मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में बच्चों की रोजमर्रा की यात्रा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। बजाग पुलिस थाना क्षेत्र में चलने वाले यात्री ऑटो रिक्शा में निर्धारित क्षमता की अनदेखी करते हुए जरूरत से ज्यादा लोगों को बैठाया जा रहा है। इलाके से सामने आए दृश्यों में तिपहिया वाहनों के भीतर भारी भीड़ दिखाई दे रही है, जिसमें स्कूली छात्र भी शामिल हैं। अपनी पढ़ाई के लिए निकलने वाले कई बच्चे इन वाहनों के भीतर जगह न होने के कारण बाहर लटककर जान जोखिम में डालकर आने-जाने को मजबूर हैं। इस तरह के हालात ने सीधे तौर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कमर्शियल वाहनों के चालक यातायात नियमों का पालन कर रहे हैं और क्या पुलिस या परिवहन विभाग की ओर से इन गाड़ियों की नियमित पड़ताल की जा रही है। क्षमता से अधिक वजन होने से ऑटो के अंदर सुरक्षित बैठने की जगह बेहद कम रह जाती है, जिससे अचानक मोड़ या ब्रेक लगने पर चालक के लिए वाहन पर नियंत्रण रखना कठिन हो जाता है। इससे पहले भी जिले के एकीकृत माध्यमिक शाला उमरिया के कक्षा 8वीं के बच्चों को साइकिलों से भरे ऑटो में लटककर करीब 17 किलोमीटर लंबा सफर तय करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
चलते वाहनों में लटकते बच्चे और हादसों का गंभीर खतरा
सार्वजनिक मार्गों पर इस तरह लटककर जाने वाले नाबालिग छात्रों के अचानक नीचे गिरने की आशंका हर पल बनी रहती है। जब कोई ऑटो तेज गति में अचानक ब्रेक लगाता है, अचानक किसी मोड़ पर मुड़ता है या सड़क पर सामने से आ रही किसी अन्य गाड़ी से टकरा जाता है, तो बाहर लटके बच्चों के बचने की गुंजाइश न के बराबर रह जाती है। क्षेत्र के माता-पिता और आम नागरिक इस बात से बेहद चिंतित हैं कि इस लापरवाही का नतीजा किसी ऐसे बड़े हादसे में बदल सकता है जिसे समय रहते पूरी तरह टाला जा सकता था। अभिभावकों का कहना है कि अगर इस तरह ओवरलोड वाहन में सफर के दौरान किसी मासूम या अन्य सवारी को चोट आती है, तो उसकी जवाबदेही किस विभाग या व्यक्ति की तय की जाएगी।
परिवहन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग
इन घटनाओं के सामने आने के बाद बजाग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में चलने वाले यात्री ऑटो रिक्शा की नियमित जांच के लिए पुलिस और परिवहन विभाग से मांगें तेज हो गई हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को जमीनी स्तर पर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी वाहन चालक निर्धारित यात्री सीमा से अधिक लोगों को न बैठाए। इसके साथ ही ड्राइवरों को सड़क सुरक्षा के बुनियादी मानकों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य किया जाए। नागरिकों ने जिम्मेदार विभागों से अपील की है कि नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ तुरंत चालान और जब्ती जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों के स्कूल आने-जाने के रास्ते को सुरक्षित बनाया जा सके।
ओवरलोडिंग से बढ़ता जोखिम और जिम्मेदारी की जरूरत
हालांकि सिर्फ तस्वीरों के आधार पर यह पूरी तरह तय नहीं किया जा सकता कि यह समस्या कितनी व्यापक है या फिर जांच चौकियों पर निगरानी में कहां चूक हुई है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा पर मंडराते खतरे को देखते हुए प्रशासन की त्वरित सक्रियता जरूरी हो गई है। प्रशासनिक अधिकारी औचक निरीक्षण कर सकते हैं, नियमों की अनदेखी करने वालों पर जुर्माना लगा सकते हैं और चालकों को सचेत कर सकते हैं कि वे जानलेवा ढंग से सवारियां न ढोएं। वहीं ऑटो चालकों का भी यह नैतिक और कानूनी दायित्व बनता है कि वे ज्यादा कमाई के फेर में सवारियों की जिंदगी दांव पर न लगाएं और बच्चों को वाहन के पायदान पर लटकने की इजाजत बिल्कुल न दें। ओवरलोडिंग भले ही एक बार में अधिक लोगों को पहुंचाने का सुविधाजनक तरीका दिखता हो, लेकिन यह सफर को जानलेवा बना देता है।
सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने का इंतजार
बजाग और डिंडौरी के ग्रामीण अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इन स्थितियों की जांच कर क्या ठोस कदम उठाते हैं। लोगों का मानना है कि किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय समय रहते कड़े फैसले लेना ही समझदारी है। शिक्षा हासिल करने के लिए घर से निकलने वाले किसी भी बच्चे को खचाखच भरी गाड़ियों के बाहर लटककर सफर करने के लिए विवश नहीं होना चाहिए।



















