रसोई में मौसम के बदलने और तापमान में बढ़ोतरी होने के साथ ही अनाजों तथा दालों को सुरक्षित बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। खासतौर पर जब वातावरण में नमी या उमस बढ़ती है, तब डिब्बों में रखी दालों में छोटे-छोटे घुन और कीड़े पनपने का खतरा काफी बढ़ जाता है। कई बार लोग बाजार से अधिक मात्रा में दाल खरीद लेते हैं ताकि लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जा सके, लेकिन सही रख-रखाव के अभाव में यह जल्दी खराब होने लगती है। यदि दाल वाले डिब्बे में कीड़े दिखाई देने लगें, तो तुरंत उसे फेंकने के बजाय स्टोरेज के तौर-तरीकों में सुधार करना बेहद आवश्यक है। दाल को हमेशा पूरी तरह सूखी जगह पर रखना, उसे नमी के संपर्क में आने से बचाना और डिब्बे की नियमित सफाई करना इस समस्या से राहत दिला सकता है।
सूखी नीम की पत्तियों का प्राकृतिक उपाय और इस्तेमाल का तरीका
घुन की समस्या से निपटने के लिए भारतीय रसोईघरों में सूखी नीम की पत्तियों का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। नीम में मौजूद प्राकृतिक तीखी गंध कीटों को दूर भगाने में बेहद असरदार मानी जाती है। हालांकि इस उपाय को अपनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले नीम की साफ और पूरी तरह सूखी पत्तियां ही इस्तेमाल करें। यदि नीम की पत्तियों में जरा सी भी नमी या सीलन होगी, तो वह डिब्बे के अंदर बंद होकर दाल में नमी बढ़ा देगी, जिससे कीड़े लगने की गति और तेज हो सकती है।
नीम की इन सूखी पत्तियों को दाल के डिब्बे में सबसे ऊपरी हिस्से में रखा जा सकता है। अगर डिब्बा बड़ा है और दाल की मात्रा अधिक है, तो पत्तियों की कुछ परतों को दाल के बीच-बीच में भी बिछाया जा सकता है। नीम की तेज सुगंध डिब्बे के अंदर कीड़ों के पनपने की संभावना को कम करती है। इसके साथ ही यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि नीम की पत्तियां डिब्बे में हमेशा के लिए नहीं छोड़ी जा सकतीं। समय-समय पर डिब्बे को खोलकर नीम की पत्तियों की स्थिति जांचते रहना चाहिए। यदि पत्तियां खराब दिखने लगें, उनमें नमी आ जाए या किसी प्रकार की दुर्गंध महसूस हो, तो उन्हें तुरंत बाहर निकाल देना चाहिए और उनकी जगह नई सूखी पत्तियां रख देनी चाहिए। हालांकि, नीम की पत्तियां एक सहायक उपाय हैं और यह कीड़ों से सौ प्रतिशत सुरक्षा की पूर्ण गारंटी नहीं देतीं, इसलिए दाल का समय-समय पर निरीक्षण करते रहना आवश्यक है।
डिब्बे की स्वच्छता और एयरटाइट कंटेनर का सही उपयोग
अक्सर देखा जाता है कि लोग बाजार से नई दाल लाकर उसे सीधे उसी डिब्बे में पलट देते हैं जिसमें पहले से दाल रखी हुई थी। यदि उस पुराने डिब्बे में घुन के सूक्ष्म अंडे या कीड़े मौजूद हैं, तो नई दाल डालते ही वह भी संक्रमण की चपेट में आ जाएगी। इसलिए नई दाल को स्टोर करने से पूर्व डिब्बे को खाली करके पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए और धूप या हवा में पूरी तरह सुखा लेना चाहिए। सूखे और साफ डिब्बे में ही नई दाल भरनी चाहिए।
दालों के भंडारण के लिए साधारण डिब्बों की तुलना में एयरटाइट कंटेनर का उपयोग करना काफी बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह बाहर की नमी और हवा को अंदर प्रवेश करने से रोकता है। इसके अलावा, रोजाना खाना बनाते समय दाल निकालते वक्त इस्तेमाल किए जाने वाले चम्मच पर भी ध्यान देना जरूरी है। डिब्बे से दाल निकालते समय हमेशा पूरी तरह सूखे चम्मच का ही प्रयोग करें। गीले हाथों या नमी वाले चम्मच का उपयोग करने से डिब्बे के अंदर पानी की बूंदें चली जाती हैं, जिससे दाल में सीलन पैदा होती है और लंबे समय में उसमें घुन और फफूंद लगने का जोखिम बहुत अधिक बढ़ जाता है।
पुराने और नए स्टॉक को आपस में मिलाने की आदत बदलें
रसोई में एक आम आदत यह होती है कि जब डिब्बे में थोड़ी सी पुरानी दाल बची रहती है, तो लोग नई खरीदी गई दाल को उसी के ऊपर डाल देते हैं। दाल के भंडारण के मामले में इस आदत को बदलना बहुत जरूरी है। सही तरीका यह है कि पहले डिब्बे में बची हुई पुरानी दाल का इस्तेमाल करके उसे पूरी तरह समाप्त कर लिया जाए। इसके बाद डिब्बे को साफ और सूखा करके ही उसमें नया स्टॉक भरा जाए।
यदि बची हुई पुरानी दाल में घुन का थोड़ा सा भी असर होगा, तो नई दाल मिलाते ही पूरी सामग्री खराब हो जाएगी। यदि आपके घर में दाल का इस्तेमाल कम होता है, तो बहुत अधिक मात्रा में एक साथ खरीदने के बजाय कम मात्रा में दाल खरीदना और उसे समय पर समाप्त कर देना एक आसान और सुरक्षित विकल्प हो सकता है। इससे लंबे समय तक स्टोर करने की झंझट खत्म हो जाती है और दाल हमेशा ताजी बनी रहती है।
खरीदते समय बरतें सावधानी और संक्रमण होने पर क्या करें
यह समझना बेहद जरूरी है कि दाल में घुन की समस्या हमेशा घर पर रखने के बाद ही शुरू नहीं होती। कई बार बाजार या दुकान से खरीदे गए सीलबंद पैकेट के अंदर पहले से ही कीड़े या उनके अंडे मौजूद हो सकते हैं। इसलिए खरीदारी करते समय दाल के पैकेट की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए। यदि पैकेट के अंदर दानों में छोटे छिद्र दिखें, जाले जैसी पतली परत दिखाई दे, अत्यधिक मात्रा में टूटे हुए दाने हों या किसी प्रकार की असामान्य गंध आए, तो ऐसा पैकेट खरीदने से बचना चाहिए।
बाजार से दाल लाने के बाद उसे सीधे डिब्बे में बंद करने के बजाय एक बड़ी प्लेट या ट्रे में फैलाकर कुछ देर के लिए जांच लेना चाहिए। यदि दाल में पहले से ही घुन लग चुके हैं, तो केवल उसमें नीम की पत्तियां डालकर रख देने से समस्या हल नहीं होगी। ऐसी स्थिति में संक्रमित दाल को अलग कर लें और कीड़ों के असर का आकलन करें। यदि दाल में कीड़े बहुत अधिक बढ़ चुके हैं या उसमें से खराब गंध आ रही है, तो सेहत की सुरक्षा के लिहाज से ऐसी दाल का सेवन न करना ही सबसे उचित और सुरक्षित कदम है।



















