भारत में पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम और उद्योगपति रतन टाटा जैसे दिग्गजों को एक ऐसा स्थान हासिल रहा है, जहां हर युवा उन पर बिना किसी झिझक के अटूट विश्वास करता आया है। उनकी सादगी, ईमानदारी, कठिन परिश्रम और देश के लिए सर्वस्व समर्पित करने की भावना उन्हें हर श्रेणी के नागरिक के लिए एक मिसाल बनाती है। हालांकि, समय बदलने के साथ अब यह सवाल बार-बार सामने आता है कि आधुनिक दौर की युवा पीढ़ी यानी जेनरेशन ज़ी और मिलेनियल्स किस व्यक्तित्व को अपना मार्गदर्शक मान रहे हैं। आज के डिजिटल युग में युवाओं की सोच में व्यापक बदलाव आया है। अब वे किसी एक सिंगल हीरो या एकमात्र चेहरे का अनुसरण करने के बजाय विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अलग-अलग दिग्गजों के विशिष्ट गुणों को सीखकर प्रेरणा ले रहे हैं।
एकल आदर्श से बहु-आयामी प्रेरणा की ओर बदलाव
पुराने समय में युवाओं के लिए सफलता का मुख्य दायरा पारंपरिक उच्च शिक्षा, प्रतिष्ठित सरकारी नौकरियां या बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में उच्च पद हासिल करने तक सीमित हुआ करता था। लेकिन आज के युवा अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्गठित कर रहे हैं। वे ऐसे नायकों को अपना आदर्श मानते हैं जो जीवन में असफलता से डरते नहीं हैं और विपरीत परिस्थितियों से उबरकर नया रास्ता बनाने की क्षमता रखते हैं। आज की युवा पीढ़ी केवल नौकरी तलाशने वाली बनने के बजाय नए उद्यम शुरू करके दूसरों के लिए अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक बेहतरी जैसे विषयों पर खुलकर अपनी राय रखने वाले चेहरों को युवाओं द्वारा विशेष सम्मान दिया जा रहा है।
प्रौद्योगिकी और वैश्विक कॉर्पोरेट नेतृत्व के दिग्गज
वैश्विक प्रौद्योगिकी मंच पर भारतीय प्रतिभा का परचम लहराने वाले दिग्गजों में सुंदर पिचाई का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई एक छोटे शहर की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर दुनिया की सबसे शक्तिशाली टेक कंपनी के शीर्ष तक पहुंचे हैं। उनका शांत व्यक्तित्व और विनम्र स्वभाव युवाओं को यह विश्वास दिलाता है कि सादगी के साथ भी वैश्विक नेतृत्व हासिल किया जा सकता है।
इसी क्रम में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला का नाम आता है, जिन्हें केवल एक सफल कॉर्पोरेट रणनीतिकार ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील इंसान के रूप में देखा जाता है। सत्य नडेला ने कॉर्पोरेट लीडरशिप में सहानुभूति, इंसानियत और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी है। उनकी यह अनूठी प्रबंधन शैली दुनिया भर के युवा पेशेवरों और प्रबंधकों के लिए सीख का बड़ा जरिया बनी हुई है।
उद्यमिता और नए स्टार्टअप के प्रतीक
व्यापार जगत में लीक से हटकर सोचने वालों के लिए नाइका की संस्थापिका फाल्गुनी नायर एक असाधारण मिसाल हैं। 50 वर्ष की उम्र में अपना उद्यम शुरू करके उन्होंने अरबों डॉलर की मूल्यवान कंपनी खड़ी की। फाल्गुनी नायर की यह यात्रा यह साबित करती है कि नया करियर चुनने या स्टार्टअप शुरू करने के लिए उम्र कभी कोई बाधा नहीं बनती।
वहीं दूसरी ओर, ओयो के संस्थापक रितेश अग्रवाल कम उम्र में कॉर्पोरेट सफलता की नई कहानी लिखने के लिए जाने जाते हैं। एक छोटे शहर से निकलकर वैश्विक स्तर पर हॉस्पिटैलिटी नेटवर्क तैयार करने का उनका अनुभव उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो कम उम्र में ही अपना बिज़नेस स्थापित करने के सपने देखते हैं।
भारतीय उद्योग जगत में मूल्यों पर आधारित व्यापार की बात करें तो इन्फोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति आज भी नैतिक नेतृत्व और पारदर्शी कॉर्पोरेट संस्कृति के प्रतीक बने हुए हैं। स्टार्टअप शुरू करने वाले नए उद्यमी उनकी ईमानदार कार्यशैली और व्यावसायिक नैतिकता को गहरी सम्मान दृष्टि से देखते हैं।
इसी तरह डिजिटल इंडिया की नींव रखने में अहम भूमिका निभाने वाले नंदन नीलेकणि युवाओं के बीच तकनीक के जरिए सामाजिक बदलाव लाने वाले जननायक के रूप में पहचाने जाते हैं। आधार जैसी विशाल डिजिटल बुनियादी ढांचा परियोजना से जुड़े नंदन नीलेकणि उन युवाओं के लिए आदर्श हैं, जो तकनीक का उपयोग देश की समस्याओं को हल करने में करना चाहते हैं।
खेल और मानसिक उत्कृष्टता के शिखर
खेल के मैदान में भारत का मान बढ़ाने वाले एथलीटों में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा आज की पीढ़ी के सबसे बड़े स्पोर्ट्स आइकॉन बन चुके हैं। उनकी सादगी, जमीन से जुड़ाव और निरंतर कड़ा अभ्यास करने की निष्ठा युवाओं को यह समझाती है कि महानता रातों-रात या किसी शॉर्टकट से हासिल नहीं होती, बल्कि इसके लिए लगातार अनुशासन की आवश्यकता होती है।
क्रिकेट जगत में विराट कोहली का नाम केवल उनके रनों और रिकॉर्ड्स के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी अद्वितीय फिटनेस और खुद को लगातार बेहतर बनाने की जिद के लिए जाना जाता है। मैदान के अंदर उनका जुझारूपन और मैदान के बाहर उनकी अनुशासित जीवनशैली लाखों युवाओं को स्वस्थ और केंद्रित जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।
इसके अलावा बौद्धिक खेल के क्षेत्र में शतरंज खिलाड़ी गुकेश डी ने बहुत ही कम उम्र में विश्व स्तर पर शीर्ष खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई है। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय युवा अब न केवल शारीरिक खेलों में, बल्कि दिमागी प्रतियोगिताओं में भी दुनिया का नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
सामाजिक परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा
शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले सोनम वांगचुक युवाओं को जीवन का वास्तविक अर्थ समझाते हैं। लद्दाख में जमीनी स्तर पर तकनीकी नवाचार और व्यावहारिक शिक्षा पद्धतियों पर काम करने वाले सोनम वांगचुक का संदेश स्पष्ट है कि असली सफलता केवल व्यक्तिगत संपत्ति अर्जित करने में नहीं, बल्कि अपने समाज और पर्यावरण की रक्षा के लिए योगदान देने में निहित है। इसके अलावा निखिल कामथ जैसे युवा उद्यमी भी अपनी कार्यशैली और विचारों से युवाओं को लगातार प्रभावित कर रहे हैं।
आधुनिक प्रेरणा प्रणाली का बदलता स्वरूप
आज के युवा किसी एक व्यक्ति की हर बात को आंख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय अलग-अलग दिग्गजों से उनकी सबसे बेहतरीन खूबियां चुनते हैं। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए यदि कोई सुंदर पिचाई का अनुसरण करता है, तो फिटनेस और अनुशासन के लिए वह विराट कोहली से सीख लेता है। सामाजिक कल्याण के लिए सोनम वांगचुक के विचार पसंद किए जाते हैं, तो वित्तीय स्वतंत्रता और उद्यमिता के लिए फाल्गुनी नायर और रितेश अग्रवाल की यात्रा को समझा जाता है।
यह ध्यान देना आवश्यक है कि युवाओं की पसंद किसी एक औपचारिक सर्वेक्षण या आधिकारिक सूची तक सीमित नहीं है। यह चयन विभिन्न हस्तियों के सार्वजनिक योगदान, उनकी उपलब्धियों और जनमानस पर पड़े उनके प्रेरणादायक प्रभाव पर आधारित है। हर व्यक्ति के अपने अनुभवों, रुचियों और जीवन मूल्यों के अनुसार उसके रोल मॉडल का चयन पूरी तरह से अलग हो सकता है।



















