शाम की हल्की भूख मिटाने के लिए भेलपूरी या चटपटी नमकीन का ख्याल आते ही सबसे पहले मुरमुरे की याद आती है। आमतौर पर लोग बाजार से पैकेटबंद मुरमुरा खरीदकर लाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि घर में मौजूद सामान्य चावल से भी बेहद आसानी से कुरकुरे मुरमुरे बनाए जा सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के लिए किसी बड़ी औद्योगिक मशीन की कतई आवश्यकता नहीं होती, बल्कि रसोई में इस्तेमाल होने वाली साधारण कड़ाही और सफेद नमक की मदद से ही यह काम पूरा हो जाता है। चावल को सही तापमान पर तैयार करना, उसमें से नमी हटाना और गर्म नमक की आंच पर भूनना इस पूरे नुस्खे का सबसे अहम आधार है।
मुरमुरा बनाने के लिए सही चावल का चयन
घर में मुरमुरा तैयार करने के लिए अनाज का चुनाव काफी मायने रखता है। जानकारों के अनुसार मोटे दाने वाले उसना चावल, जिसे पारबॉयल्ड राइस भी कहा जाता है, इसके लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। उसना चावल के दानों की बनावट ऐसी होती है कि वे तेज आंच पर समान रूप से खिलते हैं। अगर कोई पहली बार इसे बनाने का प्रयास कर रहा है, तो बेहतर होगा कि शुरुआत में कम मात्रा में चावल लेकर प्रयोग किया जाए, ताकि अनाज की प्रकृति और आंच का सही अंदाजा लग सके। अलग-अलग किस्म के चावल और उनके सूखने के स्तर पर अंतिम परिणाम निर्भर करता है।
चावल भिगोने और सुखाने का पहला चरण
इस घरेलू तरीके को आजमाने के लिए सबसे पहले लगभग दो कप मोटे दाने वाले उसना चावल लें। एक बर्तन में पानी गर्म करें और उसमें थोड़ा सा नमक मिला दें। इसके बाद चावल को इस हल्के गर्म नमकीन पानी में डालकर कम से कम 30 मिनट के लिए भीगने दें। इस तय समय में चावल के दाने पानी सोखकर भीतर तक नरम हो जाते हैं और उनका आकार थोड़ा फूल जाता है। आधा घंटा बीतने के बाद भीगे हुए चावलों को एक जालीदार छलनी में निकाल लें, ताकि अतिरिक्त पानी पूरी तरह से अलग हो जाए।
इसके बाद पानी छने हुए चावल को किसी साफ सूती कपड़े अथवा चौड़ी थाली में एक समान पतली परत में फैलाएं। अब इन दानों को धूप में अच्छी तरह सूखने के लिए रख दें। ध्यान रखें कि दानों के अंदर किसी भी तरह की नमी बाकी न रहे। इस चरण में जल्दबाजी करना नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि यदि चावल में हल्की सी भी नमी रह गई, तो भूनते समय दाने खिलेंगे नहीं और मुरमुरे में वह जरूरी कुरकुरापन नहीं आ पाएगा।
कड़ाही में गर्म नमक से मुरमुरा भूनने की तकनीक
जब चावल पूरी तरह सूखकर कड़े हो जाएं, तब गैस पर एक भारी तले वाली कड़ाही चढ़ाएं और उसमें करीब एक कटोरी पिसा हुआ सफेद नमक डाल दें। गैस जलाकर नमक को तेज आंच पर खूब गर्म होने दें। नमक को करछुल से लगातार चलाते रहें, जिससे पूरी कड़ाही में तापमान एक समान बना रहे। जब नमक से अच्छी तपिश निकलने लगे, तब उसमें तैयार सूखे चावल डाल दें।
चावल डालते ही तेज आंच पर उसे बिना रुके लगातार चलाते रहना जरूरी है। जैसे ही चावल के दाने अत्यधिक गर्म नमक के संपर्क में आते हैं, वे पलक झपकते ही चटककर खिलने लगते हैं और सफेद मुरमुरे का रूप ले लेते हैं। जब कड़ाही के अधिकांश दाने अच्छी तरह फूल जाएं, तो तुरंत गैस की आंच बंद कर दें। अब पूरी सामग्री को बिना देर किए एक बड़ी धातु की छलनी में पलटें, जिससे गर्म नमक नीचे छन जाएगा और छलनी में केवल फूले हुए, खस्ता मुरमुरे रह जाएंगे। इन्हें पूरी तरह सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें, जिसके बाद इन्हें किसी वायुरोधी डिब्बे में सुरक्षित रखा जा सकता है।
उबालकर और तेल में भूनने का वैकल्पिक तरीका
नमक के अलावा मुरमुरा तैयार करने का एक दूसरा विकल्प भी आजमाया जा सकता है। इस वैकल्पिक पद्धति में चावल को पहले सामान्य रूप से उबाला जाता है और फिर धूप में तब तक सुखाया जाता है जब तक कि वे बिल्कुल सूखे और कड़क न हो जाएं। इस तरीके में भी नमी का न होना सबसे अनिवार्य शर्त है।
पूरी तरह सूख चुके इन उबले चावलों को भूनने के लिए कड़ाही में थोड़ा सा खाद्य तेल गर्म किया जाता है। गर्म तेल में सूखे चावल डालकर उन्हें लगातार हिलाते हुए लगभग एक मिनट तक भुना जाता है। इस दौरान दानों का आकार बढ़ता है और वे खस्ता हो जाते हैं। हालांकि इस विधि में भी अगर चावल अच्छी तरह सूखे नहीं होंगे, तो वे तेल सोख लेंगे और दाने ठीक से खिल नहीं पाएंगे। इसलिए दोनों ही तरीकों में चावल को सुखाना सबसे निर्णायक कदम है।

















