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सहारनपुर में दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने की अनोखी पहल, सीख रहे डिजाइनर मोमबत्तियां बनानाजीवनशैली
3 नव॰ 2026, 7:24 pm (4 मिनट पहले)· 0

सहारनपुर में दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाने की अनोखी पहल, सीख रहे डिजाइनर मोमबत्तियां बनाना

सहारनपुर के शेखपुरा कदीम में दिव्यांगों को निशुल्क फैंसी और डिजाइनर कैंडल बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे घर बैठे कमाई कर सकें.

सहारनपुर में दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के मकसद से एक खास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम के जरिए दिव्यांग पुरुषों और महिलाओं को बिना किसी शुल्क के आधुनिक और फैंसी मोमबत्तियां तैयार करने का व्यावहारिक कौशल सिखाया जा रहा है, जिससे वे अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भर बन सकें.

शेखपुरा कदीम में निशुल्क प्रशिक्षण का आयोजन

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम गांव शेखपुरा कदीम में आयोजित किया गया है. पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान यानी आरएसईटीआई (RSETI) और इनेबल इंडिया की संयुक्त पहल से दिव्यांगों के लिए यह वर्कशॉप संचालित हो रही है. अमित कुमार चौबे ने इस बारे में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को अपने हुनर के दम पर आजीविका कमाने के सक्षम बनाना है.

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साधारण मोमबत्तियों से आगे, डिजाइनर और कलात्मक कैंडल का निर्माण

इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को केवल पारंपरिक या साधारण मोमबत्तियां बनाना ही नहीं सिखाया जा रहा, बल्कि वे सजावटी और कलात्मक कैंडल भी तैयार कर रहे हैं. प्रतिभागी यहां फूल, बॉल्स और कपल्स जैसे कई आकर्षक डिजाइनों की मोमबत्तियां बनाना सीख रहे हैं. इन खूबसूरत सजावटी मोमबत्तियों की होम डेकोरेशन और विभिन्न निजी व सार्वजनिक आयोजनों में काफी मांग रहती है.

होटलों और गिरजाघरों में फैंसी कैंडल की भारी मांग

प्रशिक्षक कुसुम कश्यप ने बताया कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अलग-अलग किस्म के वैक्स और जेल का इस्तेमाल करके बेहतरीन डिजाइन बनाना सिखाया जा रहा है. कुसुम कश्यप के अनुसार, ऐसी फैंसी मोमबत्तियों की मांग सामान्य घरों के अलावा गिरजाघरों, होटलों और रेस्टोरेंट में बड़े पैमाने पर देखने को मिलती है. इस कला को पूरी तरह सीखकर प्रतिभागी खुद का व्यवसाय शुरू करने की स्थिति में आ सकते हैं.

हुनर से बदली सोच, व्यवसाय शुरू करने का बढ़ा आत्मविश्वास

प्रशिक्षण सत्र में भाग ले रहीं रहमानी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले उनकी सोच थी कि मोमबत्ती बस एक या दो सामान्य प्रकार की ही होती है और उनकी कीमत भी बाजार में बेहद कम मिलती है. हालांकि, इस ट्रेनिंग में शामिल होने के बाद उन्होंने तरह-तरह की डिजाइनर कैंडल तैयार करना सीखा. अब उन्हें पूरा भरोसा हो रहा है कि इस हुनर को एक लाभकारी कारोबार के रूप में आगे ले जाया जा सकता है.

घर बैठे काम और ऑनलाइन बिक्री के गुर भी सिखाए जा रहे

अमित कुमार चौबे ने आगे बताया कि इस प्रशिक्षण का एक बड़ा लक्ष्य यह भी है कि दिव्यांग लोग घर पर रहकर ही अपना काम कर सकें और आय अर्जित करें. मोमबत्ती निर्माण की बारीकियों के साथ-साथ प्रतिभागियों को उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री करने की प्रक्रिया भी समझाई जा रही है. इससे वे अपने तैयार उत्पादों को सीधे व्यापक बाजार तक पहुंचाकर अपने नए हुनर को एक सफल व्यवसाय में तब्दील कर पाएंगे.

सवाल-जवाब

सहारनपुर में दिव्यांगों के लिए यह प्रशिक्षण कहां आयोजित किया जा रहा है?
यह निशुल्क प्रशिक्षण सहारनपुर जिले के गांव शेखपुरा कदीम में आयोजित किया जा रहा है.
यह मोमबत्ती प्रशिक्षण कार्यक्रम किन संस्थानों द्वारा चलाया जा रहा है?
यह कार्यक्रम पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) और इनेबल इंडिया के संयुक्त सहयोग से चलाया जा रहा है.
कार्यशाला में प्रतिभागियों को किस तरह की मोमबत्तियां बनाना सिखाया जा रहा है?
प्रतिभागियों को सामान्य मोमबत्तियों के अलावा फूल, बॉल्स और कपल्स जैसे कई आकर्षक डिजाइनों की फैंसी व जेल कैंडल बनाना सिखाया जा रहा है.
ट्रेनर कुसुम कश्यप के अनुसार इन फैंसी मोमबत्तियों की मांग कहां अधिक रहती है?
कुसुम कश्यप के अनुसार इन सजावटी और फैंसी मोमबत्तियों की मांग गिरजाघरों, होटलों और रेस्टोरेंट में काफी अधिक रहती है.
मोमबत्ती बनाने के अलावा प्रतिभागियों को और क्या सिखाया जा रहा है?
मोमबत्ती निर्माण के अलावा प्रतिभागियों को तैयार उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री करने की प्रक्रिया भी सिखाई जा रही है.
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