डेयरी और पशुपालन में मवेशियों को सबसे अधिक परेशानी कीड़े, मक्खियों और मच्छरों के प्रकोप से झेलनी पड़ती है। इन कीटों के लगातार काटने और डंक मारने के कारण पशु बेचैन रहते हैं और कई बार गंभीर संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। आमतौर पर पशुपालक इनसे निपटने के लिए बाजार से महंगे केमिकल युक्त पाउडर या स्प्रे खरीदकर लाते हैं, लेकिन यह रासायनिक उत्पाद पशुओं के स्वास्थ्य और उनकी त्वचा के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इन समस्याओं से बचाने के लिए घर पर ही प्राकृतिक और देसी तरीके से ऐसा स्प्रे तैयार किया जा सकता है, जो बिना किसी खर्च के मात्र 10 से 15 मिनट में बनकर तैयार हो जाता है। यह देसी उपाय न सिर्फ कीटों को भगाता है बल्कि पशुओं की त्वचा को भी पूरी तरह सुरक्षित रखता है।
सामग्री और पत्तों का अनुपात
मिर्जापुर के पशुपालक गगन उपाध्याय ने इस देसी स्प्रे को बनाने की पूरी प्रक्रिया साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घर पर तैयार होने वाले इस हर्बल लिक्विड के लिए मुख्य रूप से नीम और तुलसी की पत्तियों की आवश्यकता होती है। अगर आप सामान्य मात्रा में स्प्रे तैयार करना चाहते हैं, तो लगभग एक मुट्ठी ताजी तुलसी और एक मुट्ठी नीम के पत्ते पर्याप्त होते हैं। वहीं यदि किसी को एक बड़ी स्प्रे बोतल भरकर घोल तैयार करना है, तो उसके लिए करीब 250 ग्राम पत्तियों का उपयोग करना सही रहता है। इन दोनों औषधीय पौधों के प्राकृतिक गुण कीटों को दूर रखने में बेहद कारगर माने जाते हैं।
उबालने और छानने का सरल तरीका
इस स्प्रे को तैयार करने की विधि बेहद आसान है। सबसे पहले एक बर्तन या भगोना लें और उसमें आवश्यकतानुसार पानी भरें। पानी की मात्रा इतनी रखी जानी चाहिए कि नीम और तुलसी के पत्ते उसमें पूरी तरह से डूब जाएं। इसके बाद पत्तियों को पानी में डालकर चूल्हे या गैस पर अच्छी तरह गर्म करें। इस मिश्रण को तब तक पकाना है जब तक कि पानी में पूरी तरह से उबाल न आ जाए। उबाल आने के बाद बर्तन को आंच से उतारकर सामान्य तापमान पर ठंडा होने के लिए रख दें। जब यह काढ़ा ठंडा हो जाए, तो एक छन्नी के सहारे पत्तियों को छानकर अलग कर लें। छनने के बाद जो पानी बचता है, वही पशुओं के लिए असरदार प्राकृतिक स्प्रे है।
छिड़काव का तरीका और इसके फायदे
तैयार हुए इस औषधीय पानी को किसी भी साधारण स्प्रे बोतल में भर लें। इसके बाद इसे पशुओं के शरीर पर ऊपर से आसानी से छिड़का जा सकता है। गगन उपाध्याय के अनुसार इस प्राकृतिक तरल की कोई निश्चित एक्सपायरी डेट नहीं होती है, इसलिए जब तक यह बोतल में समाप्त न हो जाए, तब तक इसका नियमित इस्तेमाल बेझिझक किया जा सकता है। तुलसी और नीम के पत्तों के अर्क से निकलने वाली तेज प्राकृतिक महक के कारण मक्खियां और मच्छर पशुओं के पास नहीं फटकते हैं और न ही उन्हें काट पाते हैं। इससे पशु शांत और सुरक्षित रहते हैं, जिससे वे कीट-जनित गंभीर बीमारियों से भी बचे रहते हैं।



















