मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के मध्य प्रदेश के खजुराहो थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ छह साल की एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने का आरोप एक सत्तर साल के बुजुर्ग व्यक्ति पर लगा है। वारदात के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए आरोपी को दबोच लिया और उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहाँ से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस इस मामले की हर पहलू से गहनता से जाँच कर रही है ताकि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा सकें।
चौबीस सितंबर को हुई थी वारदात
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरी घटना 24 सितंबर को घटित हुई थी। पीड़िता के परिवारजनों ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि बच्ची रोज की तरह अपनी आंगनवाड़ी से पढ़ाई पूरी करके घर वापस लौट रही थी। रास्ते में आरोपी ने उसे अकेला देखकर टॉफी का प्रलोभन दिया और अपने जाल में फंसाकर अपने पास बुला लिया। आरोप है कि इसके बाद आरोपी उस मासूम को अपने साथ एक सूने स्थान पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म जैसी घृणित हरकत को अंजाम दिया। जब डरी-सहमी बच्ची किसी तरह अपने घर पहुँची, तो उसने रोते हुए अपने परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई। बच्ची के मुँह से दर्दनाक वाकया सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई और वे बिना देर किए फौरन नजदीकी पुलिस थाने पहुँचे, जहाँ उन्होंने लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस बेहद गंभीर मामले को प्राथमिकता देते हुए तुरंत प्रभाव से अपनी तफ्तीश शुरू कर दी।
पुलिस ने बिना देर किए आरोपी को दबोचा
छतरपुर के एसपी रजत सकलेचा ने बताया कि जैसे ही थाने में इस संगीन अपराध की शिकायत पहुँची, पुलिस महकमे ने बिना एक पल गँवाए त्वरित एक्शन लिया। पुलिस टीम ने जाल बिछाकर आरोपी हरि रैकवार को धर दबोचा। खाकी ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की प्रासंगिक धाराओं और बच्चों के संरक्षण से जुड़े सख्त पॉक्सो एक्ट के तहत औपचारिक मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।
पीड़ित बच्ची का कराया गया मेडिकल परीक्षण
इस पूरे मामले की वैज्ञानिक और कानूनी जाँच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने पीड़िता का नजदीकी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण भी करवा लिया है। इसके साथ ही पुलिस इस पूरी वारदात से जुड़े अन्य तमाम भौतिक तथ्यों, सबूतों और आसपास की परिस्थितियों की बारीकी से पड़ताल कर रही है। जाँच अधिकारियों का मुख्य फोकस यह पता लगाना भी है कि घटना के वक्त असल में क्या-क्या हुआ था और क्या इस घिनौने कृत्य में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई संलिप्तता या भूमिका थी। नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए पीड़िता और उसके पूरे परिवार की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा है। कानून के मुताबिक पॉक्सो मामलों में नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर करना वर्जित है और इसकी गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होता है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे न्यायिक हिरासत में बंद है और पुलिस इस आपराधिक प्रकरण की कड़ियों को आपस में जोड़ने में जुटी हुई है। जाँच के इस दौर में पुलिस द्वारा जुटाए गए तमाम साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और परिवार की शिकायत में दर्ज बयानों को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कानून की तय सीमा और प्रक्रिया के तहत ही आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस वीभत्स घटना के सामने आने के बाद से ही पूरे इलाके में भारी रोष और चर्चा का माहौल है, तथा आम नागरिकों ने अपने बच्चों और खासकर बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।



















