अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौता ज्ञापन पर दस्तखत हुए हैं, जिससे पश्चिम एशिया में महीनों से चल रहे सैन्य टकराव पर विराम लगने की उम्मीद जगी है। इस घटनाक्रम के बाद होरमुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने का रास्ता भी साफ होता दिख रहा है, जो दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति लाइनों में गिना जाता है।
समझौते से पहले का घटनाक्रम
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से सैन्य टकराव चल रहा था, जिसकी आंच पूरे पश्चिम एशिया तक पहुंच गई थी। इसी तनाव के चलते होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ा था, क्योंकि दुनिया के कुल तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। ताजा समझौता ज्ञापन को इसी टकराव को थामने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ट्रंप का दावा, तेहरान का इनकार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अब उच्चतम स्तर के परमाणु निरीक्षण के लिए राजी हो गया है। हालांकि तेहरान ने इस दावे पर अपना अलग रुख रखा है। तेहरान का कहना है कि हाल की बमबारी में तबाह हुए परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यानी समझौते के बावजूद परमाणु निरीक्षण को लेकर दोनों पक्षों के बीच अब भी मतभेद बरकरार हैं।
इजरायल को जेडी वेंस की सख्त चेतावनी, हिज्बुल्लाह ने बताया जीत
खबरों के मुताबिक इस समझौते के बीच जेडी वेंस ने इजरायल को सख्त हिदायत दी है। वहीं दूसरी ओर हिज्बुल्लाह ने अमेरिका-ईरान समझौते को अपनी बड़ी जीत करार दिया और इजरायल को धमकी भी दी। लेबनान में हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासीम की ओर से आई यह प्रतिक्रिया नेतन्याहू को लेकर भी सामने आई है, जिससे साफ है कि इस समझौते के क्षेत्रीय समीकरणों पर भी गहरे असर पड़ रहे हैं।
भारत ने किया स्वागत, ऊर्जा आपूर्ति को मिलेगी मजबूती
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम का स्वागत किया है। भारत का कहना है कि अगर होरमुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलता है तो इससे उसकी ऊर्जा आपूर्ति को मजबूती मिलेगी। भारत अपनी तेल जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए पश्चिम एशिया से आयात पर निर्भर है, इसलिए इस जलमार्ग की सुरक्षा और सुचारू संचालन भारत के लिए सीधे तौर पर अहम है। इसी कड़ी में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या होरमुज के खुलने से भारत में महंगाई कम होगी, क्योंकि तेल आपूर्ति सामान्य होने का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों और आम बजट पर पड़ सकता है।



















