कभी सोचा है कि आपका बेडरूम या स्टडी टेबल आपके बारे में क्या बयां करता है? दीवारों का रंग, शेल्फ पर सजी चीज़ें और फर्नीचर रखने का तरीका, ये सब मिलकर असल में आपके स्वभाव की कहानी कहते हैं. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर मिनिमेलिज्म और क्लटरकोर जैसे रूम डेकोर ट्रेंड्स को लेकर बहस छिड़ी रहती है, खासकर जेन जी और युवाओं के बीच. दोनों स्टाइल देखने में एक-दूसरे के बिल्कुल उलट लगते हैं, फिर भी दोनों का मकसद एक ही है, अपने रहने की जगह को अपनी पसंद और आदतों के हिसाब से ढालना.
कोई इंसान खाली, सुव्यवस्थित और सिर्फ जरूरी सामान वाले कमरे में सुकून महसूस करता है, तो कोई किताबों, फोटो फ्रेम, पौधों और यादगार चीज़ों से भरे कमरे में ज्यादा अपनापन महसूस करता है. सवाल यह है कि आखिर आपकी पर्सनैलिटी किस स्टाइल से मेल खाती है.
मिनिमेलिज्म पसंद है तो आपकी सोच कैसी हो सकती है
मिनिमेलिस्ट कमरे की सबसे बड़ी पहचान होती है कम सामान, खुली जगह और बेहद सिंपल लुक. ऐसे कमरों में न्यूट्रल कलर पैलेट, काम की चीज़ों वाला फर्नीचर, खुली जगह और सीमित डेकोर देखने को मिलता है. अगर आपको बिखरा हुआ सामान बिल्कुल पसंद नहीं, हर चीज़ के लिए एक तय जगह चाहिए होती है और सफाई देखकर ही आपका दिमाग शांत होता है, तो समझ लीजिए मिनिमेलिज्म आपकी पर्सनैलिटी से मेल खाता है. यह स्टाइल उन लोगों को सूट करता है जो चीज़ों को जमा करने के बजाय जगह खाली रखना पसंद करते हैं.
मिनिमेलिस्ट कमरा किन लोगों को भाता है
ऐसे लोग आमतौर पर हर फैसले में प्रैक्टिकल सोच अपनाते हैं. खरीदारी के वक्त भी उनके दिमाग में यही सवाल घूमता रहता है कि इस चीज़ की असल में जरूरत है या नहीं. मसलन, एक मिनिमेलिस्ट की डेस्क पर सिर्फ लैपटॉप, एक नोटबुक, एक लैंप और शायद एक छोटा पौधा नजर आएगा, बाकी सारा सामान दराज या शेल्फ के अंदर करीने से रखा मिलेगा. लेकिन इसका मतलब यह हरगिज नहीं कि मिनिमेलिस्ट कमरा उबाऊ होता है. एक स्टाइलिश लैंप, अच्छी बेडशीट या दीवार पर लगा कोई आर्टवर्क भी पूरे कमरे को खूबसूरत बना सकता है, बस सामान की मात्रा सीमित और चुनी हुई रहती है. यानी मिनिमेलिज्म का मतलब कंजूसी नहीं, बल्कि हर चीज़ का सोच-समझकर चुनाव है.
क्लटरकोर स्टाइल असल में किसके लिए बना है
अब जरा उस कमरे की कल्पना कीजिए जहां दीवारों पर पोस्टर चिपके हैं, शेल्फ किताबों और छोटी-छोटी कलेक्टिबल चीज़ों से भरी है, डेस्क पर गमले रखे हैं और कमरे के हर कोने में कोई न कोई निजी चीज़ झांक रही है. यही है क्लटरकोर स्टाइल.
अगर आपको घूमने गई जगहों से लाई छोटी-छोटी यादगार चीज़ें संभालकर रखना पसंद है, पसंदीदा किताबें शेल्फ पर सजाकर दिखाना अच्छा लगता है, फोटो फ्रेम लगाना या अपनी छोटी-छोटी पसंद को कमरे में उतारना अच्छा लगता है, तो क्लटरकोर आपके स्वभाव के ज्यादा करीब है. इस स्टाइल में फर्नीचर का आपस में मैच करना उतना मायने नहीं रखता, जितना पर्सनल एक्सप्रेशन. किसी के लिए बचपन की तस्वीरें खास होती हैं, किसी के लिए पुराने रिकॉर्ड्स, तो किसी के लिए एनीमे के पोस्टर, और यही चीज़ें कमरे को उसका असली किरदार देती हैं. यहां कमरे का बिल्कुल व्यवस्थित दिखना जरूरी नहीं, बल्कि उसमें बसा अपनापन और लिव्ड-इन फील ज्यादा मायने रखता है. यही वजह है कि क्लटरकोर को अक्सर एक ऐसे कमरे से जोड़ा जाता है जो अपनी कहानी खुद बयां करता हो.
दोनों में से आपके लिए बेहतर कौन-सा स्टाइल है
अगर आपको साफ-सुथरी जगह, सिंप्लिसिटी और चीज़ों का व्यवस्थित होना पसंद है, तो मिनिमेलिज्म आपके लिए सही ऑप्शन हो सकता है. वहीं अगर आप अपने कमरे में क्रिएटिविटी, पुरानी यादें और सेल्फ-एक्सप्रेशन को जगह देना चाहते हैं, तो क्लटरकोर आपको ज्यादा नेचुरल लगेगा. हालांकि जरूरी नहीं कि आपको इन दोनों में से सिर्फ एक ही स्टाइल चुनना पड़े.
आजकल दोनों स्टाइल का बैलेंस्ड मिश्रण भी काफी प्रैक्टिकल माना जा रहा है. कमरे का बेस और फर्नीचर सिंपल रखें, लेकिन अपनी पसंदीदा किताबें, फोटो, पौधे या कलेक्टिबल्स को खुलकर डिस्प्ले करें. इससे कमरा न तो बहुत खाली-खाली लगता है और न ही बहुत भरा हुआ, बल्कि दोनों स्टाइल की खूबियां एक साथ नजर आती हैं. आखिर में बात सिर्फ इतनी सी है कि सबसे अच्छा कमरा वही होता है, जिसमें आपको अपने जैसा महसूस हो, चाहे वह पूरी तरह खाली दीवारों वाला हो या यादों से भरा हुआ.



















