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इंदौर के नशा मुक्ति केंद्र में युवक ने लगाई फांसी, दहशत में 45 मरीज मुख्य गेट खोलकर भागेमध्य प्रदेश
1 नव॰ 2026, 7:40 am (1 घंटे पहले)· 0

इंदौर के नशा मुक्ति केंद्र में युवक ने लगाई फांसी, दहशत में 45 मरीज मुख्य गेट खोलकर भागे

इंदौर के एक नशा मुक्ति केंद्र में 24 वर्षीय सचेंद्र लोधी का शव फंदे से लटका मिला, जिसके बाद मची अफरा-तफरी में 45 अन्य मरीज केंद्र छोड़कर भाग खड़े हुए।

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में शनिवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब वहां उपचाराधीन एक 24 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इस घटना के तुरंत बाद केंद्र में मौजूद बाकी मरीजों में भारी दहशत फैल गई। डर और घबराहट के माहौल के बीच लगभग 45 मरीज परिसर का मुख्य दरवाजा खोलकर बाहर भाग निकले। भागते हुए मरीजों का एक वीडियो भी सामने आया है।

ध्यान सत्र के दौरान हुई बेचैनी, कमरे में मिला शव

इस पूरे मामले को लेकर रावजी बाजार थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि जान गंवाने वाले युवक की शिनाख्त सचेंद्र लोधी के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 24 वर्ष थी। सचेंद्र नशा मुक्ति केंद्र में अपना इलाज करा रहा था और वहीं रह रहा था।

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थाना प्रभारी के अनुसार, शनिवार को केंद्र के भीतर नियमित ध्यान (मेडिटेशन) की कक्षा आयोजित की जा रही थी। उसी सत्र के दौरान सचेंद्र लोधी को अचानक तेज बेचैनी महसूस होने लगी। उसने वहां मौजूद लोगों को खुद अपनी अस्वस्थता और घबराहट के बारे में बताया था। इसके बाद वह सत्र बीच में ही छोड़कर अपने कमरे में चला गया। कुछ समय बाद जब लोग वहां पहुंचे, तो उसका शव कमरे के अंदर फंदे पर लटका हुआ मिला।

कमरे से नहीं मिला सुसाइड नोट, जांच में जुटी पुलिस

घटनास्थल की शुरुआती पड़ताल में पुलिस को कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। सुसाइड नोट न मिलने के कारण फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि सचेंद्र ने इतना कठोर कदम किन परिस्थितियों में और किस वजह से उठाया। पुलिस की जांच टीम घटना के सभी पहलुओं की गहनता से तफ्तीश कर रही है ताकि असल कारणों का पता लगाया जा सके।

थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि जब केंद्र का स्टाफ सचेंद्र के शव को नीचे उतारकर तत्काल अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहा था, उसी दौरान वहां दूसरी अनहोनी घट गई। एक साथी मरीज की इस तरह अचानक मौत देखकर केंद्र में भर्ती अन्य मरीजों के भीतर गहरा खौफ पैदा हो गया। घबराहट में इन मरीजों ने केंद्र का मुख्य गेट खोला और एक साथ वहां से भाग खड़े हुए।

मरीजों की संख्या पर प्रबंधन और पुलिस की पड़ताल

घटना के बाद केंद्र से भागे मरीजों की संख्या को लेकर शुरुआत में भ्रम की स्थिति बनी रही। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि नशा मुक्ति केंद्र प्रबंधन ने शुरुआत में पुलिस को यह जानकारी दी थी कि करीब 70 मरीज भाग गए हैं। हालांकि, जब पुलिस अधिकारियों ने केंद्र के उपस्थिति रजिस्टर और रिकॉर्ड से मौजूद लोगों का मिलान किया, तो वास्तविक संख्या सामने आई। रिकॉर्ड की जांच के बाद पुष्टि हुई कि केंद्र से भागने वाले मरीजों की वास्तविक संख्या करीब 45 है।

पुलिस के अनुसार, केंद्र से भागने वाले मरीजों में से कई सीधे अपने-अपने घरों को चले गए हैं। वहीं अन्य मरीजों और पूरी घटना के संबंध में पुलिस लगातार पूछताछ और जांच कर रही है ताकि व्यवस्थाओं और सुरक्षा मानकों की स्थिति भी स्पष्ट हो सके।

सवाल-जवाब

इंदौर के नशा मुक्ति केंद्र में क्या घटना हुई?
इंदौर के एक नशा मुक्ति केंद्र में 24 वर्षीय सचेंद्र लोधी ने फांसी लगाकर जान दे दी, जिसके बाद घबराकर करीब 45 अन्य मरीज मुख्य गेट खोलकर भाग निकले।
मृतक युवक की पहचान किस नाम से हुई है?
मृतक युवक की पहचान 24 साल के सचेंद्र लोधी के रूप में हुई है, जो उसी केंद्र में इलाज के लिए भर्ती था।
घटना के समय सचेंद्र लोधी क्या कर रहा था?
वह केंद्र में चल रही ध्यान (मेडिटेशन) की कक्षा में मौजूद था, जहां बेचैनी महसूस होने के बाद वह अपने कमरे में चला गया था।
क्या पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट मिला है?
नहीं, थाना प्रभारी के अनुसार घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है और आत्महत्या के कारणों की जांच जारी है।
केंद्र से कुल कितने मरीज भागे?
प्रबंधन ने पहले 70 मरीजों के भागने की बात कही थी, लेकिन उपस्थिति रजिस्टर की जांच के बाद पुलिस ने लगभग 45 मरीजों के भागने की पुष्टि की।
भागे हुए मरीजों की मौजूदा स्थिति क्या है?
पुलिस के अनुसार भागे हुए मरीजों में से कई अपने घर पहुंच गए हैं, जबकि शेष मामलों में पुलिस जांच और पड़ताल कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·12 मिनट पहले

अंक ज्योतिष और आध्यात्मिक विकास से जुड़ने वाले लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि मन की उथल-पुथल को सही मार्गदर्शन और थेरेपी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। पिछले साल जब मेरा एक दूर का परिचित ऐसे ही केंद्र में था, तब उसकी आँखों का डर आज भी याद आता है। जब ध्यान सत्र के दौरान ही कोई ऐसा कदम उठा ले और बाकी लोग डरकर भाग जाएं, तो समझ आता है कि वहां की व्यवस्थाओं में कितना सुधार बाकी है।

Ravikash Gupta@ravikash·33 मिनट पहले

इन्दौर के इस नशा मुक्ति केंद्र में जो हुआ वह बहुत डरावना है। सचेंद्र लोधी ने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह तो साफ नहीं है, लेकिन बाकी मरीजों का इस तरह डरकर भाग जाना यह भी बताता है कि अंदर का माहौल कैसा रहा होगा। क्या इन केंद्रों की सुरक्षा और वहां के हालातों की कभी सही से जांच होती है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·32 मिनट पहले

रविकेश जी, सच कह रहे हैं। पिछले साल मैं खुद एक ऐसे सेंटर गया था, वहाँ का घुटन भरा माहौल देखकर ही मेरी रूह काँप गई थी।

Rohan Verma@rohan-verma·55 मिनट पहले

अचानक इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का भाग जाना समझ नहीं आया, स्टाफ का ध्यान आखिर कहाँ था?

Karan Malhotra@karan-malhotra·54 मिनट पहले

रोहन भाई, स्टाफ तो घबराया हुआ होगा ही, पर सचेंद्र को ध्यान सत्र के दौरान बेचैनी हुई तो किसी ने उसे अकेला क्यों छोड़ा?

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