बारिश शुरू होते ही मौसम में जो बदलाव आया है, उसने पेड़-पौधों की ग्रोथ को अचानक रफ्तार दे दी है. यही वजह है कि अगर आप अपने होम गार्डन को घना और खूबसूरत बनाना चाहते हैं, तो अभी का समय बागवानी के लिए सबसे मुफीद माना जा रहा है. गुलाब समेत ज्यादातर सजावटी पौधों की सूखी टहनियां इसी मौसम में तुरंत काट देनी चाहिए, वहीं नए पौधे तैयार करने के लिए ग्राफ्टिंग और एयर-लेयरिंग करने का भी यही सबसे सही मौका है. जरा सी मेहनत से पूरा बगीचा कुछ ही हफ्तों में खिल सकता है.
मौसम का यह बदलाव पौधों के लिए वरदान क्यों
प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह के मुताबिक, मौसम में आया यह बदलाव पौधों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. उनका कहना है कि इस दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है और तापमान भी पौधों के अनुकूल हो जाता है, जिससे उनमें नई कोशिकाएं बहुत तेज रफ्तार से बनने लगती हैं. यही वजह है कि इसी समय गुलाब और दूसरे सजावटी पौधों की प्रूनिंग करने पर उनमें नई और मजबूत शाखाएं जल्दी फूट आती हैं. जो लोग अपने बगीचे का दायरा बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए भी ग्राफ्टिंग और एयर-लेयरिंग आजमाने का यही सबसे अनुकूल समय है, क्योंकि इस मौसम में लगाए गए पौधों के जीवित रहने और जड़ पकड़ने की दर 90 फीसदी से भी ज्यादा रहती है.
सूखी टहनियों की छंटाई इतनी जरूरी क्यों है
मौसम बदलते ही पौधों की सूखी और रोगग्रस्त टहनियों को हटाना बेहद जरूरी हो जाता है. जब सूखी लकड़ी पौधे से अलग हो जाती है, तो पौधा अपनी पूरी ताकत नई पत्तियों और कलियों को उगाने में लगा देता है. खासकर गुलाब के पौधों में प्रूनिंग करने से धूप और हवा उसके निचले हिस्सों तक भी आसानी से पहुंचने लगती है. इसका सीधा फायदा यह होता है कि फंगस और कीड़ों का खतरा काफी कम हो जाता है, और बदले में पौधे पर फूलों की भरमार देखने को मिलती है.
ग्राफ्टिंग से एक ही पौधे पर पाएं अलग-अलग रंगों के फूल
अगर मन में यह ख्वाहिश है कि एक ही पौधे पर कई अलग-अलग रंगों के फूल खिलें, तो ग्राफ्टिंग इसका सबसे कारगर तरीका है. इस मौसम में पौधों के तनों में रस का बहाव तेज हो जाता है, जिसकी वजह से दो अलग-अलग किस्म के पौधों के टिश्यू आपस में बहुत जल्दी और मजबूती से जुड़ जाते हैं. गुलाब और गुड़हल जैसे पौधों में इसी समय ग्राफ्टिंग करने पर नए कट बहुत तेजी से रिकवर हो जाते हैं, जिससे कम समय में ही एक खूबसूरत हाइब्रिड पौधा तैयार हो जाता है.
एयर-लेयरिंग यानी गुटी बांधकर बनाएं नया पौधा
नए पौधे तैयार करने की एक और बेहद आसान और कामयाब तरकीब है एयर-लेयरिंग, जिसे आम बोलचाल में गुटी बांधना भी कहा जाता है. इसके लिए किसी सजावटी पौधे या फलदार पेड़ की स्वस्थ टहनी की छाल को हल्के हाथों से छील दिया जाता है, फिर उस हिस्से पर नम कोकोपीट या मिट्टी लगाकर उसे प्लास्टिक से लपेट दिया जाता है. इस मौसम की नमी के चलते उस टहनी से बहुत जल्दी नई जड़ें फूटने लगती हैं. कुछ ही हफ्तों में जब जड़ें अच्छी तरह विकसित हो जाती हैं, तो उस हिस्से को काटकर सीधे नए गमले में लगाया जा सकता है.
मानसून में पौधों की एक्स्ट्रा केयर कैसे करें
पौधों की ग्रोथ जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतना ही ध्यान इस दौरान उनके सही पोषण पर भी देना जरूरी है. प्रूनिंग और ग्राफ्टिंग करने के फौरन बाद पौधों में अच्छी क्वालिटी की वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद जरूर डालनी चाहिए. इसकी वजह यह है कि बारिश के पानी के साथ गमलों की मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व बहकर निकल जाते हैं, इसलिए हर 15 दिन में पौधों को लिक्विड फर्टिलाइजर देना काफी फायदेमंद साबित होता है. इसके अलावा गमलों में पानी जमा न होने दें, क्योंकि जलजमाव से जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधे को नुकसान पहुंचता है.











