भारतीय खानपान की परंपरा में देसी घी का स्थान बेहद अहम रहा है। यह रोजमर्रा के भोजन का जायका बढ़ाने के साथ ही शरीर को भरपूर ऊर्जा और जरूरी पोषण देने का काम करता है। लेकिन जैसे जैसे बाजार में इसकी खपत और मांग में तेजी आई है, वैसे वैसे मिलावटी और नकली घी का कारोबार भी तेजी से फैल रहा है। मुनाफा कमाने के चक्कर में घी के भीतर वनस्पति तेल, स्टार्च और कई तरह के घटिया सस्ते पदार्थ मिला दिए जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसलिए अपनी रसोई में इस्तेमाल होने वाले घी की शुद्धता परखना हर परिवार के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।
प्राकृतिक महक और सुगंध से करें पहली जांच
शुद्ध देसी घी की अपनी एक बेहद सौंधी और प्राकृतिक सुगंध होती है। जब इसे हल्का सा तवे या बर्तन में गर्म किया जाता है, तो इसकी यह खास महक और भी ज्यादा उभरकर सामने आती है। यदि घी को आंच पर रखने के बाद भी किसी तरह की महक न आए, या फिर उसमें से किसी कृत्रिम केमिकल जैसी अजीब सी गंध महसूस हो, तो समझ लेना चाहिए कि उसमें भारी मिलावट की गई है।
रंग और बनावट के संकेतों को समझें
आमतौर पर शुद्ध घी का रंग हल्का पीलापन लिए हुए या हल्का सुनहरा दिखाई देता है। हालांकि यह रंग इस बात पर भी निर्भर करता है कि घी गाय के दूध से तैयार किया गया है या फिर भैंस के दूध से। भैंस के दूध का घी अपेक्षाकृत सफेद और गाय का घी पीला दिखता है। यदि डिब्बे में बंद घी का रंग जरूरत से ज्यादा भड़कीला, असामान्य या बहुत गहरा दिखाई दे, तो वह मिलावटी होने का बड़ा संकेत हो सकता है। सिर्फ रंग के भरोसे अंतिम निर्णय नहीं लेना चाहिए, लेकिन यह जांच की दिशा में पहला कदम जरूर बनता है।
हथेली की गर्मी और गर्माहट का टेस्ट
घी की शुद्धता जांचने का एक बहुत ही सरल उपाय हथेली की गर्माहट है। इसके लिए चुटकी भर घी अपनी हथेली पर रखें। असली देसी घी का पिघलने का तापमान कम होता है, इसलिए वह इंसानी शरीर की सामान्य गर्मी पाते ही तुरंत पिघलने लगता है। वहीं दूसरी ओर, यदि हथेली पर रखा घी काफी देर तक ठोस बना रहे, पिघलने में वक्त ले या फिर उसकी बनावट चिपचिपी और अजीब लगे, तो उसमें किसी अन्य ठोस वसा या मिलावटी तेल की मौजूदगी हो सकती है।
आयोडीन की बूंदों से स्टार्च की पकड़
मिलावटखोर घी का वजन और गाढ़ापन बढ़ाने के लिए अक्सर उसमें स्टार्च मिला देते हैं। इसे पकड़ने के लिए एक साफ चम्मच में थोड़ा सा घी लें और उसमें आयोडीन घोल की कुछ बूंदें टपकाएं। यदि घी का रंग बदलकर नीला पड़ने लगे, तो यह साफ प्रमाण है कि इसमें स्टार्च मिलाया गया है। शुद्ध देसी घी में आयोडीन डालने पर किसी भी तरह का रंग परिवर्तन नहीं होता और वह अपने मूल रूप में ही रहता है।
फ्रिज में रखकर परतों की पड़ताल
कांच की एक साफ कटोरी या बर्तन में थोड़ा घी निकालें और उसे कुछ घंटों के लिए फ्रिज के अंदर जमने के लिए रख दें। जब घी पूरी तरह ठंडा हो जाए, तो उसे बाहर निकालकर ध्यान से देखें। यदि घी ऊपर से नीचे तक एक समान बनावट के साथ जमा हुआ है, तो उसे अपेक्षाकृत शुद्ध माना जाता है। इसके विपरीत, यदि बर्तन में अलग-अलग रंगों या घनत्व की परतें नजर आने लगें, तो इसका मतलब है कि घी में अलग-अलग तरह के तेल या बाहरी अशुद्धियां मिलाई गई हैं।
चम्मच में गर्म करके देखें बदलाव
एक चम्मच घी को धीमी आंच पर गर्म करके भी परख की जा सकती है। असली देसी घी आग की आंच लगते ही फौरन तरल बन जाता है और कुछ ही क्षणों में हल्के भूरे रंग में बदलने लगता है, साथ ही उसमें से ताजी महक उठती है। इसके मुकाबले नकली या मिलावटी घी पिघलने में काफी ज्यादा समय लेता है और जलने पर उसमें से बदबूदार या अप्राकृतिक गंध आने लगती है।
खरीदारी करते समय इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
बाजार से घी खरीदते समय हमेशा कुछ बुनियादी सावधानियों पर अमल करना चाहिए ताकि परिवार की सेहत सुरक्षित रहे
- हमेशा किसी जानी-मानी विश्वसनीय कंपनी या भरोसेमंद स्थानीय डेयरी से ही घी की खरीदारी करें।
- डिब्बे या पैकेट पर छपी निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट को बहुत बारीकी से जांचें।
- पैकेट पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई (FSSAI) का वैध लाइसेंस नंबर और मानक गुणवत्ता चिह्न जरूर देखें।
- यदि आप खुला घी खरीद रहे हैं, तो उसकी प्राकृतिक सुगंध और बनावट को छूकर तथा सूंघकर अच्छी तरह परखने के बाद ही घर लाएं।


















