सर्दियों की शुरुआत के साथ ही सब्जी मंडियों और बाजारों में हरी, ताजी मूली की आवक काफी बढ़ जाती है। अधिकांश घरों में मूली की जड़ों का इस्तेमाल सलाद, तीखे अचार या भरवां पराठों में भरपूर किया जाता है, लेकिन इसके ऊपर लगे हरे पत्तों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है। वास्तव में ये पत्ते पोषण का भंडार होते हैं, जिनमें विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम और फाइबर भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं। इनसे तैयार सूखी भुजिया या सब्जी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि मौसमी बीमारियों से बचाव और पाचन तंत्र के लिए भी बेहद गुणकारी साबित होती है। यदि आप रोज बनने वाली दाल और सब्जियों से अलग कुछ नया आजमाना चाहते हैं, तो मूली के पत्तों और आलू की यह आसान रेसिपी आपके भोजन का स्वाद बढ़ा देगी।
सब्जी तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री
इस सब्जी को बनाने के लिए बेहद सामान्य और रसोई में आसानी से उपलब्ध होने वाली सामग्री की जरूरत होती है। सबसे पहले 3 कप ताजे मूली के पत्ते लें, जिन्हें धोकर बारीक काट लिया गया हो। इसके साथ 1 मध्यम आकार का आलू चाहिए, जिसे छोटे चौकोर टुकड़ों में काट कर रख लें। तड़के और मसालों के लिए तेल, जीरा, चुटकी भर हींग, कटा हुआ प्याज, अदरक-लहसुन का पेस्ट और कटी हुई हरी मिर्च तैयार रखें। सूखे मसालों में हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार सादा नमक की आवश्यकता होगी।
पत्तों की सफाई और पकाने की सही विधि
हरी पत्तेदार सब्जियों में मिट्टी और धूल के कण अधिक चिपके रहते हैं, इसलिए मूली के पत्तों को काटने से पहले दो से तीन बार साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। पानी पूरी तरह निथर जाने के बाद ही पत्तों को बारीक काटें। इसके बाद गैस पर कढ़ाई चढ़ाएं और उसमें तेल गर्म करें। तेल जब अच्छे से गर्म हो जाए, तब उसमें जीरा और हींग का तड़का लगाएं। जैसे ही जीरा चटकने लगे, उसमें बारीक कटा प्याज डालें और हल्का सुनहरा होने तक भून लें। प्याज भुन जाने पर अदरक-लहसुन का पेस्ट और कटी हरी मिर्च डालकर लगभग एक मिनट तक मध्यम आंच पर पकाएं ताकि उनका कच्चापन दूर हो जाए।
इसके बाद कढ़ाई में कटे हुए आलू के टुकड़े डालें और उन्हें 3 से 4 मिनट तक चलाते हुए भूनें। अब आंच को धीमा करके हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक मिलाएं ताकि मसाले अच्छी तरह आलू पर लिपट जाएं। मसाले भुनने के बाद कढ़ाई में बारीक कटे मूली के पत्ते डाल दें। शुरुआत में पत्तों का आयतन अधिक दिखता है, लेकिन गर्म भाप लगते ही वे तेजी से गलकर कम हो जाते हैं। सभी चीजों को चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं, फिर कढ़ाई पर ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर 10 से 12 मिनट तक पकने दें।
धीमी आंच पर पकाना और परोसने का तरीका
सब्जी को ढंककर पकाते समय बीच-बीच में ढक्कन हटाकर चलाते रहें ताकि वह कढ़ाई के तले में चिपककर जले नहीं। जब आलू पूरी तरह गलकर नरम हो जाएं और पत्तों का सारा पानी सूखकर वे भुन जाएं, तब गैस की आंच बंद कर दें। यह गरमागरम भुजिया ताजी गेहूं की रोटियों, पराठों या फिर सादे दाल-चावल के साथ परोसने के लिए बिल्कुल तैयार है। इसका पारंपरिक देसी स्वाद और हल्की तीखी महक खाने के स्वाद को दोगुना कर देती है।
स्वाद बढ़ाने के खास सुझाव
इस सब्जी को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जा सकता है। भूनते समय सब्जी में जरा सा बेसन मिला देने से उसका गीलापन दूर होता है और बनावट बहुत अच्छी हो जाती है। जो लोग तीखा और पारंपरिक स्वाद पसंद करते हैं, वे तड़के में लहसुन की मात्रा बढ़ा सकते हैं। इस सूखी सब्जी को यदि रिफाइंड के बजाय शुद्ध सरसों के तेल में बनाया जाए, तो इसका जायका कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही हमेशा मूली के कोमल और ताजे पत्तों का ही चुनाव करें, क्योंकि कड़े या पीले पत्तों से सब्जी का स्वाद कसैला हो सकता है।


















