बगीचे के शौकीनों के लिए सबसे बड़ा डर यही होता है कि महंगे दामों में लाया गया पौधा अचानक मुरझा जाए। यह नुकसान इसलिए और तकलीफदेह होता है क्योंकि कई शौकीन मुंहमांगे दाम देकर दुर्लभ किस्म के पौधे लाते हैं, और वे कुछ ही हफ्तों में दम तोड़ देते हैं। ज्यादातर मामलों में इसकी वजह पानी की सही मात्रा न मिलना नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा पानी जड़ में जमा रहना होता है। जड़ में नमी लंबे समय तक टिकी रहे तो वह सड़ने लगती है और पौधा धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। ऐसे में हरियाली को सहेजने का सपना पूरा करने वालों के लिए एक आसान और सस्ता तरीका काम आ सकता है।
20 साल से गार्डनिंग कर रहे हैं जहानाबाद के राकेश कुमार
बिहार के जहानाबाद जिले के मुठेर गांव में रहने वाले राकेश कुमार पिछले 20 साल से बागवानी कर रहे हैं। उन्होंने अपने घर की छत पर 150 से ज्यादा पौधे लगा रखे हैं, जिनमें एडेनियम, उड़हुल और कैक्टस जैसी किस्में शामिल हैं। इतने लंबे अनुभव के बाद राकेश कुमार का साफ मानना है कि पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान जड़ में पानी भरे रहने से ही होता है।
प्लास्टर की बची रेत को फेंकें नहीं
राकेश कुमार बताते हैं कि जो लोग नए-नए बागवानी में हाथ आजमा रहे हैं, उन्हें शुरुआत में पौधे सीधे रेत में ही लगाने चाहिए। यह तरीका सुनने में मामूली लगता है, लेकिन बागवानी में बेहद कारगर साबित होता है। किसी नए बागवान के लिए यह भरोसा बहुत मायने रखता है, क्योंकि पहला ही पौधा सूख जाए तो अक्सर लोग बागवानी से मन हटा लेते हैं। इससे पौधे की जड़ सड़ने का खतरा काफी कम हो जाता है और मेहनत बेकार नहीं जाती। दिलचस्प बात यह है कि यह रेत कहीं बाहर से खरीदने की जरूरत नहीं। दीवारों पर प्लास्टर करते वक्त मसाले में जो रेत इस्तेमाल होती है, उसे पहले छलनी से छाना जाता है। छानने के बाद बचा हुआ मोटा हिस्सा अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, जबकि यही रेत पौधों को उगाने में बहुत काम आ सकती है। ज्यादातर घरों में इसे निर्माण के मलबे के साथ यूं ही झाड़ कर फेंक दिया जाता है, यह जाने बगैर कि इसका दोबारा इस्तेमाल हो सकता है।
मिट्टी की जगह रेत का इस्तेमाल कैसे करें
राकेश कुमार के मुताबिक गमले में तैयार होने वाले मिश्रण में करीब 90 प्रतिशत हिस्सा रेत का और बाकी 10 प्रतिशत हिस्सा वर्मी कंपोस्ट और मिट्टी का होना चाहिए। इसी अनुपात में पौधा लगाने पर उसका विकास बेहतर तरीके से होता है। इसकी वजह यह है कि जब पौधों को ज्यादा मिट्टी में रोपा जाता है और उसमें खाद डाली जाती है, तो मिट्टी सख्त होने लगती है। मिट्टी के सख्त हो जाने पर न तो जड़ ठीक से फैल पाती है और न ही तना मजबूती से बढ़ पाता है, यानी पौधे को हर तरह से नुकसान ही होता है। सख्त मिट्टी में जड़ों तक हवा भी ठीक से नहीं पहुंच पाती, जिससे पौधे का विकास और धीमा पड़ जाता है और पानी के जमाव से हुआ नुकसान और बढ़ जाता है।
इसके उलट रेत का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वह कभी जकड़ती नहीं और जड़ों को खुलकर फैलने की जगह देती है। यही वजह है कि रेत में लगाए गए पौधों की जड़ें आसानी से नहीं सड़तीं और वे तेजी से हरे-भरे होते हैं। जो लोग अपने घर की बालकनी या छत पर बगीचा बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह देसी तरीका बिना किसी अतिरिक्त खर्च के पौधों को लंबे समय तक जिंदा और स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है। चूंकि यह रेत लगभग मुफ्त मिलती है और वैसे भी मलबे के तौर पर फेंकी ही जानी थी, इसलिए इस तरीके में मेहनत के अलावा कोई खर्च नहीं आता, जो पौधों के मुरझाने से परेशान रह चुके किसी भी शख्स के लिए आसान समाधान है।



















