्तियों पर सफेद रंग के कीड़े, जिन्हें मिलीबग कहा जाता है, चिपक जाते हैं। इसके अलावा पत्तियों पर काले या भूरे रंग के धब्बे भी दिखाई देने लगते हैं। इनसे पौधे को सुरक्षित रखने के लिए हफ्ते में एक बार नीम के तेल का हल्का घोल तैयार करें। इस घोल का छिड़काव पौधे के हर हिस्से, पत्तियों के निचले भाग और कलियों पर अच्छी तरह करें ताकि कीट तुरंत समाप्त हो जाएं।
सूखी शाखाओं की छंटाई और पानी का संतुलन
पौधे को स्वस्थ और सुंदर आकार देने के लिए उसकी नियमित छंटाई करना बहुत जरूरी होता है। पौधे पर मौजूद सूखी, पीली या बीमार पत्तियों और पुरानी टहनियों को काटकर हटा दें। छंटाई करने से पौधे की ऊर्जा व्यर्थ की शाखाओं में नष्ट होने के बजाय नई कलियां और फूल उगाने में लगती है। छंटाई और खाद देने के कुछ ही दिनों बाद पौधे में नई हरी-भरी पत्तियां आने लगती हैं। इस दौरान सिंचाई का खास ध्यान रखें और मिट्टी में नमी का संतुलन बनाए रखें, न तो मिट्टी ज्यादा गीली हो और न ही पूरी तरह सूखी।
सर्दियों की शुरुआत से पहले पौधे को बनाएं मजबूत
गुड़हल के पौधे को यदि नियमित रूप से सीधी धूप, सही पोषण और कीटों से सुरक्षा मिले, तो उसमें लगने वाली कलियों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। सर्दियों का मौसम शुरू होने से ठीक पहले की गई यह देखभाल पौधे को पूरे सीजन चमकदार और बड़े आकार के फूलों से भरा रखती है। बागवानी प्रेमियों को हर हफ्ते पौधे की जांच करते रहना चाहिए ताकि किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही उसका उपचार किया जा सके।



















