चिकन, मटन और मछली की तरह ही दुनिया भर में सीफूड खाने के शौकीनों की एक बहुत बड़ी तादाद है। जब बात सीफूड की आती है, तो अधिकतर लोग अपनी प्लेट में श्रिम्प और प्रॉन्स को शामिल करना बेहद पसंद करते हैं। आमतौर पर भारत में इन दोनों को ही बोलचाल की भाषा में झींगा मछली कह दिया जाता है, जिसके कारण कई लोग इन्हें एक ही जीव समझ बैठते हैं। हालांकि, बाहरी रूप से एक जैसे दिखने वाले इन दोनों जीवों में कई बड़े अंतर होते हैं। इनके रंग-रूप, शारीरिक बनावट, आकार, स्वाद, कीमत और रहने के परिवेश में जमीन-आसमान का फर्क होता है। यदि आप भी अब तक इन दोनों के बीच के बुनियादी अंतर को लेकर असमंजस में थे, तो आइए विस्तार से जानते हैं कि ये दोनों एक-दूसरे से किस तरह अलग हैं और सेहत के लिए इनके क्या फायदे हैं।
वैज्ञानिक सच: ये मछली नहीं हैं
सबसे पहले इन दोनों जीवों के बारे में एक बड़ा भ्रम दूर करना जरूरी है। भले ही आम बोलचाल में लोग इन्हें झींगा मछली कहते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ये दोनों ही मछलियां नहीं हैं। असल में ये पानी में रहने वाले कवचधारी जीव हैं, जिन्हें विज्ञान की भाषा में क्रस्टेशियन कहा जाता है। इनका शरीर एक कड़े सुरक्षात्मक कवच से ढका होता है, जो इन्हें साधारण मछलियों से पूरी तरह अलग श्रेणी में रखता है।
भारत के विभिन्न राज्यों में इनके स्थानीय नाम
विविधताओं से भरे भारत में इन जीवों को अलग-अलग राज्यों में स्थानीय भाषाओं के अनुसार अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। हिंदी भाषी क्षेत्रों में जहां इन्हें झींग या झींगा कहा जाता है, वहीं बंगाली संस्कृति और रसोई में इसे चिंगड़ी के नाम से पहचान मिली है। गुजरात में जाने पर लोग इसे झींगो कहते हैं, जबकि कर्नाटक में कन्नड़ भाषा बोलने वाले लोग इसे सीगड़ी कहकर पुकारते हैं। यह भाषाई विविधता दर्शाती है कि देश के अलग-अलग तटीय क्षेत्रों में यह जीव कितना लोकप्रिय है।
शारीरिक बनावट और आकार का अंतर
श्रिम्प और प्रॉन्स को पहचानने का सबसे पहला और आसान तरीका उनका आकार माना जाता है, हालांकि यह हमेशा पूरी तरह सही नहीं होता। सामान्य तौर पर प्रॉन्स का आकार श्रिम्प से काफी बड़ा होता है, जबकि श्रिम्प छोटे आकार की होती हैं। लेकिन कई बार कुछ खास प्रजातियों की श्रिम्प भी काफी बड़ी हो सकती हैं। आकार से अलग, इनके शरीर की बनावट से इन्हें ज्यादा सटीक तरीके से पहचाना जा सकता है। प्रॉन्स के शरीर की बनावट अपेक्षाकृत काफी सीधी होती है। इसके विपरीत, श्रिम्प के शरीर में अधिक घुमाव यानी कर्व्स देखने को मिलते हैं। इनके गिल्स (गलफड़ों), पैरों की संख्या और शरीर के अन्य हिस्सों की सूक्ष्म संरचना में भी वैज्ञानिक तौर पर काफी अंतर होता है।
खारा पानी बनाम मीठा पानी: इनका निवास स्थान
इन दोनों जीवों के बीच का एक और सबसे बड़ा अंतर वह पानी है जिसमें ये रहते हैं। अधिकांश श्रिम्प खारे पानी (सॉल्ट वॉटर) में रहना पसंद करती हैं। ये मुख्य रूप से समुद्रों, महासागरों और खाड़ियों के पानी में पाई जाती हैं। इसके विपरीत, अधिकांश प्रॉन्स मीठे पानी (फ्रेश वॉटर) के निवासी होते हैं, जो नदियों, झीलों, तालाबों और नहरों में बहुतायत में मिलते हैं। हालांकि प्रकृति में इसके अपवाद भी मौजूद हैं। कुछ विशेष प्रकार की श्रिम्प मीठे पानी में भी जीवित रह सकती हैं, और कुछ प्रजातियों के प्रॉन्स खारे पानी में भी मिल जाते हैं। इसके बावजूद, व्यावसायिक स्तर पर मिलने वाली ज्यादातर श्रिम्प समुद्री पानी की ही होती हैं और प्रॉन्स मीठे पानी के होते हैं।
स्वाद और सुगंध में भिन्नता
अपने अलग-अलग प्राकृतिक परिवेश के कारण इन दोनों के स्वाद में भी साफ अंतर महसूस किया जा सकता है। चूंकि प्रॉन्स मीठे और ताजे पानी में पाए जाते हैं, इसलिए इनका स्वाद अधिक मीठा, ताजा और सौम्य होता है। इनका मांस काफी रसीला और नरम महसूस होता है। वहीं दूसरी ओर, श्रिम्प समुद्री पानी में रहने के कारण प्राकृतिक रूप से थोड़े नमकीन और सेवरी फ्लेवर वाले होते हैं। उनका यह नमकीन स्वाद कई तरह के व्यंजनों में एक अनोखा और तीखा जायका जोड़ता है।
सेहत के लिहाज से कौन है अधिक फायदेमंद?
चाहे श्रिम्प हो या प्रॉन्स, सेहत और पोषण के मामले में दोनों ही बेमिसाल हैं। दोनों ही जीवों में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, जरूरी विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन B12, सेलेनियम और आयोडीन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व भारी मात्रा में मौजूद होते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इन दोनों में ही कैलोरी और फैट की मात्रा बहुत कम होती है, जो इन्हें वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाती है। हालांकि, जिन लोगों को सीफूड से किसी भी प्रकार की एलर्जी है, उन्हें इनके सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए।
श्रिम्प के फायदे: वजन घटाने और कोशिकाओं की सुरक्षा में मददगार
जो लोग अपने शरीर का वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए श्रिम्प का सेवन बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें कैलोरी की मात्रा बेहद कम और प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है। यह शरीर की मांसपेशियों के विकास, उनकी मजबूती और मरम्मत के लिए एक बेहतरीन आहार है। इसके अलावा, श्रिम्प में सेलेनियम के साथ-साथ एस्टाक्सैंथिन नाम का एक बेहद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को बाहरी नुकसान से बचाने और शरीर में सूजन को कम करने में बड़ी भूमिका निभाता है।
प्रॉन्स के फायदे: हड्डियों और हृदय को रखें मजबूत
प्रॉन्स भी पोषक तत्वों के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। इसमें प्रोटीन के साथ-साथ विटामिन B12 और फॉस्फोरस की अच्छी-खासी मात्रा पाई जाती है। ये तत्व हमारी हड्डियों को मजबूत बनाने और तंत्रिका तंत्र को दुरुस्त रखने का काम करते हैं। प्रॉन्स में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल की सेहत के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। हालांकि, एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि श्रिम्प और प्रॉन्स दोनों में ही प्राकृतिक रूप से कोलेस्ट्रॉल का स्तर थोड़ा अधिक होता है, भले ही इनमें सैचुरेटेड फैट कम हो। इसलिए, यदि कोई व्यक्ति पहले से ही हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित है, तो उसे डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के बाद ही इन्हें अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।













