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पटना में तीन पीढ़ियों से चल रहा मिनी समोसे का स्वाद, 10 पैसे से शुरू हुआ सफर अब 5 रुपये तक पहुंचाजीवनशैली
20 सित॰ 2026, 1:20 pm (39 दिन पहले)· 2

पटना में तीन पीढ़ियों से चल रहा मिनी समोसे का स्वाद, 10 पैसे से शुरू हुआ सफर अब 5 रुपये तक पहुंचा

राजधानी पटना में राजेश कुमार का परिवार तीन पीढ़ियों से खास मिनी समोसा बना रहा है, जिसकी शुरुआत कभी 10 पैसे में हुई थी और आज यह 5 रुपये में मिलता है।

अक्सर स्कूल की घंटी बजते ही बच्चों के कदम जिस पहली चीज की ओर मुड़ते थे, वह थी बाहर सजी टोकरी में रखे नन्हे समोसे। कुरकुरा स्वाद, तीखी चटपटी चटनी और मुट्ठी भर सिक्कों में बच्चों की पूरी शाम बन जाती थी। वक्त बदला, कई जगहों से यह पारंपरिक स्वाद ओझल हो गया, मगर राजधानी पटना की गलियों में आज भी यह नन्हा समोसा पुरानी यादों को ताजा कर रहा है। यह कोई हाल-फिलहाल शुरू हुआ नया ठिकाना नहीं है, बल्कि एक ही परिवार दशकों से पीढ़ियों की विरासत के तौर पर इस मिनी समोसे को तैयार करता आ रहा है।

राजेश कुमार का परिवार पटना में आज भी पूरी निष्ठा के साथ इस खास मिनी समोसे की विरासत को संजोए हुए है। यह काम उनके दादाजी के जमाने से शुरू हुआ था। दादाजी के बाद कारोबार की जिम्मेदारी उनके पिता ने संभाली और अब राजेश खुद इस परंपरा की बागडोर संभाले हुए हैं। इस तरह यह परिवार अब तीसरी पीढ़ी के रूप में इस स्वाद को जिंदा रखे हुए है। इतना ही नहीं, अब राजेश के बेटे भी दुकान के कामकाज में हाथ बंटाते हुए अगली पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं।

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10 पैसे से शुरू हुआ सफर अब 5 रुपये तक

आज भले ही यह नन्हा समोसा 5 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बिकता है, लेकिन इसकी पुरानी दास्तान बेहद मामूली रकम से शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में, जब राजेश के दादाजी ने इसे बेचना शुरू किया था, तब यह समोसा महज 10 पैसे प्रति पीस में मिलता था। धीरे-धीरे समय बदला, चीजें महंगी हुईं तो इसका दाम 20 पैसे हुआ और फिर वक्त के साथ बढ़ते-बढ़ते आज यह 5 रुपये प्रति पीस तक पहुंच चुका है। कीमतों में इस बदलाव के बावजूद इसके चाहने वालों की संख्या कभी कम नहीं हुई।

बाजार में हर तरफ बड़े आकार के आलू समोसे भरे पड़े हैं, लेकिन राजेश के इस मिनी समोसे की सबसे बड़ी यूएसपी इसका बेहद छोटा आकार है। छोटे आकार के कारण इसका हर बाइट बहुत कुरकुरा रहता है और अंदर का मसाला मुंह में तेजी से स्वाद छोड़ता है। यही वजह है कि शहर के चटपटा खाने वाले शौकीन आज भी इसे बड़े समोसों के मुकाबले ज्यादा तरजीह देते हैं।

घर के मसालों और परिवार की मेहनत का संगम

इस समोसे के खास स्वाद का राज इसके मसाले में छिपा है, जिसे परिवार पूरी तरह खुद ही कूटकर और मिलाकर तैयार करता है। इस मसाले में विशेष रूप से हरी मिर्च और शुद्ध हींग का संतुलन रखा जाता है। हाथ से बने इन खास मसालों के मिश्रण की वजह से ही इसका जायका बाजार के आम समोसों से बिल्कुल जुदा होता है।

राजेश की दुकान की एक और खासियत यह है कि समोसा तैयार करने के लिए बाहर से कोई कारीगर या मजदूर नहीं रखा जाता। पूरा परिवार आपस में मिलकर काम करता है। परिवार में कुल 10 से 12 सदस्य हैं, जिनमें से 4 से 5 लोग समोसा तैयार करने और दुकान के काम में रोजाना सक्रिय रहते हैं। इसमें राजेश की मां और उनका बेटा भी पूरी लगन से शामिल होते हैं, जिससे समोसे में घर जैसा शुद्ध स्वाद और अपनापन हमेशा बना रहता है।

स्कूलों की छुट्टी और नन्हे समोसे का रिश्ता

इस मिनी समोसे की असली पहचान हमेशा से स्कूलों की छुट्टी के साथ बंधी रही है। राजेश की दुकान से तैयार समोसे पटना के अलग-अलग स्कूलों तक पहुंचते हैं। चूंकि यह दुकान सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल के बेहद नजदीक स्थित है, इसलिए मुख्य रूप से इस स्कूल के बाहर छुट्टी के वक्त इन समोसों की जमकर बिक्री होती है।

यह सिलसिला भी राजेश के दादाजी के जमाने से ही चला आ रहा है। सबसे पहले उनके दादाजी ने स्कूल के बाहर खड़े होकर बच्चों को यह छोटा समोसा खिलाना शुरू किया था। उसके बाद उनके पिता ने इसी क्रम को जारी रखा और अब राजेश अपने बेटे के साथ इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। स्कूल छूटते ही बच्चों की टोली समोसे की ओर दौड़ पड़ती है।

दही की चटनी और बड़े नामों की पसंद

राजेश का कहना है कि उनके समोसे की पहुंच केवल स्कूल के छोटे बच्चों तक ही सीमित नहीं रही है। पटना के नामी डॉक्टर और कई बड़े राजनेता भी इस मिनी समोसे के मुरीद रहे हैं। जब उनसे राजनेताओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साझा किया कि लालू यादव की बेटियां जब सेंट जोसेफ कॉन्वेंट में पढ़ती थीं, तब वे भी नियमित रूप से इस समोसे का स्वाद लिया करती थीं। आज भी जब शहर के संभ्रांत लोग अपनी बेटियों को स्कूल से लेने आते हैं, तो इस दुकान पर रुककर मिनी समोसा खाना नहीं भूलते।

यह समोसा सादे तरीके से नहीं परोसा जाता, बल्कि इसके साथ मिलने वाली खास दही की चटनी इसके स्वाद को दोगुना कर देती है। राजेश की दुकान पर समोसे सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक उपलब्ध रहते हैं। इस दौरान बच्चों के साथ-साथ हर उम्र के नौजवान और बुजुर्ग भी प्लेट में गरमा-गरम समोसे लेकर स्वाद का लुत्फ उठाते दिखते हैं।

दुकान तक कैसे पहुंचे

यदि आप भी पटना में इस ऐतिहासिक मिनी समोसे और दही की चटनी का स्वाद लेना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको अशोक राजपथ आना होगा। अशोक राजपथ पर पिलर नंबर 11 के ठीक सामने वाली गली में मुड़ते ही आपको राजेश जी की समोसे की प्रसिद्ध दुकान मिल जाएगी, जहां सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच इस अनोखे जायके का आनंद लिया जा सकता है।

सवाल-जवाब

पटना में यह मिनी समोसा कितने रुपये में मिलता है?
वर्तमान में यह मिनी समोसा 5 रुपये प्रति पीस की कीमत पर मिलता है।
इस समोसे की दुकान की शुरुआत किस कीमत से हुई थी?
इस समोसे की शुरुआत राजेश कुमार के दादाजी के जमाने में 10 पैसे प्रति पीस से हुई थी, जो बाद में 20 पैसे और अब 5 रुपये हो गई है।
यह दुकान पटना में किस जगह स्थित है?
यह दुकान पटना के अशोक राजपथ पर पिलर नंबर 11 के सामने वाली गली में सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल के पास स्थित है।
दुकान खुलने और बंद होने का समय क्या है?
यह दुकान सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक खुलती है।
इस समोसे में कौन से खास मसाले इस्तेमाल होते हैं?
इस समोसे के मसाले परिवार द्वारा खुद हाथ से तैयार किए जाते हैं, जिसमें मुख्य रूप से हरी मिर्च और हींग का उपयोग होता है।
समोसे के साथ कौन सी चटनी परोसी जाती है?
इस मिनी समोसे के साथ खास तौर पर बनाई गई दही की चटनी परोसी जाती है।
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