नई दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की विशाल जनसभा से ठीक पहले सियासी हलचल चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जनता से इस आयोजन में शामिल होने का आह्वान किया है। उन्होंने नागरिकों को कनॉट प्लेस में जुटने या सीधे सभा स्थल पहुंचने का न्योता दिया। 1 नवंबर को आयोजित इस महारैली को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक तापमान काफी बढ़ चुका है।
राहुल गांधी का संदेश और रैली का समय
सोशल मीडिया मंच X पर जारी अपने संदेश में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होगा। उन्होंने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' नारे के साथ दिल्ली के नागरिकों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग चाहें तो कनॉट प्लेस से साथ चल सकते हैं या फिर सीधे कार्यक्रम स्थल पर पहुंच सकते हैं। विपक्षी दलों का लक्ष्य इस प्रदर्शन के जरिए राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करना है।
विपक्ष का जमावड़ा और राज्यों से भागीदारी
इस महासम्मेलन की नींव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 26 अक्टूबर को रखी थी, जब उन्होंने केंद्र सरकार पर महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर निशाना साधते हुए 1 नवंबर की तारीख तय की थी। इस आयोजन में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ नई दिल्ली पहुंचे हैं। इसके अतिरिक्त, रांची से टाना भगत समुदाय के सदस्य भी अपने पारंपरिक राशन, बर्तन और ईंधन सामग्री के साथ दिल्ली पहुंचे हैं। मध्य प्रदेश से दिग्विजय सिंह ने जनता और कार्यकर्ताओं से दिल्ली कूच करने का आग्रह किया, जबकि बिहार के बगहा सहित कई इलाकों में संगठन को मजबूत करने की विशेष रणनीति बनाई गई।
सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजधानी के इस बड़े आयोजन को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कड़े बंदोबस्त किए हैं। रामलीला मैदान को 14 अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहां निगरानी के लिए 4 हजार जवानों को तैनात किया गया है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इस आयोजन से पहले एक विस्तृत संगठनात्मक मंथन किया और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी रूपरेखा तैयार की। इस रैली पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है, जहां कांग्रेस इसे एक ऐतिहासिक पहल करार दे रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इसे पूरी तरह प्रभावहीन आयोजन बता रही है।
रामलीला मैदान के बारे में
रामलीला मैदान नई दिल्ली का एक अत्यंत प्रसिद्ध और विशाल खुला परिसर है, जो पारंपरिक रूप से रामलीला मंचन के लिए विख्यात रहा है। यह स्थान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और दिल्ली गेट के निकट स्थित है। धार्मिक उत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा, यह मैदान दशकों से देश की प्रमुख राजनीतिक रैलियों, जनांदोलनों और विशाल जनसभाओं का ऐतिहासिक गवाह रहा है, जहां समय-समय पर भारी जनसैलाब उमड़ता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस आह्वान पर नागरिकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई समर्थकों ने बढ़ती महंगाई, ईंधन दरों और रोजगार की चिंताओं को उठाते हुए रैली का स्वागत किया, जबकि अन्य लोगों ने इसे महज सियासी दिखावा बताते हुए भीड़ और प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए।


























