खूबसूरत शेड लगाने के बाद जब होंठों पर खिंचाव महसूस होने लगे या पपड़ी जमने लगे, तो अक्सर लोग केवल कॉस्मेटिक उत्पाद को जिम्मेदार ठहरा देते हैं। असल में होंठों की त्वचा चेहरे के बाकी हिस्सों की तुलना में बेहद पतली और संवेदनशील होती है, जिसमें प्राकृतिक तेल ग्रंथियां भी नहीं होतीं। ऐसे में अगर उत्पाद में मौजूद कुछ तत्व त्वचा को रास न आएं, लगाने या हटाने की प्रक्रिया गलत हो, या फिर शरीर में पहले से नमी की कमी चल रही हो, तो होंठों का खुरदरापन तेजी से बढ़ जाता है। खासकर दिनभर टिके रहने वाले उत्पादों के इस्तेमाल के दौरान यह परेशानी और ज्यादा उभरकर सामने आती है।
खुशबू, फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव्स से होने वाली एलर्जी
बाजार में मिलने वाले कई शेड्स में मनमोहक खुशबू, स्वाद देने वाले घटक और उत्पाद को लंबे समय तक सुरक्षित रखने वाले केमिकल तत्व मिलाए जाते हैं। जिन लोगों की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होती है, उनके लिए ये कृत्रिम सामग्रियां परेशानी का सबब बन सकती हैं। इनके संपर्क में आते ही होंठों की सतह पर जलन, लालिमा, खुजली और रूखापन शुरू हो सकता है। यदि किसी खास कॉस्मेटिक को लगाने के तुरंत बाद या कुछ घंटों में हमेशा पपड़ी जमने लगे, तो बेहतर यही है कि उस उत्पाद का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया जाए ताकि होंठों की ऊपरी परत को और नुकसान न पहुंचे।
मैट फॉर्मूलेशन का लगातार और अत्यधिक उपयोग
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (एएडी) और क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, होंठों पर लंबे समय तक टिकने वाले फॉर्मूलेशन भले ही देखने में आकर्षक लगें, लेकिन कुछ मैट उत्पाद नमी को पूरी तरह सोख लेते हैं। इस तरह के फॉर्मूलेशन में तेल की मात्रा कम और वैक्स या पिगमेंट ज्यादा होता है, जो होंठों की पहले से मौजूद नमी को और घटा देता है। यदि किसी के होंठ पहले से ही बेजान हैं और वह बिना किसी सुरक्षा के रोजाना मैट उत्पाद लगाती हैं, तो त्वचा में दरारें पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए रंग लगाने से पहले मॉइस्चराइजिंग बाम की हल्की परत लगाना फायदेमंद रहता है, हालांकि यदि किसी बाम से भी जलन हो तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए।
रूखापन महसूस होते ही होंठों को बार-बार चाटना
जब भी होंठ खिंचते हुए लगते हैं, तो बहुत से लोग अनजाने में उन्हें अपनी जीभ से गीला करने लगते हैं। ऐसा करने पर चंद सेकंड के लिए तो राहत महसूस होती है, लेकिन लार हवा के संपर्क में आकर बहुत तेजी से उड़ जाती है। लार में मौजूद एंजाइम होंठों की नाजुक बाहरी परत को और कमजोर कर देते हैं, जिससे खिंचाव और जलन पहले से दोगुनी हो जाती है। होंठों की नमी बनाए रखने के लिए जीभ फेरने की आदत को छोड़कर सादा बाम या पेट्रोलियम जेली की पतली परत लगानी चाहिए, जो त्वचा पर एक सुरक्षात्मक घेरा बना देती है।
रंग छुड़ाने के दौरान जरूरत से ज्यादा रगड़ना
रंग लगाना जितना आसान होता है, दिन के अंत में उसे सुरक्षित तरीके से उतारना उतना ही आवश्यक है। कई बार लोग देर तक टिके रहने वाले पिगमेंट को हटाने के लिए सूखे कपड़े, नैपकिन या कॉटन पैड से होंठों को जोर-जोर से रगड़ने लगते हैं। यह घर्षण होंठों की नाजुक त्वचा को छील सकता है और वहां जलन या छाले जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। रंग हटाने के लिए हमेशा त्वचा के अनुकूल और सौम्य क्लींजर का उपयोग करना चाहिए और हल्के हाथों से थपथपाते हुए सफाई करनी चाहिए ताकि घर्षण से त्वचा सुरक्षित रहे।
मौसम का असर और आंतरिक डिहाइड्रेशन
हर बार होंठों के फटने की शुरुआत कॉस्मेटिक से ही नहीं होती, बल्कि बाहरी पर्यावरण और शरीर की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। सर्द हवाएं, अत्यधिक शुष्क वातावरण, तेज धूप का असर और दिनभर में पानी की कम मात्रा होंठों को अंदर से सुखा देती है। ऐसे में जब ऊपर से कोई रंग लगाया जाता है, तो नीचे की खुरदरी सतह और उभरकर दिखने लगती है। होंठों को स्वस्थ रखने के लिए दिन में कई बार सादा बाम लगाना और तेज धूप में निकलते समय सन प्रोटेक्शन वाले बाम का चुनाव करना चाहिए। यदि होंठों पर लगातार सूजन, तेज जलन, लाल चकत्ते, घाव या बार-बार पपड़ी बनने लगे, तो इसे साधारण रूखापन न मानें क्योंकि यह किसी कॉस्मेटिक एलर्जी या गहरी जलन का संकेत हो सकता है।


















