रात के वक्त जापान की सड़कों पर निकलिए तो हाथ में बियर की कैन या शराब का गिलास थामे लोग आपको आम दिख जाएंगे। कोई सड़क किनारे खड़ी कार के पास बैठकर जाम का मजा ले रहा होगा, तो कोई पार्क की बेंच पर। भारत या किसी और देश में ऐसा करने पर चालान कट सकता है या हवालात तक की नौबत आ सकती है, मगर जापान में यह बिल्कुल वैध है। यहां पब्लिक प्लेसेज पर शराब पीने पर कोई पाबंदी नहीं है।
सबसे बड़ी बात यह कि आप किसी भी सुविधा स्टोर से चौबीसों घंटे शराब खरीद सकते हैं और पार्क में, सड़क किनारे की बेंच पर या यहां तक कि चलते-फिरते भी इसका आनंद ले सकते हैं।
कानून की नहीं, संस्कार की लगाम
जापान की खास बात यही है कि यहां कानूनों से ज्यादा सामाजिक नियम मजबूत हैं। शराब को नैतिक बुराई के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि इसे आपसी रिश्ते मजबूत करने और तनाव से राहत पाने का जरिया माना जाता है। यही वजह है कि सार्वजनिक नशा यहां आम बात है। लोग ज्यादातर खुद को संभालकर, जिम्मेदारी से पीते हैं।
हालांकि वैध होने का मतलब मनमानी नहीं है। शिष्टाचार का पालन यहां जरूरी है। ज़ोर से बोलना, शोर मचाना या कूड़ा फैलाना बेहद असभ्य माना जाता है। उम्मीद की जाती है कि अगर आप बाहर पी रहे हैं तो शांति और जिम्मेदारी से पिएं। ध्यान रहे, अगर किसी ने ज्यादा हंगामा या परेशानी खड़ी कर दी तो फिर यह सीधे कानून का मामला बन जाता है। मतलब साफ है, हल्की बातचीत और शांति के साथ ड्रिंक करने पर कोई दिक्कत नहीं।
एक खास नियम ट्रेनों को लेकर है। स्थानीय ट्रेनों के अंदर शराब पीना आमतौर पर मना है, लेकिन बुलेट ट्रेन में इसकी छूट है।
शर्मिंदगी ही सबसे बड़ी सजा
जापान की कम अपराध दर और ऊंचे सामाजिक अनुशासन की वजह से पुलिस को सख्त नियमों की जरूरत ही नहीं पड़ती। लोग खुद पर काबू रखते हैं और यहां शर्मिंदगी ही सजा का काम कर देती है। विदेशी पर्यटकों को यह व्यवस्था भले ही अजीब लगे, पर यहां यही चलन है। बता दें कि जापान में युवाओं के लिए शराब पीने की उम्र 20 साल तय है।
महिलाओं की बात करें तो पहले उनके लिए सार्वजनिक तौर पर शराब पीना टैबू माना जाता था, लेकिन अब यह आम हो चुका है। वे अकेले या दोस्तों के साथ इसका लुत्फ उठाती हैं।
चेरी ब्लॉसम का मौसम और दिनभर का जाम
वसंत ऋतु में यह आजादी अपने चरम पर पहुंच जाती है, खासकर जब चेरी ब्लॉसम खिलने का मौसम हो। तब लाखों लोग पार्कों में पेड़ों के नीचे ब्लू शीट्स बिछाकर सुबह से रात तक शराब पीते हैं। अच्छी जगह कब्जाने के लिए लोग सुबह जल्दी पहुंच जाते हैं, और इनमें कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर सीईओ तक सब शामिल होते हैं। हजारों लोग पेड़ों के नीचे जुटते हैं और वोदका से लेकर स्कॉच तक पीते नजर आते हैं। हालांकि अक्सर हद से ज्यादा पी लेने के कारण कई लोग अस्पताल भी पहुंच जाते हैं।
सड़क पर सोते नशेड़ी, पर परेशान कोई नहीं करता
रात में ज्यादा पीने के बाद लोग अक्सर सड़क, स्टेशन या पार्क में ही सो जाते हैं। दिलचस्प यह है कि कोई उन्हें परेशान नहीं करता। कई बार राहगीर उनके पास पानी की बोतल तक रख देते हैं, ताकि वे उठें तो पी सकें। पुलिस या स्टेशन स्टाफ उन्हें धीरे से जगाकर घर भेज देते हैं। अगर नशे में किसी ने हंगामा नहीं किया, तो अगले दिन सब कुछ भुला दिया जाता है।
नशा नहीं, रिश्तों की डोर 'नोमुनिकेशन'
जापान में शराब का कल्चर बेहद अनोखा है और यह सामाजिक व कामकाजी जिंदगी से गहराई तक जुड़ा है। यहां शराब महज नशा नहीं, बल्कि रिश्ते बनाने, तनाव घटाने और संवाद का जरिया है। इसी को “नोमुनिकेशन” कहा जाता है।
बॉस के साथ पीना यानी वफादारी
यह जापान की कॉर्पोरेट संस्कृति का सबसे बड़ा हिस्सा है। दफ्तर के बाद सहकर्मी और बॉस साथ मिलकर इज़ाकाया यानी जापानी पब जाते हैं। ऐसा करके वे ऑफिस की हाइयारिकी यानी पद की दीवार को थोड़ा ढीला करते हैं, खुलकर बात करते हैं और टीम स्पिरिट बढ़ाते हैं। यहां बॉस के साथ ड्रिंक करना वफादारी का प्रतीक माना जाता है और इनवाइट ठुकराना मुश्किल होता है। हालांकि अब युवा पीढ़ी इस परंपरा को चुनौती देने लगी है। ये पार्टियां लंबी चलती हैं, मुख्य पार्टी के बाद “दूसरी पार्टी” और कभी-कभी तीसरी भी होती है।
हमारा चखना, उनका इज़ाकाया
भारत में जिसे हम शराब के साथ खाने-पीने की चीजें यानी चखना कहते हैं, जापान में उसी अंदाज को इज़ाकाया कहा जाता है, जहां छोटे-छोटे व्यंजनों के साथ शराब परोसी जाती है। एक खास रिवाज यह है कि लोग अपना गिलास खुद नहीं भरते, बल्कि दूसरे का भरते हैं। टोस्ट के लिए वे “कंपाई!” कहते हैं, जबकि हमारे यहां ऐसे मौकों पर आमतौर पर चीयर्स कहा जाता है।
सेहत पर मंडराता खतरा
इस संस्कृति का एक स्याह पहलू भी है। जापान में हद से ज्यादा पीने के कारण स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। लीवर डैमेज और अल्कोहल डिपेंडेंस जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं। युवा पुरुषों में हानिकारक ड्रिंकिंग की दर ग्लोबल औसत से ज्यादा है। हालांकि राहत की बात यह है कि नई जेनरेशन अब इसमें कमी ला रही है।













