वैश्विक कमोडिटी बाजारों में कीमती धातुओं ने अक्टूबर महीने की तीव्र बिकवाली के दबाव से उबरते हुए मजबूती के साथ वापसी की है। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोने और चांदी दोनों के भावों में तेजी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी नरमी रही। ऊर्जा लागत घटने से मुद्रास्फीति के दबाव कम होने और भविष्य में मौद्रिक सख्ती की आशंकाएं कुछ हद तक शांत होने से निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली धातुओं की ओर मुड़ा है। इस ताजा बढ़त ने दोनों धातुओं को उनके एक साल के निचले स्तरों से बाहर निकलने में अहम मदद दी है।
सोने और चांदी के भावों में उछाल
हाजिर सोना लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 3,900 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास पहुंच गया। इससे ठीक पहले के कारोबारी सत्रों में सोना अपने एक साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका था। ऊर्जा से जुड़ी महंगाई की चिंताओं के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं तेज हो गई थीं, जिसने सोने की कीमतों पर भारी दबाव बनाया हुआ था। तेल के दामों में गिरावट से महंगाई को लेकर उपजी घबराहट में राहत मिली और हाजिर बाजार में लिवाली का नया दौर शुरू हुआ।
चांदी की कीमतों में सोने से भी अधिक तेज उछाल देखने को मिला। हाजिर चांदी का भाव करीब 2 प्रतिशत उछलकर 49.75 डॉलर प्रति औंस के स्तर के नजदीक पहुंच गया। चांदी भी पिछले सप्ताह एक साल के निचले स्तर तक लुढ़क गई थी। औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश दोनों प्रकृति वाली यह धातु पिछले कई सत्रों से भारी बिकवाली का सामना कर रही थी, लेकिन अब कच्चे तेल की नरमी से इसे भी मजबूत सहारा मिला है और निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी तेज की है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर
कीमती धातुओं के इस हालिया सुधार को सबसे बड़ा सहारा कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में आई गिरावट से मिला। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 3 प्रतिशत टूटकर लगभग 101 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इसी तरह ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव में 2.7 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करने लगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऊर्जा-प्रेरित मुद्रास्फीति का खतरा पैदा कर रखा था, जो केंद्रीय बैंकों को सख्त मौद्रिक रुख अपनाने पर मजबूर कर रहा था।
तेल बाजार में यह गिरावट ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच कूटनीतिक वार्ताओं के संकेतों के बीच आई है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ नए सिरे से संभावित सैन्य कार्रवाई को टालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने मतदान के बाद ईरान पर हमलों को दोबारा शुरू करने की चेतावनी दी थी, जिसके जवाब में तेहरान ने भी बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इन राजनयिक वार्ताओं के चलते पश्चिम एशिया से जुड़े तनाव में तात्कालिक नरमी की उम्मीद बनी, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर उपजी घबराहट कम हुई और दामों में गिरावट आई।
फेडरल रिजर्व की नीति और रोजगार के आंकड़ों पर नजर
बाजार के प्रतिभागी अब अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो इस सप्ताह जारी होने वाली है। यह रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के आगामी मौद्रिक नीतिगत रुख को समझने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। मौजूदा समय में वित्तीय बाजार दिसंबर के महीने में केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग 75 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं। पिछले सप्ताह तक ऊर्जा-प्रेरित महंगाई के लगातार बने रहने से ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की धारणा काफी मजबूत थी, जिसने सोने और चांदी दोनों पर भारी बिकवाली का दबाव बना दिया था।
इसके अलावा पिछले दिनों वैश्विक इक्विटी बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी चिंताओं के कारण तेज गिरावट आई थी। शेयरों में भारी बिकवाली और घाटे की भरपाई के लिए कई संस्थागत निवेशकों को अपने सोने और चांदी के होल्डिंग्स को मजबूरन बेचना पड़ा था। इस तरह के मार्जिन कॉल और अन्य संपत्तियों के नुकसान को पाटने के लिए की गई बिकवाली ने कीमती धातुओं को अतिरिक्त दबाव में धकेला था। अब तेल की कीमतों में सुधार और बाजार में आई स्थिरता से निवेशक धीरे-धीरे कीमती धातुओं में अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित कर रहे हैं।


















