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गाजीपुर के विवेक ने घर की छत पर बसाया औषधीय जंगल, पान और अश्वगंधा समेत उगाए 7 खास पौधेजीवनशैली
17 सित॰ 2026, 7:58 pm (1 घंटे पहले)· 1

गाजीपुर के विवेक ने घर की छत पर बसाया औषधीय जंगल, पान और अश्वगंधा समेत उगाए 7 खास पौधे

गाजीपुर के रहने वाले विवेक मौर्या ने अपने घर के छोटे से परिसर में सात अलग-अलग तरह के औषधीय पौधे उगाकर एक हरा-भरा और उपयोगी गार्डेन तैयार किया है। उनके इस अनूठे घरेलू बगीचे में पान, हरसिंगार और अश्वगंधा जैसे पारंपरिक और सेहतमंद पौधे लहलहा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित शास्त्रीनगर में रहने वाले विवेक मौर्या ने अपने घर पर एक अनूठा औषधीय गार्डेन तैयार किया है। उनके इस घरेलू बगीचे में कई तरह के जड़ी-बूटियों वाले पौधे और बेलें लहलहा रही हैं, जो स्वास्थ्य और प्राकृतिक सुंदरता का बेहतरीन संगम पेश करती हैं। विवेक ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक घरेलू बागवानी का एक अनूठा मेल अपने घर की छत और आंगन में पेश किया है, जहां उन्होंने सात अलग-अलग प्रकार के पौधे बेहद करीने से उगा रखे हैं।

पान की बेल और उसकी खास देखभाल

विवेक मौर्या ने गाजीपुर के शास्त्रीनगर स्थित अपने घर के गमले में पान की बेल को सफलतापूर्वक उगाया है। इस बेल को बढ़ने के लिए एक सहारे और हल्की छांव की खास जरूरत होती है। पान के पत्तों का इस्तेमाल हमारे देश में पारंपरिक रूप से पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और मुंह की ताजगी बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है। इस बेल की अच्छी ग्रोथ के लिए नियमित नमी, उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद और गमले में सही जलनिकासी का होना बेहद जरूरी होता है ताकि जड़ें सड़े नहीं।

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हरसिंगार का विशाल पेड़ और उसके पारंपरिक उपयोग

उसी परिसर में विवेक मौर्या द्वारा लगाया गया हरसिंगार का पौधा अब एक बड़े और विशाल पेड़ का रूप ले चुका है। इस पौधे को पारिजात के नाम से भी जाना जाता है, और इसके फूल अपनी भीनी-भीनी खुशबू के लिए खास तौर पर पहचाने जाते हैं। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में इस पेड़ की पत्तियों, फूलों और बीजों का उपयोग बुखार, सूजन, जोड़ों के दर्द, त्वचा से जुड़ी समस्याओं और पेट की गड़बड़ियों को दूर करने में किया जाता है।

रजनीगंधा की भीनी खुशबू से महकता घर

विवेक मौर्या ने अपने घर में चार अलग-अलग गमलों में रजनीगंधा के पौधे भी रोपे हैं। इसकी पतली-पतली पत्तियां और रात में खिलने वाले सुगंधित सफेद फूल पूरे घर की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। रजनीगंधा का मुख्य उपयोग इत्र, विभिन्न प्रकार की सुगंधों और सजावट के कामों में किया जाता है। हालांकि पारंपरिक चिकित्सा में इसके फूल और जड़ों के औषधीय गुणों का उल्लेख भी मिलता है, लेकिन किसी भी प्रकार का औषधीय सेवन हमेशा किसी विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। इस पौधे को अच्छी जलनिकासी वाली मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियंत्रित मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है।

रसोई की शान पुदीना

घरेलू गार्डेन में उगाया गया पुदीने का पौधा एक ऐसा उपयोगी हर्ब है जिसे गमले में बहुत ही आसानी से विकसित किया जा सकता है। इसकी हरी पत्तियों का इस्तेमाल रोजमर्रा की रसोई में चटनी, स्वादिष्ट शरबत और कई तरह के घरेलू नुस्खों को तैयार करने में किया जाता है। पुदीना पारंपरिक रूप से पाचन को सुधारने और शरीर को तुरंत ताजगी देने के लिए जाना जाता है। इसे हल्की धूप, नियमित रूप से पानी देना और हमेशा नम रहने वाली मिट्टी सबसे ज्यादा पसंद आती है।

आठ साल पुराना अश्वगंधा का पौधा

शास्त्रीनगर निवासी विवेक मौर्या के घर में गमले के अंदर अश्वगंधा का पौधा पिछले आठ वर्षों से लगातार हरा-भरा बना हुआ है। आमतौर पर व्यावसायिक रूप से अश्वगंधा की फसल को करीब 150 से 180 दिनों में तैयार कर लिया जाता है, लेकिन यदि पौधे की उचित देखभाल की जाए तो यह कई वर्षों तक जीवित रह सकता है। इस पुराने पौधे में अब छोटे-छोटे फूल और फल भी आने लगे हैं। अश्वगंधा की जड़ों का आयुर्वेद में मानसिक तनाव को कम करने, शरीर की कमजोरी दूर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली पारंपरिक औषधियों को बनाने में प्रमुखता से इस्तेमाल होता है।

सुगंधित दौना और उसके पारंपरिक फायदे

विवेक मौर्या के इस अनूठे गार्डन में दौना का पौधा पिछले पांच साल से अपनी जगह बनाए हुए है। उनके अनुसार इस पौधे को अमूमन पवित्र तुलसी के पास ही लगाया जाता है और इसकी पत्तियों से एक खास भीनी महक आती है। स्थानीय स्तर पर दौना को एक सुगंधित और औषधीय पौधे के रूप में पहचाना जाता है। इसकी पत्तियों का उपयोग पारंपरिक तरीके से हर्बल चाय, घरेलू नुस्खों और सुगंध के लिए किया जाता है। देश के कुछ हिस्सों में इसे पाचन संबंधी समस्याओं, सर्दी-जुकाम से राहत पाने और कीड़ों को दूर रखने के घरेलू उपायों में भी काम में लाया जाता है।

भुई आंवला और इसके औषधीय गुण

विवेक मौर्या के गार्डन में छोटी-छोटी पत्तियों और नीचे की तरफ लटकते छोटे-छोटे दानों वाला एक और खास पौधा उग आया है जिसे भुई आंवला कहा जाता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस पौधे को जंगली आंवला, भूम्यामलकी और हजारदाना जैसे कई नामों से जाना जाता है। यह पौधा आमतौर पर बरसात के मौसम में नम मिट्टी वाले खेतों, खाली पड़ी जगहों और हल्की छांव वाली जगहों पर अपने आप ही उग जाता है। आयुर्वेद में इस पूरे पौधे का उपयोग पाचन क्रिया को ठीक करने, पेशाब से जुड़ी परेशानियों को दूर करने और लीवर से जुड़ी तमाम समस्याओं के पारंपरिक उपचार में किया जाता है।

सवाल-जवाब

विवेक मौर्या का औषधीय गार्डेन किस शहर में स्थित है?
विवेक मौर्या का यह औषधीय गार्डेन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर शहर के शास्त्रीनगर इलाके में स्थित है।
विवेक के गार्डेन में कितने प्रकार के पौधे लगाए गए हैं?
उनके घर के गार्डेन में कुल सात अलग-अलग प्रकार के औषधीय और सुगंधित पौधे उगाए गए हैं।
पान की बेल को किस तरह की देखभाल की जरूरत होती है?
पान की बेल को बढ़ने के लिए एक सहारे, हल्की छांव, नियमित नमी और अच्छी जलनिकासी वाली मिट्टी की आवश्यकता होती है।
अश्वगंधा का पौधा विवेक के घर में कितने समय से लगा है?
अश्वगंधा का पौधा उनके घर में पिछले आठ वर्षों से लगातार लगा हुआ है।
हरसिंगार के पौधे को और किस नाम से जाना जाता है?
हरसिंगार के पौधे को पारिजात के नाम से भी पहचाना जाता है।
रजनीगंधा के पौधों को गमले में उगाने के लिए क्या जरूरी है?
रजनीगंधा को अच्छी जलनिकासी वाली मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियंत्रित पानी की जरूरत होती है।
भुई आंवला पौधा आमतौर पर कब उगता है?
भुई आंवला आमतौर पर बरसात के मौसम में नम मिट्टी और खाली जगहों पर अपने आप उग जाता है।
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