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पैरों में पानी लगने और दरारों से राहत दिलाएंगे रसोई और आंगन के ये पारंपरिक नुस्खेजीवनशैली
20 सित॰ 2026, 3:22 pm (1 दिन पहले)· 1

पैरों में पानी लगने और दरारों से राहत दिलाएंगे रसोई और आंगन के ये पारंपरिक नुस्खे

खेतों और घरेलू कामकाज के दौरान पैरों में पानी लगने और एड़ियां फटने की समस्या से राहत पाने के लिए बीना देवी ने बताए कुछ आसान और पारंपरिक देसी उपाय।

घर के रोजमर्रा के कामकाज में व्यस्त रहने वाले लोगों, खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों और घरेलू महिलाओं के साथ पैरों में पानी लगने की समस्या अक्सर देखने को मिलती है। पानी में लंबे समय तक काम करने की वजह से पैरों की त्वचा खराब होने लगती है, जिसे आम बोलचाल में पैर बीमाय होना यानी त्वचा का फटना या गहरी दरारें आना भी कहा जाता है। इन दरारों और खुरदरेपन की वजह से चलने-फिरने में तेज दर्द और असहजता का सामना करना पड़ता है।

पारंपरिक तरीकों से पाएं दर्द भरी दरारों से मुक्ति

इस तकलीफ से निपटने के लिए बीना देवी ने कुछ बेहद आसान और सदियों पुराने पारंपरिक तरीके साझा किए हैं। पुराने समय से लोग बिना पैसे खर्च किए घर और आसपास मिलने वाली प्राकृतिक चीजों से इस समस्या का समाधान करते आए हैं। खासकर ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोगों के लिए यह उपाय बहुत सुलभ और असरदार साबित होते हैं, जहां प्राथमिक स्तर पर प्राकृतिक वनस्पतियों का सहारा लिया जाता रहा है।

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तुलसी, मेहंदी और सरसों के तेल का सरल प्रयोग

अगर आसपास मेहंदी उपलब्ध हो, तो इसके ताजे पत्तों को पीसकर पैरों के प्रभावित हिस्से पर लगाने से ठंडक और बड़ा आराम मिलता है। इसके साथ ही आंगन में मिलने वाली तुलसी के पत्तों का लेप बनाकर भी फटी त्वचा और पानी लगे हिस्सों पर लगाया जाता है। नियमित रूप से सरसों का तेल लगाना भी त्वचा की नमी लौटाने और खुरदरापन मिटाने का एक जाना-माना घरेलू तरीका रहा है। इसके अलावा एक दिलचस्प पारंपरिक उपाय यह भी है कि होली खेलने वाले सूखे या पक्के रंग को पानी में घोलकर पैरों पर लगाया जाता है, जिसे लोग राहत पाने के लिए आजमाते रहे हैं।

महावर या आलता का इस्तेमाल और आधुनिक विकल्प

पैरों की इस समस्या से राहत पाने का सबसे प्रचलित और आसान उपाय महावर या आलता है, जो अमूमन अधिकांश परिवारों में आसानी से मिल जाता है। महिलाएं इसे पारंपरिक रूप से पैरों के श्रृंगार के लिए लगाती हैं, मगर इसका उपयोग त्वचा की दरारों, खुरदरेपन और पानी लगने की परेशानी से बचाव में भी किया जाता है। हालांकि वर्तमान दौर में मेडिकल स्टोर्स पर फटी एड़ियों और संक्रमण के लिए कई तरह की आधुनिक दवाइयां और क्रीम मौजूद हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग इन पारंपरिक घरेलू उपायों पर पूरा भरोसा जताते हैं।

सवाल-जवाब

पैरों में पानी लगने या दरारें आने की मुख्य वजह क्या है?
घरेलू कामकाज या खेतों में लगातार पानी के संपर्क में रहने के कारण पैरों में खुरदरापन और दर्दनाक दरारें आ जाती हैं।
फटी एड़ियों और पानी लगने पर कौन सी पत्तियां पीसकर लगाई जाती हैं?
इस समस्या से राहत पाने के लिए ताजी मेहंदी के पत्तों और तुलसी के पत्तों को पीसकर पैरों पर लगाया जाता है।
क्या महावर या आलता का इस्तेमाल भी पैरों की दरारों में किया जा सकता है?
हां, पारंपरिक रूप से श्रृंगार में काम आने वाला महावर पैरों की दरारों, खुरदरेपन और पानी लगने पर बेहद असरदार माना जाता है।
रसोई से कौन सा तेल इस समस्या में राहत देता है?
सरसों का तेल लगाने से पैरों की त्वचा को नमी मिलती है और खुरदरापन दूर होता है।
होली के रंगों से जुड़ा कौन सा नुस्खा बताया गया है?
होली खेलने वाले रंग को पानी में घोलकर पैरों की दरारों और प्रभावित त्वचा पर लगाने का भी पारंपरिक उपाय अपनाया जाता है।
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