उम्र के चौथे या पांचवें दशक में कदम रखते ही कई महिलाओं के लिए शरीर की चर्बी कम करना एक कठिन चुनौती बन जाता है। इस पड़ाव पर अक्सर महिलाएं खानपान में भारी कटौती करने लगती हैं, बेहद कम कैलोरी वाली डाइट अपनाती हैं और घंटों पसीना बहाकर कार्डियो एक्सरसाइज करती हैं। इसके बावजूद जब वजन के कांटे पर कोई सकारात्मक बदलाव नजर नहीं आता, तो गहरी निराशा होना स्वाभाविक है। हालांकि, इस स्थिति में खुद को दोष देने या अपनी मेहनत पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां मुख्य भूमिका आपके शरीर के आंतरिक हार्मोनल बदलावों की होती है।
फिटनेस जगत से जुड़े विशेषज्ञ और स्लो बर्न मेथड के संस्थापक, क्वाड फिटनेस के सह-संस्थापक व हेड कोच तथा 'सिंपल, नॉट ईज़ी' पुस्तक के लेखक राज गणपथ ने इस समस्या पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब महिलाएं 40 या 50 वर्ष की उम्र में पहुंचती हैं, तो उनके शरीर की कार्यप्रणाली पहले जैसी नहीं रहती। ऐसे में कम भोजन करना, लगातार खुद को मनपसंद चीजों से वंचित रखना और अत्यधिक कार्डियो करना शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इस प्रकार की कठोर आदतों को तत्काल रोक देना चाहिए।
उम्र के इस पड़ाव पर वजन कम होना क्यों रुक जाता है
वजन घटाने की प्रक्रिया में केवल डाइट चार्ट या जिम के घंटे ही मायने नहीं रखते, बल्कि शरीर के भीतर होने वाले जैविक बदलाव सबसे बड़ा कारक बनते हैं। 40 और 50 वर्ष की आयु के दौरान महिलाओं का शरीर पेरिमेनोपॉज के दौर से गुजरता है। इस प्राकृतिक चरण में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर लगातार घटता और बढ़ता रहता है। हार्मोन के इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर मांसपेशियों पर पड़ता है, जिससे शरीर में मांसपेशियों का कुल द्रव्यमान कम होने लगता है।
जब शरीर में मांसपेशियां घटती हैं, तो उसका सीधा असर बेसल मेटाबॉलिक रेट यानी बीएमआर पर पड़ता है। बीएमआर वह न्यूनतम ऊर्जा दर है जो शरीर को आराम की अवस्था में बुनियादी क्रियाएं चलाने के लिए चाहिए होती है। बीएमआर के धीमा पड़ने से शरीर सामान्य दिनों के मुकाबले कम कैलोरी जला पाता है। नतीजतन, बहुत कम खाना खाने और जमकर मेहनत करने के बाद भी वजन कम नहीं होता, क्योंकि शरीर की कैलोरी बर्न करने की आंतरिक क्षमता सुस्त हो चुकी होती है।
वजन नियंत्रित करने का सही और वैज्ञानिक तरीका
इस उम्र में वजन घटाने का वास्तविक समाधान खुद को भूखा रखना या कार्डियो मशीनों पर घंटों भागना बिल्कुल नहीं है। इसके बजाय महिलाओं को अपनी घटती मांसपेशियों को बचाने और नई मांसपेशियों के निर्माण पर पूरी एकाग्रता रखनी चाहिए। शरीर में जितनी अधिक स्वस्थ मांसपेशियां होंगी, बीएमआर उतना ही बेहतर बना रहेगा।
मांसपेशियों की मजबूती के लिए तीन बुनियादी नियम
मजबूती का अभ्यास (स्ट्रेंथ ट्रेनिंग): मांसपेशियों के द्रव्यमान को बनाए रखने और नई ताकत विकसित करने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाना होगा। जब आप मांसपेशियों पर वजन या प्रतिरोध का दबाव डालते हैं, तो उन्हें खुद को मजबूत करने का संकेत मिलता है। इसके लिए हर हफ्ते दो से चार दिन पूरी लगन और निरंतरता के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना बेहद जरूरी है।
भरपूर प्रोटीन का सेवन: प्रोटीन न केवल मांसपेशियों के निर्माण और मरम्मत के लिए आधारभूत तत्व है, बल्कि यह हड्डियों के घनत्व को भी सुरक्षित रखता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के सकारात्मक परिणाम तभी मिलते हैं जब मांसपेशियों को खुराक के रूप में पर्याप्त प्रोटीन मिले। इसके तहत प्रतिदिन अपने शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम के अनुपात में 1.5 ग्राम प्रोटीन का सेवन अवश्य करना चाहिए।
पूरी और गुणवत्तापूर्ण नींद: स्वस्थ जीवनशैली और वजन नियंत्रण के लिए शरीर को पर्याप्त विश्राम देना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना वर्कआउट करना। जब आप गहरी नींद में होते हैं, तभी शरीर मांसपेशियों की टूट-फूट की मरम्मत करता है और उनका विकास होता है। यदि शरीर को उचित आराम नहीं मिलेगा, तो कठिन वर्कआउट और सही खानपान के बावजूद अपेक्षित नतीजे हासिल नहीं हो सकेंगे।


















