ब्यूटी ट्रेंड्स में आजकल चेहरे पर भारी भरकम फाउंडेशन और ढेर सारा कॉम्पैक्ट पाउडर लगाने का चलन पीछे छूट रहा है। इसकी जगह लोग एक ऐसा हाइड्रेटेड और प्राकृतिक बेस पसंद कर रहे हैं, जिसमें त्वचा ताज़ा और खिली-खिली दिखाई दे। इसी फेहरिस्त में ग्लास स्किन बेस काफी लोकप्रिय हो चुका है। इस खास तरीके का मकसद चेहरे को कॉस्मेटिक्स की मोटी परत से छिपाना या असली बनावट को पूरी तरह ढकना नहीं है, बल्कि स्किन में ऐसा निखार और नमी जोड़ना है जिससे चेहरा पास से देखने पर भी बेहद सहज और मुलायम दिखे। यह समझना भी बहुत जरूरी है कि असली मानवीय त्वचा में रोमकूप यानी पोर्स का होना सामान्य बात है, इसलिए इस शैली का यह मतलब बिल्कुल नहीं होता कि चेहरा बिना किसी रोमकूप के कृत्रिम दिखने लगे।
यदि सही तकनीक न अपनाई जाए, तो कुछ ही समय में बेस फटने लगता है और चेहरा केकी दिखने लगता है। बेस को पैची होने से बचाने और प्राकृतिक फिनिश बनाए रखने के लिए कुछ खास नियमों का पालन किया जा सकता है।
बेस से पहले त्वचा को सही ढंग से तैयार करना
इस तरह के फिनिश की सबसे मजबूत नींव कॉस्मेटिक्स लगाने से पहले की तैयारी यानी स्किन प्रेप पर टिकी होती है। शुरुआत हमेशा किसी सौम्य क्लींजर से चेहरा साफ करके करनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की धूल या अतिरिक्त मैल हट जाए। इसके तुरंत बाद अपनी त्वचा की जरूरत के अनुसार उचित मॉइश्चराइजर लगाना चाहिए। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक स्किनकेयर में पहले मॉइश्चराइजर और फिर सनस्क्रीन लगाना चाहिए, जिसके बाद ही बेस या मेकअप का इस्तेमाल होना चाहिए। अत्यधिक रूखी त्वचा पर यदि सीधे कॉस्मेटिक्स लगा दिए जाएं, तो बेस पैची हो जाता है और चेहरे की खुरदरी बनावट ज्यादा उभर कर सामने आती है। इसीलिए मॉइश्चराइजर लगाने के बाद उसे त्वचा में पूरी तरह समाने के लिए थोड़ा वक्त देना अनिवार्य है।
मोटी परत की जगह हल्की और बिल्डेबल कवरेज
चेहरे पर ढेर सारा फाउंडेशन थोपने के बजाय स्किन टिंट, बीबी क्रीम या बेहद हल्के लिक्विड टेक्सचर वाले बेस का चयन करना चाहिए। ग्लास स्किन के लिए हमेशा हल्की और चमकदार फिनिश वाले बेस को तरजीह दी जाती है। पूरे चेहरे पर एक बार में गाढ़ा लेप लगाने की भूल न करें। इसके बजाय बहुत थोड़ी सी मात्रा लेकर चेहरे पर फैलाएं और केवल उन्हीं जगहों पर दूसरी लेयर लगाएं जहां अतिरिक्त कवरेज की जरूरत महसूस हो। यह तरीका चेहरे को स्वाभाविक बनाए रखता है और भारीपन महसूस नहीं होने देता।
पाउडर से दूरी और क्रीम प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल
नमी से भरा और चमकदार लुक हासिल करने के लिए पाउडर फॉर्मूला की जगह क्रीम ब्लश और लिक्विड हाईलाइटर जैसे विकल्पों का उपयोग करना चाहिए। पूरे चेहरे पर ज्यादा पाउडर थपथपाने से वह जरूरी प्राकृतिक चमक गायब हो जाती है और चेहरा रूखा दिख सकता है। पाउडर का प्रयोग बेहद सीमित रखें। इसे केवल उन खास हिस्सों पर हल्का सा लगाएं जहां पसीना ज्यादा आता है, तेल जमा होता है या फिर क्रीज बनने की संभावना रहती है, जैसे आंखों के ठीक नीचे का हिस्सा या नाक के आसपास की जगह।
चमक के फेर में जरूरत से ज्यादा हाईलाइटर से बचें
चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाने का यह अर्थ कभी नहीं होता कि पूरे चेहरे को हाईलाइटर से चमका दिया जाए। बहुत ज्यादा हाईलाइटर लगाने से चेहरे की स्वाभाविक बनावट और रेखाएं और भी उभरी हुई नजर आने लगती हैं। हाईलाइटर को केवल उन चुनिंदा उभारों पर बेहद हल्की मात्रा में लगाएं जहां रोशनी स्वाभाविक तौर पर पड़ती है, जैसे चीकबोन का सबसे ऊपरी हिस्सा और नाक का हल्का सा भाग।
मेकअप टूल्स की साफ सफाई पर दें खास ध्यान
एक और सबसे महत्वपूर्ण नियम स्पंज और ब्रश की नियमित सफाई से जुड़ा है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, लंबे समय से गंदे रखे गए ब्रश और स्पंज में हानिकारक बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे त्वचा पर मुंहासे, रैशेज और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। चेहरे की सुरक्षा के लिए मेकअप स्पंज को हर बार इस्तेमाल के बाद धोना चाहिए और सभी ब्रश को एक तय अंतराल पर अच्छी तरह साफ करते रहना चाहिए।


















