गुरुग्राम में कैब किराये के विवाद पर महिला इंजीनियर से बदसलूकी और धमकी, पुलिस ने आरोपी चालक यासिर को पकड़ाताइवान की उड़ानों पर पाकिस्तान ने लगाया हवाई प्रतिबंध, बीजिंग की वन चाइना नीति के समर्थन में उठाया कदमत्योहारी सीजन से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में ठहराव, जानें दिल्ली समेत देशभर के ताजा भावबिना इंटरनेट भी डिजाइन बना सकेंगे कैनवा यूजर्स, जारी हुआ नया ऑफलाइन फीचरकुल्लू की स्यांज घाटी में कार 150 फीट गहरी खाई में गिरी, 20 वर्षीय युवक की मौतकरनाल के सुशांत ने अनोखे आचार और मोटे अनाज के स्नैक्स से खड़ा किया नया कारोबार, हर माह 40 हजार रुपये तक की बचतशनिवार को चमका सोना, तनिष्क, कल्याण और मालाबार में 24K और 22K के ताजा भाव देखेंआईटी और रिलायंस पर बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स 352 अंक लुढ़ककर 73,246 पर फिसलाइंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE मेन 2027 के पहले चरण की पंजीकरण खिड़की खुली, समय सारिणी और दिशा-निर्देश जारीकरवा माता के प्रसाद के लिए ऐसे बनाएं पारंपरिक चावल के फरे, आसान तरीके से सीखें पूरी विधि
शादी के पहले साल में नवविवाहित महिलाओं को नहीं करने चाहिए ये पांच काम, जीवन में आ सकती हैं मुश्किलेंजीवनशैली
23 अग॰ 2026, 9:38 am (67 दिन पहले)· 4

शादी के पहले साल में नवविवाहित महिलाओं को नहीं करने चाहिए ये पांच काम, जीवन में आ सकती हैं मुश्किलें

हिंदू धर्म में शादी के बाद के पहले साल को बेहद खास माना गया है। इस दौरान वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाए रखने और नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए महिलाओं को कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

हिंदू धर्म में विवाह को केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कारों का एक पवित्र बंधन माना जाता है। शादी के बाद का पहला वर्ष किसी भी नवविवाहित जोड़े के जीवन में सबसे खास और संवेदनशील समय होता है, क्योंकि इस दौरान कई तरह की रस्में और परंपराएं निभाई जाती हैं। सनातन संस्कृति और लोक मान्यताओं के अनुसार, इस शुरुआती अवधि में कुछ ऐसे विशेष नियमों का पालन करने की बात कही गई है, जिन्हें नजरअंदाज करने से वैवाहिक जीवन में कठिनाइयां आ सकती हैं। परिवार के बुजुर्ग अक्सर मायके और ससुराल पक्ष के इन पारंपरिक दिशा-निर्देशों से नई बहू को अवगत करा देते हैं। आइए जानते हैं कि शादी के पहले साल में महिलाओं को किन पांच बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बाल कटवाने से दूरी

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नवविवाहित महिलाओं को विवाह के पश्चात कम से कम एक वर्ष तक अपने बाल कटवाने से परहेज करना चाहिए। इसके पीछे यह विचार है कि लंबे और स्वस्थ बालों को स्त्री के सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान महिलाओं को अपने बालों की अतिरिक्त देखभाल करने की सलाह दी जाती है ताकि उनका रूप और ऊर्जा दोनों सकारात्मक बने रहें।

ये भी पढ़ें

शोक और मृत्यु भोज कार्यक्रमों में जाने से परहेज

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शादी के पहले साल में महिलाओं को मृत्यु भोज, दशमी या तेरहवीं जैसे शोक कार्यक्रमों में शामिल होने से बचना चाहिए। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह है कि विवाह के बाद का समय नए जोड़े के गृहस्थ जीवन की एक सकारात्मक शुरुआत का होता है, और ऐसे माहौल से दूरी रखना आवश्यक है। कई परिवारों में यह भी माना जाता है कि नवविवाहिता को किसी करीबी के दाह संस्कार में भी शामिल नहीं होना चाहिए, ताकि वे किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित रहें।

सिंदूर लगाते समय बरतें विशेष सावधानी

भारतीय संस्कृति में सिंदूर को स्त्री के सुहाग और अखंड सौभाग्य का सबसे बड़ा प्रतीक माना गया है। इसलिए यह मान्यता है कि शादी के पहले साल तक कभी भी गीले बालों में सिंदूर नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा, विवाह के समय जो सिंदूर मिला था, पहले साल उसी का उपयोग करना चाहिए। जब वह सिंदूर समाप्त हो जाए, तभी नया सिंदूर इस्तेमाल में लाया जाना चाहिए।

मायके से मिली साड़ियों का रखें ध्यान

लोक मान्यताओं के अनुसार, विवाह के बाद मायके से आई हुई साड़ियों को शुभता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसलिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वे साड़ियां कहीं से भी जले, कटे या फटे नहीं, क्योंकि इन्हें सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। शादी के पहले साल में मायके से मिली साड़ियों का ही उपयोग करने की सलाह दी जाती है और इस दौरान अपनी तरफ से कोई नई साड़ी न तो खरीदनी चाहिए और न ही पहननी चाहिए।

नदी के पास जाने से बचें

पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर, कई क्षेत्रों में नवविवाहित जोड़ों को शादी के एक साल तक किसी भी नदी के पास जाने या नदी पार करने से बचने के लिए कहा जाता है। हालांकि शास्त्रों में इसका कोई कड़ा निषेध नहीं है, लेकिन स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार इसे माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि विवाह के शुरुआती समय में दूल्हा और दुल्हन का औरा काफी संवेदनशील होता है, और नदी के किनारे या श्मशान के आसपास नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है जो नवदंपती को प्रभावित कर सकता है।

सवाल-जवाब

शादी के पहले साल में महिलाओं को बाल क्यों नहीं कटवाने चाहिए?
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार लंबे बालों को स्त्री के सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पहले साल बाल काटने से बचने की सलाह दी जाती है।
क्या नवविवाहित महिलाओं को मृत्यु भोज में जाना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवविवाहित महिलाओं को शादी के पहले साल मृत्यु भोज या तेरहवीं जैसे शोक कार्यक्रमों में जाने से बचना चाहिए।
सिंदूर लगाते समय पहले साल क्या सावधानी रखनी चाहिए?
मान्यता है कि शादी के पहले साल गीले बालों में सिंदूर नहीं लगाना चाहिए और विवाह के समय मिला सिंदूर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
मायके से आई साड़ियों को लेकर क्या नियम है?
शादी के पहले साल मायके से मिली साड़ियों का ही उपयोग करना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि वे कटे-फटे न हों।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp