सर्दियों के मौसम में अक्सर लोग अपने आंगन और बालकोनी को सजाने के लिए फूलों वाले पौधों का सहारा लेते हैं। कई बार बिना एक भी कली खिले केवल पत्तियों के अनोखे रंगों से ही घर की बगिया को बेहद खास अंदाज दिया जा सकता है। ऐसा ही एक अद्भुत पौधा ऑर्नामेंटल कैबेज यानी सजावटी पत्तागोभी है। इसकी पत्तियों में गुलाबी, बैंगनी, सफेद और हरे रंग की ऐसी छटा देखने को मिलती है कि दूर से देखने पर यह किसी खिले हुए बड़े गुलाब या गुलदस्ते जैसा प्रतीत होता है।
रंगों की अनोखी बनावट और प्राकृतिक आकर्षण
गार्डनर राम सागर के अनुसार, ऑर्नामेंटल कैबेज असल में पत्तागोभी की ही एक खास सजावटी किस्म है। इस पौधे की सबसे बड़ी विशेषता इसका पत्तेदार घेरा और उनमें भरने वाले चटख रंग हैं। पौधे के केंद्र यानी बीच वाले हिस्से में मौजूद पत्तियां गुलाबी, सफेद अथवा गहरे बैंगनी रंग की होती हैं, जबकि बाहरी हिस्से को घेरने वाली पत्तियां गहरे हरे रंग की परत बनाती हैं। इसका गोल और परतदार फैलाव इसे पूरी तरह किसी विशालकाय फूल जैसा रूप दे देता है। जैसे-जैसे वातावरण में ठंडक बढ़ती है, तापमान गिरने के साथ ही इन पत्तियों की रंगत और ज्यादा चमकदार तथा गाढ़ी होती चली जाती है।
गमला तैयार करने का सही तरीका और मिट्टी का मिश्रण
इस सजावटी पौधे को घर पर उगाना काफी सरल और सुविधाजनक है। इसे लगाने के लिए ऐसा गमला चुनना चाहिए जिसके तल में अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए उचित छेद मौजूद हो। मिट्टी तैयार करते समय सामान्य मिट्टी में थोड़ी मात्रा में खाद और रेत मिलाना बेहद जरूरी है। रेत मिलाने से मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और उसमें पानी ठहरता नहीं है, जिससे जड़ों के गलने का जोखिम खत्म हो जाता है। साथ ही संतुलित खाद पौधे को जरूरी पोषण प्रदान करती है।
बीज और पौध रोपने की विधि
इस पौधे को दो अलग-अलग तरीकों से उगाया जा सकता है। पहला तरीका नर्सरी से तैयार की गई छोटी पौध लाकर सीधे गमले में लगाना है। दूसरा तरीका इसके बीजों को बोकर नया पौधा तैयार करना है। यदि आप बीजों से शुरुआत कर रहे हैं, तो तैयार मिट्टी पर बीजों को हल्का सा दबा दें और ऊपर से नमी बनाए रखने के लिए पानी का हल्का छिड़काव करें। कुछ ही दिनों के भीतर बीज अंकुरित होकर नन्हे पौधे के रूप में बाहर आने लगते हैं।
धूप, सिंचाई और नियमित रखरखाव की जरूरतें
ऑर्नामेंटल कैबेज को धूप की अच्छी जरूरत होती है, इसलिए गमले को हमेशा ऐसे स्थान पर रखें जहां दिन भर में कम से कम 4 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलती रहे। जाड़े का मौसम इस पौधे के विकास के लिए सबसे मुफीद होता है, क्योंकि शीत लहर और गिरता पारा इसके रंगों को उभारता है। पौधे को स्वस्थ रखने के लिए समय-समय पर निचली सूखी या खराब हो चुकी पत्तियों को छांटकर अलग करते रहें। पानी देते वक्त यह ध्यान रखें कि गमले में पानी का भराव बिल्कुल न हो, क्योंकि अत्यधिक नमी, जरूरत से ज्यादा गर्मी और हानिकारक कीड़े पौधे को पूरी तरह बर्बाद कर सकते हैं।
कीटों से बचाव और शुरुआती लक्षण
यदि पौधे की पत्तियों पर बारीक सुराख नजर आने लगें अथवा किनारे पीले पड़कर सूखने लगें, तो यह संकेत है कि पौधा कीटों के हमले या अनुचित माहौल से प्रभावित हो रहा है। इसलिए रोजाना पत्तियों का बारीकी से मुआयना करते रहना चाहिए। उचित धूप, सही जलनिकासी वाली मिट्टी और नियमित निगरानी से पौधा अपनी पत्तियों को धीरे-धीरे चारों ओर फैलाता है और पूरा गमला एक सजीव पुष्प जैसा लगने लगता है।
सुंदर रूप लेने में लगने वाला समय
यदि आप नर्सरी से लाया हुआ छोटा पौधा गमले में लगाते हैं, तो उसे अपनी पत्तियों को पूरी तरह फैलाने और आकर्षक रूप लेने में करीब 2 से 4 सप्ताह का समय लगता है। वहीं, अगर पौधे को शुरुआत से बीज द्वारा उगाया जाए, तो उसे पूरी तरह खिलने और बड़ा होने में लगभग 10 से 14 सप्ताह लग सकते हैं। ठंड बढ़ने के साथ इसके पत्तों का जादू निखरता जाता है, जिससे बिना किसी पारंपरिक फूल के भी आप अपने आंगन को विविध रंगों से सजा सकते हैं।



















