सोने अथवा चांदी के गहनों की खरीदारी करते वक्त खरीदार आम तौर पर केवल आभूषण की चमक, बनावट, डिजाइन और वजन पर ही अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। कई बार लोग हॉलमार्क का साधारण सा प्रतीक देखकर यह मान बैठते हैं कि उत्पाद पूरी तरह खरा है। हालांकि हकीकत इससे काफी अलग हो सकती है, क्योंकि सिर्फ एक लोगो की मौजूदगी शुद्धता की मुकम्मल गारंटी नहीं देती। भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस ने स्वर्ण आभूषणों की गुणवत्ता जांच और हॉलमार्किंग को लेकर सख्त नियम कायदे बना रखे हैं। जब तक ग्राहक इन तकनीकी पैमानों को खुद परखना नहीं सीखेंगे, तब तक मिलावट अथवा धोखाधड़ी का जोखिम लगातार बना रहेगा।
दुकान के बाहर लगे सरकारी लोगो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें
अक्सर देखा जाता है कि कई खुदरा दुकानों के बोर्ड अथवा शीशों पर बीआईएस का आधिकारिक चिह्न अंकित रहता है। खरीदार इसे देखते ही मान लेते हैं कि संबंधित शोरूम पूरी तरह मान्यता प्राप्त और प्रमाणित है। इस संदर्भ में पाटलिपुत्र सर्राफा संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने एक अहम पहलू साझा किया है। उनके अनुसार बाजार में मौजूद कुल आभूषण दुकानों में से बीआईएस के साथ पंजीकृत प्रतिष्ठानों का अनुपात 50 प्रतिशत से भी कम बना हुआ है। यानी आधी से अधिक दुकानें अब भी औपचारिक मानकों के दायरे से बाहर काम कर रही हैं।
इसी वजह से विनोद कुमार ने सुझाव दिया है कि किसी भी प्रतिष्ठान को केवल बाहर टंगे प्रतीक के आधार पर अधिकृत न माना जाए। खरीदार को दुकान के अंदर जाकर वहां लगा पंजीकरण प्रमाणपत्र ध्यान से देखना चाहिए। बीआईएस के स्थापित प्रावधानों के तहत प्रत्येक पंजीकृत आभूषण केंद्र को अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट परिसर में ऐसी प्रमुख जगह लगाना अनिवार्य होता है, जहां हर आने वाले की नजर आसानी से पड़ सके। यदि दुकान में यह दस्तावेज सामने प्रदर्शित नहीं है, तो खरीदारी से पहले सवाल पूछना ग्राहक का अधिकार है।
शोरूम में प्रदर्शित नियमों और अधिकारों वाले ब्रोशर जरूर पढ़ें
नियमों की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मानक ब्यूरो की ओर से पंजीकृत ज्वैलर्स को आधिकारिक पैम्फलेट और सूचना पत्रक भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इन दस्तावेजों में हॉलमार्किंग के तौर तरीके, उपभोक्ता अधिकार और सुरक्षा से जुड़े बिंदु स्पष्ट लिखे होते हैं। नियमों के मुताबिक प्रत्येक अधिकृत दुकानदार के लिए इन सूचना पत्रकों को ग्राहकों की पहुंच में रखना जरूरी होता है। लेन देन पक्का करने से पहले इन पर्चों को पढ़कर खरीदार अपने कानूनी अधिकारों और आभूषण की प्रामाणिकता की शर्तें भली भांति समझ सकते हैं।
आभूषण पर बने अल्फान्यूमेरिक विशिष्ट कोड की अनिवार्य जांच
सोने के किसी भी गहने पर केवल पारंपरिक मुहर देखना काफी नहीं होता। उसके साथ छह अंकों वाला हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID अंकित होना चाहिए। यह एक विशेष अल्फान्यूमेरिक पहचान संख्या होती है, जो हर एक गहने को एक अलग और विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। विनोद कुमार के अनुसार खरीदारों को कोई भी रकम चुकाने से पहले यह अच्छी तरह देख लेना चाहिए कि आभूषण पर स्पष्ट रूप से HUID कोड छपा है अथवा नहीं। सामान्य हॉलमार्क के प्रतीक की तुलना में यह अनोखी अल्फान्यूमेरिक संख्या असली सोने की पहचान का सबसे ठोस प्रमाण मानी जाती है।
मोबाइल फोन के जरिए करें घर बैठे शुद्धता की पड़ताल
आभूषण की शुद्धता की पुष्टि के लिए अब पूरी तरह सुनार के दावों पर आश्रित रहने की लाचारी समाप्त हो चुकी है। भारतीय मानक ब्यूरो ने उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए बीआईएस केयर ऐप नाम से एक डिजिटल मंच तैयार किया है। कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन में इसे डाउनलोड करके उपयोग में ला सकता है। आभूषण पर उकेरा गया HUID कोड इस ऐप में दर्ज करते ही उस उत्पाद से जुड़ा सारा रिकॉर्ड स्क्रीन पर सामने आ जाता है।
यदि संबंधित जेवर वैध हॉलमार्किंग प्रणाली के तहत दर्ज है, तो ऐप पर उसकी सटीक शुद्धता, उसका वजन और प्रमाणन से जुड़ी दूसरी सभी जानकारियां खुलकर सामने आ जाएंगी। इससे खरीदार यह मिलान कर सकता है कि बिल पर लिखी बातें और दुकानदार द्वारा बताया गया विवरण सरकारी डेटाबेस से मेल खाता है या नहीं।
अब डिजिटल रिकॉर्ड में आभूषण का चित्र भी शामिल
नकली गहनों के प्रसार को रोकने और व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए तकनीक का दायरा बढ़ाया गया है। विनोद कुमार ने रेखांकित किया कि नए हॉलमार्क वाले आभूषणों के डिजिटल डेटा में अब संबंधित जेवर की वास्तविक तस्वीर भी जोड़ी जा रही है। इसका सीधा फायदा यह है कि खरीदार ऐप में केवल संख्या या तकनीकी आंकड़े देखकर ही संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि अपने हाथ में मौजूद जेवर के डिजाइन और स्वरूप का मिलान ऐप में दिख रही आधिकारिक फोटो से भी कर सकेंगे। इससे एक ही कोड को किसी दूसरे जेवर पर चिपकाने की धोखाधड़ी पर पूरी तरह लगाम लगती है।
सस्ते दामों और भारी छूट के प्रलोभन से बचें
खरीदारी के दौरान सबसे बड़ी चूक जल्दबाजी और जरूरत से ज्यादा छूट के फेर में पड़ती है। विनोद कुमार ने चेताया कि हालांकि नियामक संस्थाओं की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम सतर्कता ग्राहक की अपनी समझ पर निर्भर करती है। अक्सर लोग आकर्षक विज्ञापनों, असाधारण छूट अथवा बाजार से सस्ते भाव के लालच में आकर बिना जांचे परखे गहने खरीद लेते हैं। यही वह स्थिति होती है जहां मिलावटी धातु थमाए जाने की गुंजाइश सबसे अधिक होती है। किसी भी प्रलोभन में आने के बजाय दुकान का आधिकारिक प्रमाणपत्र, आभूषण पर हॉलमार्क मुहर और HUID कोड की तसल्ली करना ही आर्थिक नुकसान से बचने का एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।



















