मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पुलिस ने बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के दो मुख्य आरोपियों को धर दबोचा है। शनिवार को उज्जैन के करोहन गांव के पास पुलिस और बदमाशों के बीच हुई एक संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद दोनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया गया। घेराबंदी के दौरान इन अपराधियों ने भागने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों के पैरों में गोली लगी। फिलहाल पुलिस की कड़ी निगरानी में दोनों घायल आरोपियों का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। इस कार्रवाई से इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस बल को एक बड़ी कामयाबी मिली है। इससे पहले भी इस विवाद के चलते क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल देखा गया था।
करोहन गांव के पास हुई पुलिस मुठभेड़
इस सफल पुलिसिया कार्रवाई को नीलगंगा पुलिस स्टेशन और साइबर सेल की एक संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। शनिवार को सुरक्षा बलों को पक्की खुफिया जानकारी मिली थी कि दोहरे हत्याकांड के फरार आरोपी एक गुप्त स्थान पर छिपे हुए हैं। इस सटीक सूचना के आधार पर पुलिस की टीम ने संबंधित इलाके में छापेमारी की। पुलिस बल द्वारा खुद को घिरा देख आरोपियों ने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और वहां से भागने की कोशिश की। आरोपियों सोनू पासी और विजय सूर्यवंशी के इस आक्रामक हमले के बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं। यह गोलियां सीधे दोनों आरोपियों के पैरों में लगीं, जिससे वे घायल होकर गिर पड़े। इसके तुरंत बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया और उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा।
नीलगंगा चौराहे पर हुई खूनी झड़प का इतिहास
यह पूरा मामला इसी साल 18 जुलाई की रात को हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। उज्जैन के व्यस्त नीलगंगा चौराहे के पास भाजपा नेता दिलीप राव गोरकर के दो भतीजों, लोकेश गोरकर और जय गोरकर की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। यह वारदात वास्तव में गोरकर और पासी परिवारों के बीच लंबे समय से चली आ रही पुरानी दुश्मनी का नतीजा थी। स्थानीय पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच यह खूनी रंजिश होली के त्योहार के दौरान एक महिला से जुड़े विवाद को लेकर शुरू हुई थी, जिसने समय के साथ और भयानक रूप ले लिया। 18 जुलाई को हुए इस हिंसक टकराव में लोकेश की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल जय ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस हमले में भाजपा नेता दिलीप राव गोरकर और उनके बेटे तपन सहित कई अन्य लोग भी घायल हुए थे।
पुलिस की आगे की कार्रवाई और फरार आरोपियों की तलाश
इस दोहरे हत्याकांड के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए कई आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि पुलिस इस मामले में पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल कुछ अपराधी अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गैंग का एक और कुख्यात बदमाश रोशन पासी अभी भी फरार चल रहा है। पुलिस की विशेष टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं ताकि उसे भी जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके। इस वीभत्स हत्याकांड ने पूरे उज्जैन शहर को हिलाकर रख दिया था और पुलिस मामले की तह तक जाने के लिए सभी वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा ले रही है।


















