घर का निर्माण करवाते समय छत की ढलाई सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। जरा सी लापरवाही पूरी संरचना को कमजोर कर सकती है, इसलिए स्लैब तैयार करते समय तकनीकी बारीकियों पर ध्यान देना जरूरी है। ढलाई के दौरान सरिया को उचित तरीके से आपस में फंसाना बेहद महत्वपूर्ण होता है ताकि पूरे स्लैब में भार का वितरण समान रहे और छत को भरपूर मजबूती मिल सके।
मसाले का अनुपात और छत की सही मोटाई
स्लैब तैयार करने के लिए कंक्रीट मसाले का सही मिश्रण होना आवश्यक है। सामान्य रूप से छत की ढलाई में 2.5:1 के अनुपात वाला मसाला इस्तेमाल में लाया जाता है। इसके अलावा छत की मोटाई को लेकर भी सतर्कता बरतनी चाहिए, जहां सामान्य स्लैब के लिए आमतौर पर 4.5 इंच की मोटाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है। सही मोटाई और संतुलित मिश्रण से स्लैब में दरारें पड़ने की आशंका खत्म हो जाती है।
शटरिंग के पारंपरिक और आधुनिक तरीके
छत की सतह तैयार करने के लिए दो तरह की तकनीकें अपनाई जाती हैं। पारंपरिक निर्माण पद्धति में सबसे पहले लकड़ी का पटरा बिछाया जाता है और उसके ऊपर मिट्टी की कुटाई कराई जाती है। इसके बाद बालू का मसाला चढ़ाकर फंटी के सहारे पूरी सतह को एकदम सीधा और समतल बनाया जाता है। वहीं दूसरी ओर, आजकल बड़ी और बहुमंजिला इमारतों में प्लाई शटरिंग का चलन काफी बढ़ गया है। प्लाई शटरिंग के दौरान हमेशा अच्छी स्थिति वाली नई और फ्रेश प्लाई का ही प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि पुरानी या खराब प्लाई स्लैब की निचली फिनिशिंग को पूरी तरह बिगाड़ सकती है।
तराई का सही नियम और शटरिंग खोलने की समयसीमा
ढलाई पूरी होने के बाद कंक्रीट को पकाने के लिए पानी देना यानी क्योरिंग करना सबसे जरूरी कदम है। छत ढल जाने के बाद उस पर बालू अथवा ईंटों की छोटी मेढ़ बनाकर पानी भरना चाहिए। कंक्रीट की बुनियादी पकड़ मजबूत करने के लिए कम से कम 6 से 7 दिनों तक लगातार पानी भरे रखना चाहिए। इसके साथ ही छत के नीचे लगी शटरिंग को हटाने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। शटरिंग को कम से कम 15 से 17 दिन बीत जाने के बाद ही खोलना सुरक्षित माना जाता है। हालांकि इसे हटाने का सटीक समय स्लैब के डिजाइन, कंक्रीट की हासिल हुई मजबूती, स्थानीय मौसम और संबंधित सिविल इंजीनियर की सलाह के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए।


















