बढ़ती आबादी और शहरीकरण की रफ्तार के साथ ही जमीन की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जिससे आम लोगों के लिए बड़े भूखंड खरीदना काफी कठिन होता जा रहा है। छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक लोग अपनी बचत के अनुसार सीमित आकार के प्लॉट लेने पर मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह सामने आती है कि सीमित क्षेत्रफल में किस प्रकार निर्माण कराया जाए ताकि घर खुला, हवादार और रहने लायक बन सके। जगह के समुचित उपयोग और एक व्यवस्थित घर की नींव रखने के लिए निर्माण शुरू करने से पहले एक कुशल नक्शानवीस या विशेषज्ञ की देखरेख में लेआउट तैयार कराना बेहद जरूरी कदम माना जाता है।
नक्शा बनवाने से पहले विशेषज्ञता परखना जरूरी
किसी भी शहर में निर्माण से जुड़े कई पेशेवर मिल जाते हैं, लेकिन निर्माण कार्य सौंपने से पूर्व उनके पुराने प्रोजेक्ट्स और व्यावहारिक समझ की जांच कर लेनी चाहिए। बिहार के जहानाबाद जिले में जिला मुख्यालय स्थित औद्योगिक क्षेत्र (BIARDA) के सामने कार्यालय चलाने वाले चंचल प्रजापति पिछले 20 वर्षों से भूखंडों के नक्शे तैयार करने का कार्य कर रहे हैं। लंबे अनुभव के आधार पर वे बताते हैं कि यदि जमीन का आकार सुव्यवस्थित हो, तो सीमित दायरे में भी एक बेहतरीन आवासीय ढांचा खड़ा किया जा सकता है। जमीन की वास्तविक स्थिति और माप की पड़ताल किए बिना खींचा गया खाका कई बार निर्माण के दौरान दिक्कतों का कारण बन जाता है।
वर्गाकार भूखंड और वास्तु के नियम
सटीक प्लानिंग के लिए जमीन का समरूप आकार काफी मददगार साबित होता है। यदि भूखंड की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात संतुलित हो अथवा वह वर्गाकार हो, तो कमरों और खाली स्थानों का विभाजन बेहद सुगमता से हो जाता है। क्षेत्रीय माप के अनुसार आधा कट्ठा जमीन लगभग 680 स्क्वायर फीट के बराबर बैठती है। यदि कोई व्यक्ति वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुरूप निर्माण करना चाहता है, तो उसे दिशाओं के संतुलन का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इसके तहत पूरब और पश्चिम दिशा की लंबाई अपेक्षाकृत कम तथा उत्तर और दक्षिण दिशा की लंबाई अधिक रखी जाती है, जिससे प्राकृतिक रोशनी और हवा का आवागमन अनुकूल बना रहे।
कमरों का सटीक आकार और लेआउट
आधा कट्ठा यानी 680 स्क्वायर फीट के दायरे में दो कमरों वाला एक व्यवस्थित फ्लैट आसानी से निकाला जा सकता है। चंचल प्रजापति के अनुसार इस क्षेत्रफल में दो कमरे, वॉशरूम, हवादार किचन, डाइनिंग हॉल और सीढ़ियों का समुचित समायोजन संभव है। लेआउट के तहत दोनों कमरे 10 गुणा 10 फीट के बनाए जा सकते हैं, जबकि किचन के लिए 8 गुणा 7 फीट का स्थान पर्याप्त रहता है। इसके साथ ही 10 गुणा 8 फीट का डाइनिंग हॉल और 6 इंच के राइजर/स्ट्रे वाली सीढ़ियां व्यवस्थित की जा सकती हैं। इस प्रकार की संरचना में हर हिस्से का पूरा उपयोग होता है और संकरेपन का अहसास नहीं होता।
निर्माण लागत और बजट का पूरा ब्योरा
छोटे भूखंड पर निर्माण कराने वाले परिवारों के लिए बजट का प्रबंधन भी एक प्रमुख पहलू होता है। 1800 रुपये प्रति स्क्वायर फीट की निर्माण दर के आधार पर इस आकार के घर को पूरी तरह से फिनिशिंग के साथ तैयार करने पर कम से कम 12 लाख रुपये का कुल खर्च आता है। वहीं यदि कोई व्यक्ति शुरुआती दौर में केवल बुनियादी ढांचा खड़ा करना चाहता है, तो प्लास्टर, पेंट, टाइल्स और मार्बल के बिना लगभग 7 लाख रुपये में मकान का ढांचा तैयार किया जा सकता है। इस तरह स्पष्ट वित्तीय आकलन के साथ छोटे रकबे में भी एक मजबूत और सुंदर आवास का सपना पूरा किया जा सकता है।



















