अक्सर लोग अपनी दिनचर्या और खानपान से सामान्य चीनी को घटाना चाहते हैं, लेकिन रोजमर्रा की चाय या पेय पदार्थों में मिठास का मोह छोड़ना आसान नहीं होता। ऐसे समय में घर का एक छोटा सा कोना बहुत मददगार साबित हो सकता है। स्टीविया, जिसे भारत में बोलचाल की भाषा में 'मीठी तुलसी' या 'शुगर प्लांट' के नाम से भी पुकारा जाता है, प्राकृतिक मिठास का एक बेहतरीन स्रोत है। इसकी हरी पत्तियों में कुदरती तौर पर मीठा स्वाद देने वाले खास यौगिक पाए जाते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक चीनी के विकल्प के रूप में इसका इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है। इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगाने के लिए किसी बड़े खेत या विस्तृत बगीचे की दरकार नहीं होती, बल्कि बालकनी का साधारण गमला भी इसके लिए पूरी तरह पर्याप्त रहता है।
क्या है मीठी तुलसी और कितनी होती है इसकी मिठास
स्टीविया एक ऐसा वनस्पति पौधा है जिसकी पत्तियों को चबाने पर तेज मीठा स्वाद महसूस होता है। लोग इसकी ताजी पत्तियों का उपयोग करने के अलावा इन्हें सुखाकर पाउडर के रूप में भी सुरक्षित रखते हैं। स्टीविया की मिठास सामान्य चीनी के मुकाबले कई गुना ज्यादा तीव्र होती है। हालांकि कई जगह इसकी तुलना सामान्य चीनी से '30 गुना' अधिक मीठी होने के तौर पर की जाती है, लेकिन यह तीव्रता पत्तियों के इस्तेमाल के तरीके और तैयार उत्पाद की किस्म पर निर्भर करती है। इसी कारण जानकारों का मानना है कि इसे चीनी का हूबहू कार्बन कॉपी विकल्प मानने के बजाय एक प्राकृतिक स्वीटनर के तौर पर देखना ज्यादा सटीक रहता है।
गमले का चुनाव और मिट्टी तैयार करने की विधि
शहरी घरों में स्टीविया लगाने के लिए 10 से 12 इंच का मध्यम आकार का गमला एक बेहतरीन चयन माना जाता है। गमला चुनते वक्त इस बात की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए कि उसके तल में अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए पर्याप्त छेद बने हों। अगर गमले में पानी जमा रहेगा तो पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं और पूरा पौधा खराब हो सकता है।
पौधे के लिए मिट्टी तैयार करते समय जल निकासी का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी के साथ वर्मीकंपोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद का मिश्रण तैयार किया जा सकता है। मिट्टी को हल्का और भुरभुरा बनाने के लिए उसमें थोड़ी रेत या कोकोपीट मिलाई जा सकती है। गमले में भरने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि मिट्टी अत्यधिक चिकनी, कड़क या भारी न हो, जिससे जड़ों का फैलाव बिना रुकावट हो सके।
धूप की जरूरत और सिंचाई का सही तरीका
स्टीविया का पौधा भरपूर रोशनी में तेजी से फलता-फूलता है। इसे घर की ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप आती हो। धूप वाली बालकनी, खुली छत या रोशनी से भरी खिड़की इसके लिए सबसे माकूल जगहें साबित होती हैं।
घर में पौधे लगाते समय अधिकांश लोग जरूरत से ज्यादा पानी देने की भूल कर बैठते हैं, जो स्टीविया के लिए नुकसानदेह हो सकता है। सिंचाई केवल तभी करनी चाहिए जब गमले की ऊपरी सतह की मिट्टी छूने पर हल्की सूखी महसूस हो। मौसम के बदलाव के साथ पानी देने की आवृत्ति और मात्रा बदल सकती है। खासकर बारिश के मौसम में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गमले में जरा भी पानी रुकने न पाए।
पिंचिंग तकनीक से पौधे को बनाएं घना और बुशी
कई बार ऐसा देखा जाता है कि स्टीविया का पौधा सिर्फ ऊपर की तरफ एक पतली डंडी जैसा लंबा बढ़ता चला जाता है और उसमें पत्तियों की संख्या कम रह जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए पिंचिंग तकनीक सबसे असरदार तरीका है। पिंचिंग में पौधे के सबसे ऊपरी सिरे पर निकल रही नई और कोमल कोंपलों को उंगलियों से हल्के से चुटकी काटकर हटा दिया जाता है।
शीर्ष भाग हटने से पौधा साइड से नई शाखाएं निकालने के लिए प्रेरित होता है। इस प्रक्रिया से कुछ ही समय में एक अकेला तना घनी झाड़ी का रूप ले लेता है। नियमित तौर पर हल्की छंटाई करने से पौधे पर पत्तियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे लंबे समय तक भरपूर उपज मिलती रहती है।
पत्तियों की तुड़ाई, सुखाने का तरीका और भंडारण
जब पौधा अच्छी तरह विकसित हो जाए और उसकी शाखाएं मजबूत हो जाएं, तब जरूरत के हिसाब से हरी पत्तियों को तोड़ा जा सकता है। तुड़ाई के तुरंत बाद पत्तियों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उन पर जमी धूल साफ हो जाए, फिर अतिरिक्त पानी को पूरी तरह हटा दें।
धुली हुई पत्तियों को किसी साफ सूती कपड़े या कागज पर फैलाकर किसी हवादार और छायादार स्थान पर सुखाना चाहिए। इन्हें सीधी तेज धूप में सुखाने से बचना चाहिए ताकि इनके प्राकृतिक गुण बने रहें। जब पत्तियां पूरी तरह सूखकर कुरकुरी हो जाएं, तब उन्हें हाथों से मसलकर या मिक्सी में पीसकर बारीक पाउडर बना लें। इस चूर्ण को नमी से दूर रखने के लिए एक एयरटाइट कंटेनर में बंद करके रखना सबसे बेहतर होता है।
चाय और पेय पदार्थों में उपयोग की सावधानियां
चूंकि इस पौधे की पत्तियों में बहुत तीव्र मिठास होती है, इसलिए इसका सेवन हमेशा बहुत कम मात्रा से शुरू करना चाहिए। सुबह की चाय, कॉफी, नींबू पानी या घर पर बनने वाले अन्य पेय पदार्थों में इसकी थोड़ी सी मात्रा डालकर स्वाद परखा जा सकता है।
इसके साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि घर के पौधे से मिलने वाली प्राकृतिक पत्तियां और बाजार में मिलने वाले प्रोसेस्ड स्टीविया स्वीटनर दोनों एक जैसे नहीं होते। बाजार में डिब्बाबंद मिलने वाले उत्पादों में मिठास के साथ-साथ अन्य घटक भी मिलाए जा सकते हैं। इसलिए अगर आप बाजार से कोई उत्पाद खरीद रहे हैं, तो पैकेट पर लिखे लेबल और सामग्री की जांच जरूर करें।
छोटे से स्थान से शुरू करें अपनी होम गार्डनिंग
स्टीविया की बागवानी का सबसे सुखद पहलू यह है कि इसके लिए किसी तामझाम या विशाल जगह की आवश्यकता नहीं होती। आप केवल एक छोटे गमले से शुरुआत कर सकते हैं और पौधे की बढ़ोतरी को देखकर आगे इसकी संख्या बढ़ा सकते हैं। बस सही मात्रा में धूप, बेहतर जल निकासी वाली मिट्टी और थोड़ी सी नियमित देखभाल मिल जाए, तो आपके घर की छोटी सी बालकनी भी एक उपयोगी औषधीय बगीचे में तब्दील हो सकती है।



















