मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिला मुख्यालय पर गणेश प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर निकाले जा रहे जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच गंभीर विवाद उत्पन्न हो गया। उत्सव के माहौल के बीच झांकियों के आगे-पीछे निकलने और डीजे सिस्टम के संचालन को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई जो कुछ ही पलों में हिंसक झड़प में बदल गई। इस आपसी हाथापाई और संघर्ष के दौरान कुछ लोगों को मामूली चोटें भी आईं। घटना के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के सैकड़ों लोग कोतवाली थाने के बाहर जमा हो गए, जिसके बाद पुलिस प्रशासन को तुरंत हरकत में आना पड़ा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए, जिससे अंततः देर रात तक विसर्जन प्रक्रिया पूरी हो सकी। इस घटना से पहले मध्य प्रदेश में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान विभिन्न हादसों में चार लोगों की जान चली गई थी और पाँच अन्य लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
गणेश विसर्जन जुलूस में कैसे शुरू हुआ विवाद
यह पूरी घटना आगर में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पास मुख्य सड़क पर उस समय हुई जब कई अलग-अलग गणेश विसर्जन जुलूस एक ही समय पर एक साथ गुजर रहे थे। सड़क पर भारी भीड़ और कई झांकियों के होने के कारण दो गुटों के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई कि पहले कौन सा जुलूस आगे बढ़ेगा। इसके अलावा डीजे सिस्टम की पोजीशन को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद पैदा हो गए। यह मौखिक बहस इतनी तेजी से बढ़ी कि इसने देखते ही देखते मारपीट का रूप ले लिया और दोनों तरफ के लोग आपस में उलझ गए, जिसके परिणामस्वरूप कई लोगों को मामूली चोटों का सामना करना पड़ा।
कोतवाली पुलिस स्टेशन के भीतर फिर भड़का तनाव
सड़क पर हुई झड़प के बाद दोनों ही गुटों के काफी लोग अपनी-अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए कोतवाली पुलिस स्टेशन पहुँच गए। स्थिति उस समय और अधिक गंभीर हो गई जब एक पक्ष के लोग भगवान गणेश की मूर्ति को भी सीधे थाने के परिसर के अंदर ले आए। तनाव का माहौल तब अपने चरम पर पहुँच गया जब पुलिसकर्मी दूसरे गुट के एक व्यक्ति को पकड़कर थाने के अंदर लेकर आए, जिसके कारण पुलिस स्टेशन के ठीक भीतर दोनों पक्षों के बीच एक बार फिर से हाथापाई और हंगामा शुरू हो गया।
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला
थाने और बाहर बिगड़ते हालात को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को सँभालने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया और भीड़ को नियंत्रित करने के वास्ते हल्का बल प्रयोग किया। एएसपी रवींद्र कुमार बोयत सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर मोर्चा सँभाला और दोनों गुटों के लोगों को शांत कराते हुए उनके बीच मध्यस्थता की। अधिकारियों की सूझबूझ और लंबी बातचीत के बाद देर रात जब स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई, तब जाकर रुका हुआ विसर्जन जुलूस दोबारा शुरू हुआ और बिना किसी अन्य बड़ी अप्रिय घटना के गणेश प्रतिमा का विसर्जन सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।
शिकायत मिलने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
स्थानीय पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों की ओर से थाने में दी गई औपचारिक शिकायतों के आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एएसपी रवींद्र कुमार बोयत ने मीडिया को जानकारी दी कि शुरुआती विवाद केवल जुलूसों के आगे निकलने के क्रम को लेकर शुरू हुआ था। हालांकि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया है, फिर भी इस पूरे घटनाक्रम की गहराई से जाँच लगातार जारी है। यह पूरी घटना इस बात को रेखांकित करती है कि बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले धार्मिक त्योहारों और आयзоनों के दौरान किसी भी तरह के टकराव को टालने के लिए जुलूसों का समन्वित और अनुशासित प्रबंधन कितना अधिक आवश्यक है।



















