बिहार के पूर्णिया में इंजीनियरिंग छात्रों ने महज ₹5500 में गढ़ा द्विभाषी एआई सर्विंग रोबोट नोवाजमशेदपुर में डीजल का खर्च घटाकर अनीश ने इलेक्ट्रिक टोटो से बढ़ाई बचत, महीने में ₹40,000 तक कमाईदैनिक जरूरतों से लेकर स्ट्रीट फूड तक, रांची का हरमू बाजार बना खरीदारी का बड़ा ठिकानाकोच्चि में सुपरस्टार ममूटी का पुराना आशियाना अब हॉलिडे होम, फैंस के लिए खुला विलामूलांक 2 राशिफल 2 अक्टूबर 2026: काम में भटकेगा मन, लिखकर योजना बनाने से दूर होगी उलझनलाइव मैच: एशियाई खेल 2026: भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम फाइनल में पहुंची, स्वर्ण पर नजरेंअमेरिकी सपने के टूटने से लेकर स्वाभिमान के स्टार बनने तक, कैसे रोहित रॉय ने पलटी अपनी किस्मतटोक्यो में महंगाई दर बढ़कर 2.7 प्रतिशत हुई, फिर भी जापानी येन में लौटी सुस्तीछत्तीसगढ़ के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसर भर्ती का ढांचा बदला, अब तीन-चौथाई सीटें पदोन्नति से भरी जाएंगीअमेरिकी महंगाई के दबाव से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पस्त, पांचवें दिन भी गिरावट जारी
बिहार के पूर्णिया में इंजीनियरिंग छात्रों ने महज ₹5500 में गढ़ा द्विभाषी एआई सर्विंग रोबोट नोवातकनीक
2 अक्तू॰ 2026, 8:40 am (40 मिनट पहले)· 1

बिहार के पूर्णिया में इंजीनियरिंग छात्रों ने महज ₹5500 में गढ़ा द्विभाषी एआई सर्विंग रोबोट नोवा

पूर्णिया स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के चार छात्रों ने करीब एक महीने की मेहनत से नोवा नाम का चार फीट ऊंचा सर्विंग रोबोट विकसित किया है। यह रोबोट हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बात करने के साथ विभिन्न सवालों के जवाब देने में सक्षम है।

बिहार के पूर्णिया स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के तकनीकी छात्रों ने कम लागत में अत्याधुनिक तकनीक विकसित कर एक शानदार उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग संकाय के पांचवें सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहे चार युवा विद्यार्थियों ने मिलकर एक बेहद किफायती और उपयोगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सर्विंग रोबोट तैयार किया है। इस रोबोट का नाम 'नोवा' रखा गया है। लगभग चार फीट ऊंचे इस रोबोट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह इंसानों से हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सहजता से संवाद कर सकता है। पूछे जाने वाले विभिन्न सवालों का सटीक उत्तर जुटाने के लिए यह आधुनिक एआई असिस्टेंट प्रणाली का सहारा लेता है।

चार विद्यार्थियों की टीम ने एक माह में किया निर्माण

इस अनूठी तकनीकी परियोजना को राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पूर्णिया के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग 5वें सेमेस्टर के चार होनहार छात्रों आर्यन कुमार, आनंद कुमार, राजीव कुमार पंडित और शंकर कुमार ने संयुक्त प्रयास से पूरा किया है। विद्यार्थियों ने इस पूरे ढांचे और प्रोग्रामिंग को तैयार करने में करीब एक महीने तक लगातार मेहनत की। छात्रों का मुख्य ध्यान एक ऐसा यंत्र बनाने पर था जो शुरुआत में बातचीत करने और आवश्यक जानकारियां साझा करने में सक्षम हो, और आगे चलकर विभिन्न दैनिक कामकाज में इंसानों का हाथ बंटा सके।

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दैनिक सवालों के जवाब और मौसम का हाल बताने में सक्षम

निर्माता छात्रों के अनुसार, नोवा रोबोट से जब मौसम से जुड़ा कोई प्रश्न पूछा जाता है तो वह तुरंत उस इलाके के मौसम की स्थिति बता देता है। इसके अतिरिक्त यह आम ज्ञान से जुड़े सामान्य सवालों के जवाब देने, संगीत या गाने सुनाने और अन्य जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराने जैसे कार्य आसानी से कर लेता है। छात्रों की योजना इसे आगे चलकर बहुउद्देशीय यानी मल्टी-फंक्शनल मशीन के रूप में ढालने की है। आने वाले समय में आवश्यक प्रोग्रामिंग और हार्डवेयर जोड़कर इसे सामान अथवा पार्सल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ढोने जैसे श्रमसाध्य कार्यों के योग्य भी बनाया जाएगा।

सस्ते घटकों और ईएसपी32 से कम खर्च में साधा कमाल

इस रोबोट के निर्माण में प्रयुक्त तकनीकी घटकों की जानकारी देते हुए छात्रों ने बताया कि इसमें ड्राइविंग सिस्टम, सेंसर्स, ब्लूटूथ और वाई-फाई मॉड्यूल लगाए गए हैं। इसके मस्तिष्क और नियंत्रण के लिए मुख्य प्रोसेसर, ईएसपी32 बोर्ड, उच्च क्षमता की बैटरी, माइक्रोफोन और एआई असिस्टेंट जैसी आवश्यक प्रणालियों का संयोजन किया गया है। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि इन सभी इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और हार्डवेयर को बेहद संतुलित तरीके से जोड़कर पूरी संरचना महज ₹5500 के कुल खर्च में खड़ी कर दी गई। छात्रों का दावा है कि सीमित लागत के बावजूद नोवा उपयोगकर्ता द्वारा पूछी गई अनगिनत जानकारियों को प्रोसेस कर जवाब देने की पूरी क्षमता रखता है।

शिक्षक के मार्गदर्शन से शुरू हुआ सफर

परियोजना की शुरुआत के संदर्भ में छात्रों ने बताया कि कॉलेज के फैकल्टी शिक्षक प्रोफेसर अमन कुमार ने उन्हें नवाचार के तहत एक उपयोगी रोबोटिक मॉडल तैयार करने की सलाह दी थी। अपने प्राध्यापक के इसी सुझाव को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए चारों साथियों ने मिलकर योजना बनाई और दिन-रात एक करके करीब तीस दिनों में इसे साकार रूप दे दिया। निर्माण पूरा होने के बाद से यह रोबोट कॉलेज परिसर में शिक्षकों और अन्य विद्यार्थियों के बीच भारी कौतूहल और चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

अस्पतालों, स्टेशनों और दफ्तरों में तैनाती की भावी योजनाएं

तकनीकी टीम का मानना है कि यदि उन्हें शासन अथवा उद्योग जगत से तकनीकी और वित्तीय संसाधन प्राप्त होते हैं, तो नोवा को बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक स्तर पर विकसित किया जा सकता है। छात्रों की परिकल्पना के अनुसार, इस रोबोट का उपयोग भविष्य में रेलवे स्टेशनों, बड़े अस्पतालों, शॉपिंग मॉल, कॉरपोरेट दफ्तरों, रेस्तरां और पार्सल डिलीवरी जैसी सार्वजनिक और व्यावसायिक जगहों पर सहजता से किया जा सकता है। छात्रों का अंतिम लक्ष्य एक ऐसा मजबूत तकनीकी तंत्र तैयार करना है, जो आम जनता की सेवा करने के साथ-साथ संचार और सहायता से जुड़ी रोजमर्रा की जरूरतों को सुगमता से पूरा कर सके।

महाविद्यालय के प्राचार्य ने की सराहना, पेटेंट कराने की उठाई मांग

संस्थान के प्राचार्य डॉ. प्रोफेसर मोहम्मद लतीफ ने छात्रों की इस असाधारण तकनीकी पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पूर्णिया हमेशा से युवा तकनीकी प्रतिभाओं को निखारने का एक सशक्त मंच रहा है और यहां के छात्र लगातार नए-नए व्यवहारिक प्रोजेक्ट विकसित करते रहते हैं। प्राचार्य ने रेखांकित किया कि चार छात्रों की इस टोली ने अत्यंत सीमित बजट में एक द्विभाषी कार्यक्षम रोबोट बनाकर अपनी योग्यता सिद्ध की है। छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्होंने इस नवाचार को आगे बढ़ाने पर बल दिया और साथ ही सरकार से मांग की कि छात्रों के इस मूल आविष्कार को पेटेंट कराने में जरूरी प्रशासनिक और आर्थिक सहयोग दिया जाए।

सवाल-जवाब

पूर्णिया में बनाए गए इस रोबोट का नाम क्या है और इसे किसने बनाया है?
इस रोबोट का नाम 'नोवा' रखा गया है। इसे राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज पूर्णिया के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग 5वें सेमेस्टर के चार छात्रों आर्यन कुमार, आनंद कुमार, राजीव कुमार पंडित और शंकर कुमार ने तैयार किया है।
नोवा रोबोट को बनाने में कुल कितना खर्च और समय लगा?
छात्रों ने इस रोबोट को करीब एक महीने की मेहनत से तैयार किया है और इसके निर्माण में कुल लगभग ₹5500 की लागत आई है।
नोवा रोबोट की ऊंचाई कितनी है और यह किन भाषाओं में बात कर सकता है?
इस रोबोट की लंबाई करीब 4 फीट है और यह इंसानों के साथ हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बातचीत कर सकता है।
नोवा वर्तमान में क्या-क्या काम करने में सक्षम है?
यह रोबोट मौसम का हाल बताने, सामान्य सवालों के जवाब देने, गाने सुनाने और विभिन्न जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए एआई असिस्टेंट का इस्तेमाल करता है।
रोबोट के निर्माण में किन प्रमुख उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है?
इसके निर्माण में ड्राइविंग सिस्टम, सेंसर्स, ब्लूटूथ, वाई-फाई मॉड्यूल, प्रोसेसर, ईएसपी32, बैटरी, माइक्रोफोन और एआई असिस्टेंट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया है।
छात्रों को यह रोबोट बनाने की प्रेरणा कहां से मिली?
कॉलेज के फैकल्टी शिक्षक प्रोफेसर अमन कुमार ने छात्रों को नवाचार के तहत एक रोबोट तैयार करने का सुझाव दिया था, जिसके बाद उन्होंने इस पर काम शुरू किया।
भविष्य में इस रोबोट का उपयोग किन जगहों पर करने की योजना है?
छात्रों के अनुसार तकनीकी और आर्थिक मदद मिलने पर इसे रेलवे स्टेशन, अस्पताल, मॉल, ऑफिस, रेस्तरां और पार्सल डिलीवरी जैसी जगहों पर इस्तेमाल के लिए विकसित किया जा सकता है।
कॉलेज के प्राचार्य ने इस प्रोजेक्ट को लेकर क्या मांग रखी है?
प्राचार्य डॉ. प्रोफेसर मोहम्मद लतीफ ने छात्रों के काम की सराहना करते हुए सरकार से उनके इस आविष्कार को पेटेंट कराने में सहयोग देने की मांग की है।
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