महंगे और 5-स्टार होटलों में ठहरने वाले मेहमान अक्सर वहां मिलने वाले प्रीमियम, बेहद मुलायम और साफ-सुथरे तौलियों से प्रभावित होते हैं। पहली नजर में ऐसा लगता है कि ये तौलिए विशेष रूप से उसी लग्जरी होटल की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर निर्माण और खरीद के दौरान कई तौलिए तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि रिजेक्ट कर दिए गए इन तौलियों का आखिर क्या होता है। क्या इन्हें कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है, या फिर ये किसी वैकल्पिक माध्यम से आम बाजार तक पहुंच जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक सुव्यवस्थित सप्लाई चेन और व्यावसायिक रणनीति काम करती है।
गुणवत्ता जांच और तौलियों के रिजेक्ट होने के मुख्य कारण
प्रीमियम होटल अपने कमरों के लिए लिनन की खरीदारी करते समय कड़े मापदंडों का पालन करते हैं। सप्लायर से ऑर्डर लेते वक्त तौलियों के कपड़े की क्वालिटी, साइज़, वजन, रंग, टिकाऊपन और धागों की बुनाई जैसे मानकों का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर बनने वाले स्टॉक में मामूली मानवीय या तकनीकी कमियां रह जाना आम बात है। कई बार सिलाई में हल्की असमानता, बलीचिंग या डाई का असमान रंग, छोटा-मोटा दाग या साइज़ में मिलीमीटर भर का फर्क भी आ जाता है। गेस्ट रूम में रखे जाने वाले सामान के लिए होटल प्रबंधन जरा भी समझौता नहीं करता, इसलिए शुरुआती स्टेज पर ही ऐसे तौलियों को रिजेक्ट कर दिया जाता है। हर कंपनी की नीति के हिसाब से इन रिजेक्टेड पीस को अलग करने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
द्वितीयक बाजार और लिक्विडेशन सेल के जरिए बिक्री
मैन्युफैक्चरर या सप्लायर रिजेक्ट हुए तौलियों को पूरी तरह बर्बाद करने के बजाय अपनी लागत वसूलने की कोशिश करते हैं। इसके लिए इन्हें सेकेंडरी मार्केट या लिक्विडेशन चैनलों के माध्यम से बेचा जाता है। बाजार में यह सामान ओवरस्टॉक, फैक्टरी सेकंड्स, सेकंड-क्वालिटी या डिफेक्टिव स्टॉक के नाम से उतारा जाता है। इन्हें खरीदने के लिए थोक बाजार, डिस्काउंट रिटेल स्टोर, लिक्विडेशन सेल और कम कीमत वाले आउटलेट का सहारा लिया जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि लग्जरी होटलों के लिए बनने वाले अधिकांश तौलियों पर किसी होटल का नाम या लोगो नहीं छपा होता है। सप्लायर आमतौर पर बिना किसी ब्रांडिंग के प्लेन व्हाइट या न्यूट्रल शेड में तौलिए बनाते हैं, जिससे इन्हें बाजार में बेचना आसान हो जाता है।
होटलों में आंतरिक उपयोग और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था
यह मानना गलत होगा कि होटल द्वारा रिजेक्ट किया गया हर एक तौलिया रिटेल दुकानों तक पहुंच ही जाता है। सप्लायर और होटल प्रबंधन कई बार इनका इस्तेमाल अपनी आंतरिक व्यवस्था को चलाने में करते हैं। जो तौलिए मेहमानों के कमरों के लायक नहीं समझे जाते, उन्हें हाउसकीपिंग, किचन, मेंटेनेंस और सफाई जैसे बैक-ऑफ-हाउस कामों के लिए रख लिया जाता है। इसके अलावा, जो कपड़े ज्यादा खराब या कटे-फटे होते हैं, उन्हें इंडस्ट्रियल रीसाइक्लिंग यूनिट्स में भेज दिया जाता है। रीसाइक्लिंग प्रोसेस के जरिए इन कपड़ों के रेशों से नए उत्पाद या सफाई के सूती पोछे तैयार किए जाते हैं। इससे बर्बादी कम होती है और पर्यावरण सुरक्षा के मानकों का भी पालन होता है।
खरीदारों के लिए सावधानी और असली क्वालिटी की पहचान
अगर बाजार में कोई विक्रेता किसी तौलिए को 5-स्टार होटल का रिजेक्टेड बताकर बेच रहा है, तो उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। महज किसी का दावा सुनकर खरीदारी करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। तौलिए पर अगर किसी होटल का लोगो बना भी हो, तब भी यह पक्का नहीं होता कि वह सीधे उसी होटल के स्टॉक से आया है। तौलिए की वास्तविक गुणवत्ता परखने के लिए उसके फैब्रिक की सघनता, धागों की मजबूती, सिलाई की फिनिशिंग और GSM यानी ग्राम प्रति वर्ग मीटर पर ध्यान देना चाहिए। नया और ठीक से पैक किया गया तौलिया लेते समय उसकी साफ-सफाई और कपड़े की मजबूती की जांच खुद करना ही समझदारी है।
सप्लाई चेन से जुड़ा सबसे बड़ा भ्रम
आम जनता के बीच यह धारणा काफी प्रचलित है कि 5-स्टार होटलों का रिजेक्टेड सामान सीधे रिटेल बाजारों में भर दिया जाता है। हकीकत यह है कि लग्जरी होटलों से किसी भी सामान का सीधा बाजार कनेक्शन नहीं होता। रिजेक्शन की पूरी प्रक्रिया मैन्युफैक्चरर और सप्लायर के स्तर पर ही सीमित रहती है। कुछ तौलिए वापस फैक्टरी चले जाते हैं, कुछ का उपयोग सफाई में होता है और केवल सीमित हिस्सा ही लिक्विडेशन के जरिए कम कीमतों पर बेचा जाता है। इसलिए किसी भी सामान को सिर्फ होटल टैग के नाम पर खरीदने से बचना चाहिए और हमेशा वास्तविक गुणवत्ता को प्राथमिकता देनी चाहिए।



















