गमले में कली तो नजर आई, लेकिन खिलने से ठीक पहले वह टूटकर गिर गई, या फिर पौधा हफ्तों से एक ही जगह ठहरा हुआ है, न नई पत्ती न नई शाख. अगर आपके आंगन या बालकनी में लगे गुड़हल, चमेली और मोगरे के साथ भी यही हो रहा है, तो जिम्मेदार सिर्फ पानी या धूप की कमी नहीं, बल्कि मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का गड़बड़ हिसाब हो सकता है.
इंसानों की तरह ही पौधों को भी बढ़ने, हरा-भरा दिखने और भरपूर फूल देने के लिए एक तय पोषण चाहिए होता है. शुरुआत में गमले की मिट्टी में जो पोषक तत्व होते हैं, वे कुछ महीनों में इस्तेमाल होकर घटने लगते हैं. उसके बाद अगर बाहर से खुराक न मिले तो पौधा कमजोर पड़ने लगता है, पत्तियां रंग खोने लगती हैं और कलियां पूरी तरह विकसित हुए बिना ही झड़ जाती हैं. यही वजह है कि सिर्फ पानी देने या धूप में रखने से काम नहीं चलता, मिट्टी की खुराक पर भी बराबर ध्यान देना पड़ता है.
तीन मुख्य पोषक तत्वों का हिसाब समझिए
किसी भी खाद के पैकेट पर तीन अंक जरूर छपे मिलते हैं, यही N-P-K होता है यानी नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम. नाइट्रोजन पत्तियों और तने को बढ़ाने का काम करता है, इसकी कमी से पौधा दुबला और पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, मगर इसकी अधिकता भी नुकसानदेह है क्योंकि तब पौधा सिर्फ पत्तों में उलझा रह जाता है और फूल कम आते हैं. फॉस्फोरस जड़ों को मजबूत बनाता है और पौधे के समग्र विकास में मदद करता है, इसे सही मात्रा में देना जरूरी है, न कम न ज्यादा. पोटैशियम पौधे को मौसम की मार, कीट या बीमारी जैसे तनाव झेलने की ताकत देता है और उसकी सामान्य वृद्धि व फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया के लिए भी जरूरी है. इसीलिए खाद खरीदते वक्त पैकेट पर लिखे 10-10-10 जैसे नंबर जरूर पढ़ें, इसका मतलब है तीनों तत्व बराबर अनुपात में मौजूद हैं. लेकिन याद रखें, हर मिट्टी और हर पौधे की मांग अलग होती है, इसलिए एक ही अनुपात हर गमले पर लागू नहीं होता.
गुड़हल को क्यों चाहिए थोड़ी अतिरिक्त देखभाल
गुड़हल के पौधे में सिर्फ N-P-K से काम नहीं चलता. इसमें आयरन और मैंगनीज जैसे सूक्ष्म तत्वों की कमी भी अक्सर देखने को मिलती है, खासकर तब जब मिट्टी की स्थिति अनुकूल न हो. इन दोनों तत्वों की उपलब्धता कम होते ही नई पत्तियां हल्की पीली पड़ने लगती हैं और पौधे की चमक फीकी पड़ जाती है. इसका मतलब यह नहीं कि इन्हें बेवजह डालते रहें, बल्कि जब लक्षण दिखें तभी इनकी पूर्ति करनी चाहिए.
कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर और बाकी सूक्ष्म तत्व
N-P-K के अलावा कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर भी पौधे की सेहत के लिए जरूरी हैं, हालांकि इनकी जरूरत मुख्य तीन तत्वों की तुलना में काफी कम मात्रा में होती है. वहीं जिंक, कॉपर और बोरॉन जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की जरूरत तो और भी कम होती है. यहां एक बात साफ समझ लेनी चाहिए, इन सूक्ष्म तत्वों को जरूरत से ज्यादा डालना फायदे की बजाय नुकसान कर सकता है, इसलिए इन्हें सोच-समझकर और सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए.
फूलदार पौधों के लिए व्यावहारिक डाइट चार्ट
सबसे पहले गमले की ऊपरी मिट्टी को धीरे से थोड़ा ढीला करें और अच्छी तरह सड़ी हुई ऑर्गेनिक खाद या कंपोस्ट की हल्की परत डालें, ध्यान रहे कि यह खाद सीधे तने से चिपके नहीं. अगर पौधा एक्टिव ग्रोथ के दौर में है और उसे अतिरिक्त पोषण की जरूरत महसूस हो, तो पैकेट पर दिए निर्देशों के अनुसार फूलदार पौधों के लिए बनी संतुलित NPK खाद हल्की मात्रा में दी जा सकती है. मात्रा तय करते वक्त हमेशा प्रोडक्ट लेबल और गमले या पौधे के आकार को ध्यान में रखें.
आयरन, मैंगनीज या किसी अन्य सूक्ष्म तत्व को तभी दें जब पौधे में इसकी कमी के लक्षण साफ दिखाई दें या मिट्टी की जांच में इसकी जरूरत सामने आए. मिट्टी की जांच से न सिर्फ फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे तत्वों की उपलब्धता पता चलती है, बल्कि मिट्टी का pH स्तर भी सामने आ जाता है, जो खाद तय करने में मदद करता है. चमेली की बात करें तो इसकी ज्यादातर किस्में अच्छी ड्रेनेज वाली मिट्टी में बेहतर पनपती हैं. क्रेप जैस्मिन नम मगर अच्छी तरह से पानी निकल जाने वाली मिट्टी में सबसे अच्छा रिजल्ट देता है, और अगर मिट्टी थोड़ी क्षारीय हो तो नियमित हल्की खाद देने से पत्तियों के पीले पड़ने यानी क्लोरोसिस जैसी दिक्कत से बचा जा सकता है.
ज्यादा खाद डालना समझदारी नहीं
यहां सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है यह सोचना कि ज्यादा खाद यानी ज्यादा फूल. सच्चाई इसके उलट है. गुड़हल में जरूरत से ज्यादा खाद डालने पर पत्तियां तो खूब बढ़ती हैं, मगर फूलों की संख्या घट सकती है. अत्यधिक खाद जड़ों को नुकसान पहुंचाती है और मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ देती है, जिसका सीधा असर पौधे की सेहत पर पड़ता है. इसलिए खाद की मात्रा हमेशा मिट्टी और पौधे की असल जरूरत देखकर ही तय करनी चाहिए, न कि जल्दी फूल पाने की जल्दबाजी में.
कुल मिलाकर गुड़हल, चमेली या किसी भी फूलदार पौधे के लिए कोई एक फिक्स नुस्खा काम नहीं करता. पौधे की उम्र, गमले का आकार, मिट्टी की किस्म, मौसम और उसकी मौजूदा ग्रोथ को देखकर ही खाद और पोषण की योजना बनानी चाहिए. भरपूर धूप, सही मात्रा में पानी, अच्छी ड्रेनेज और संतुलित पोषण, ये चारों चीजें साथ मिलकर ही आपके गार्डन को हमेशा हरा-भरा और फूलों से लदा रख सकती हैं.



















