छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में प्रोफेसर बनने का सपना संजो रहे शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के करियर से जुड़े सेवा नियमों में राज्य सरकार ने भारी फेरबदल कर दिया है. सरकारी महाविद्यालयों में शैक्षणिक संवर्ग के शीर्ष पदों पर होने वाली नियुक्तियों के पुराने तौर-तरीकों को बदलते हुए शासन ने एक नया भर्ती ढांचा अधिसूचित किया है. इस नए फैसले के तहत प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में प्रोफेसर पद के कुल स्वीकृत पदों में से 75 प्रतिशत पद अब सीधे तौर पर विभागीय पदोन्नति के जरिए भरे जाएंगे. इसके विपरीत, खुली प्रतियोगिता यानी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली सीधी भर्ती के हिस्से में अब केवल 25 प्रतिशत पद ही आएंगे. राज्य प्रशासन ने छत्तीसगढ़ शैक्षणिक सेवा भर्ती नियम-2019 (महाविद्यालयीन शाखा, राजपत्रित) में विधिवत संशोधन करते हुए इस नई नीति को अमलीजामा पहनाया है, जिसके चलते निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कार्यरत प्राध्यापकों के लिए सरकारी सेवाओं में सीधे प्रोफेसर बनने का मार्ग बेहद संकरा हो गया है.
पुराने नियमों और पूर्व व्यवस्था की स्थिति
इस ताजा संशोधन से पहले राज्य के उच्च शिक्षा विभाग में व्यवस्था पूरी तरह अलग थी. पूर्व प्रावधानों के मुताबिक शासकीय महाविद्यालयों में प्रोफेसर के 100 प्रतिशत पदों पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से ही सीधी भर्ती आयोजित की जाती थी. इस पुरानी प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह था कि किसी भी निजी कॉलेज, गैर-सरकारी विश्वविद्यालय अथवा स्वतंत्र अनुसंधान संस्थानों में कार्यरत योग्य प्राध्यापक और शोधकर्ता बिना किसी विभागीय रुकावट के चयन प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते थे. वे आयोग द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं और साक्षात्कार के चरणों को उत्तीर्ण कर सीधे प्रथम श्रेणी के इस प्रतिष्ठित पद पर चयनित होने की पात्रता रखते थे. उस व्यवस्था में योग्यता और खुले मुकाबले के आधार पर सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलता था, लेकिन अब इस नए बदलाव ने प्रतियोगिता का दायरा बहुत सीमित कर दिया है.
कॉलेजों का मौजूदा ढांचा और पदों का गणित
वर्तमान सांख्यिकी के अनुसार छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में इस समय कुल 343 शासकीय महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं. इन सभी सरकारी संस्थानों के लिए शासन स्तर पर प्रोफेसर संवर्ग के कुल 781 पद स्वीकृत हैं. संशोधन लागू होने के बाद अब इन 781 पदों का वितरण पूरी तरह बदल चुका है. नए नियम के तहत कुल पदों में से तीन-चौथाई यानी 75 प्रतिशत पद विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा पर उन शिक्षकों को दिए जाएंगे, जो सरकारी कॉलेजों में पहले से ही सहायक प्राध्यापक या सह-प्राध्यापक के पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ केवल 25 प्रतिशत पदों के लिए ही राज्य लोक सेवा आयोग भविष्य में विज्ञापन निकालेगा, जिस पर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के जरिए खुले बाजार से योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जा सकेगा.
सीधी भर्ती की आयु सीमा और पात्रता की शर्तें
शासन द्वारा जारी संशोधित प्रावधानों में सीधी भर्ती के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए कड़े उम्र के पैमाने तय किए गए हैं. नए नियमों के अनुसार आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 31 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष निर्धारित की गई है. यद्यपि शासन के प्रचलित नियमों के तहत आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु सीमा में विशेष छूट प्रदान की जाती है, किंतु सभी रियायतों को जोड़ने के बाद भी किसी भी परिस्थिति में अभ्यर्थी की अधिकतम आयु 61 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती. उल्लेखनीय है कि महाविद्यालयों में प्रोफेसर का पद प्रथम श्रेणी का पद होता है, जिसमें अध्यापन के साथ-साथ व्यापक प्रशासनिक और नीतिगत उत्तरदायित्व शामिल होते हैं. सीधी भर्ती का कोटा मात्र एक-चौथाई रह जाने से पीएचडी उपाधि धारक और निजी क्षेत्रों में अध्यापन कर रहे हजारों अनुभवी उम्मीदवारों के सामने इस पद तक पहुंचने की प्रतिस्पर्धा अब अत्यंत कठिन हो गई है.
वर्ष 2021 की अटकी भर्ती और भविष्य की चुनौतियां
इस नियम परिवर्तन के बीच पूर्व से लंबित भर्ती प्रक्रिया का पेंच भी अब तक नहीं सुलझ सका है. छत्तीसगढ़ के गठन के बाद पहली बार वर्ष 2021 में लोक सेवा आयोग ने एक साथ 595 पदों पर प्रोफेसरों की सीधी भर्ती के लिए ऐतिहासिक विज्ञापन प्रकाशित किया था. उस विज्ञापन के आधार पर हजारों आवेदन आए और पिछले वर्ष आयोग ने अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों तथा दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था. इसके बावजूद आयोग द्वारा पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की आधिकारिक अंतिम सूची आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिसके चलते साक्षात्कार की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है. चूंकि वर्ष 2021 की वह भर्ती पुराने 100 प्रतिशत सीधी भर्ती नियम के अंतर्गत विज्ञापित हुई थी, इसलिए अब नए 25 प्रतिशत कोटे के लागू होने के बाद यह आशंका प्रबल हो गई है कि आगामी कई वर्षों तक आयोग की ओर से नए प्रोफेसर पदों की कोई खुली भर्ती शायद ही देखने को मिले.



















