चेहरे को अच्छी तरह धोने के बाद भी जब त्वचा पर हाथ फेरने से सपाट एहसास नहीं होता, बल्कि माथे, गाल या ठुड्डी के हिस्से पर बारीक दाने महसूस होते हैं, तो अधिकांश लोग इसे मुंहासा मान बैठते हैं। वास्तविकता यह है कि त्वचा पर नजर आने वाला हर उभार पिंपल की श्रेणी में नहीं आता। मेडिकल नजरिए से यह सामान्य स्किन टेक्सचर, बंद रोमछिद्र, व्हाइटहेड्स या मिलिया की स्थिति हो सकती है। लोकप्रिय चर्चाओं में इसे स्किन टेक्सचर के नाम से जाना जाता है, यद्यपि यह अपने आप में कोई चिकित्सकीय रोग अथवा मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है।
स्किन टेक्सचर और इसके उभरने की असली वजहें
मानव त्वचा का धरातल कभी भी कांच की तरह पूरी तरह समतल नहीं होता। हमारी त्वचा पर अनगिनत रोमछिद्र, बालों की बारीक जड़ें और प्राकृतिक परतें मौजूद होती हैं, जिनके कारण थोड़ा बहुत उभार या हल्का टेक्सचर होना पूरी तरह स्वाभाविक है। परेशानी तब महसूस होती है जब यह बनावट बहुत अधिक खुरदरी या असमान दिखाई देने लगे। जब रोमछिद्रों के भीतर अतिरिक्त प्राकृतिक तेल और मृत त्वचा कोशिकाएं एकत्रित हो जाती हैं, तो वे व्हाइटहेड्स का रूप ले लेती हैं। त्वचा के रंग जैसे अथवा हल्के सफेद दिखने वाले इन दानों को लोग प्रायः केवल असमान बनावट मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
इसके समानांतर एक अन्य स्थिति मिलिया की भी होती है। त्वचा की ऊपरी सतह के नीचे बारीक सफेद सिस्ट बन जाते हैं, जिनमें केराटिन जमा हो जाता है। ये छोटे उभार विशेष रूप से चेहरे के नाजुक हिस्सों पर उभरते हैं। देखने में ये दाने जैसे प्रतीत हो सकते हैं, किंतु इनका मुंहासों से कोई सीधा संबंध नहीं होता और इनका स्वभाव पूरी तरह भिन्न होता है।
कठोर स्क्रबिंग से क्यों बचना चाहिए
चेहरे की असमान बनावट को तुरंत हटाने की जल्दी में कई लोग बार-बार स्क्रब का सहारा लेते हैं या चेहरे को कपड़े से जोर-जोर से रगड़ने लगते हैं। त्वचा विशेषज्ञों की दृष्टि में यह तरीका समस्या का समाधान करने के बजाय नुकसान पहुंचाता है। चेहरे को अत्यधिक रगड़ने से त्वचा की ऊपरी सुरक्षात्मक परत को भारी क्षति पहुंचती है, जिससे लाली, खिंचाव, रूखापन और अत्यधिक संवेदनशीलता पैदा हो सकती है।
यदि त्वचा पहले से ही बंद रोमछिद्रों या मुंहासों के दौर से गुजर रही है, तो तेज रगड़ से सूजन और परेशानी कई गुना बढ़ सकती है। इसलिए कठोर उपायों के स्थान पर एक सौम्य और संतुलित स्किनकेयर दिनचर्या अपनानी चाहिए। चेहरे को धोते समय केवल उंगलियों के पोरों से हल्का दबाव देते हुए सफाई करें। चेहरे पर मौजूद छोटे उभारों को कभी भी नाखूनों से खुरचने, फोड़ने या जबरन दबाकर निकालने का प्रयास न करें।
सैलिसिलिक एसिड का संतुलित प्रयोग
यदि त्वचा के उभार मुख्य रूप से बंद रोमछिद्रों, ब्लैकहेड्स अथवा व्हाइटहेड्स के कारण पैदा हुए हैं, तो सैलिसिलिक एसिड युक्त उत्पाद उपयोगी साबित होते हैं। यह घटक रोमछिद्रों की गहराई में उतरकर वहां जमा अतिरिक्त सीबम और अशुद्धियों को बाहर निकालने में सहायता करता है, जिससे अवरुद्ध छिद्र आसानी से खुल जाते हैं।
सैलिसिलिक एसिड का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। इसे आवश्यकता से अधिक लगाने या दिन में कई बार इस्तेमाल करने से त्वचा की नमी छिन सकती है, जिससे चेहरा लाल और अत्यधिक संवेदनशील हो सकता है। इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करते समय शुरुआत बहुत कम मात्रा और लंबे अंतराल के साथ करनी चाहिए। यदि चेहरे पर किसी भी प्रकार की जलन, खुजली या असामान्य रूखापन महसूस हो, तो इसका उपयोग तुरंत घटा दें अथवा कुछ दिनों के लिए पूरी तरह रोक दें।
मॉइस्चराइजर और नॉन-कॉमेडोजेनिक उत्पादों का चयन
त्वचा की असमान बनावट को नियंत्रित करने के प्रयास में चेहरे को पूरी तरह सूखा और बेजान छोड़ देना गंभीर भूल है। रासायनिक घटकों के प्रभाव से त्वचा का संतुलन न बिगड़े, इसके लिए पर्याप्त नमी बनाए रखना अनिवार्य है। यदि आपकी त्वचा पर दाने या मुंहासे जल्दी उभर आते हैं, तो ऐसे मॉइस्चराइजर का चुनाव करें जो नॉन-कॉमेडोजेनिक हो, जिसका अर्थ है कि वह उत्पाद रोमछिद्रों को अवरुद्ध नहीं करेगा।
दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले अन्य स्किनकेयर उत्पादों पर भी नॉन-कॉमेडोजेनिक का लेबल अवश्य देखना चाहिए। ऐसे प्रसाधन रोमछिद्रों में गंदगी और तेल को जमने से रोकते हैं, जिससे नई गांठें या उभार बनने की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
धूप से बचाव और चिकित्सकीय परामर्श
सूर्य की हानिकारक किरणों से त्वचा को पहुंचने वाला नुकसान समय बीतने के साथ गहरा होता जाता है, जो त्वचा की बनावट को और अधिक बिगाड़ सकता है। त्वचा की रक्षा के लिए प्रतिदिन ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एसपीएफ 30 या इससे अधिक क्षमता वाला सनस्क्रीन लगाना आवश्यक है। मुहांसा-प्रवण त्वचा वाले व्यक्तियों को हमेशा ऐसा सनस्क्रीन चुनना चाहिए जो रोमछिद्रों को बिल्कुल बंद न करे।
यदि घरेलू सावधानियों के बावजूद चेहरे के दाने लंबे समय तक बने रहें, लगातार फैलते जाएं, या उनमें जलन और खुजली की समस्या होने लगे, तो स्वयं प्रयोग करने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी योग्य त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराकर यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि यह समस्या साधारण टेक्सचर है, मिलिया है या किसी अन्य त्वचा विकार का संकेत है।



















