मध्य प्रदेश के इंदौर शहर स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में शनिवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब वहां उपचाराधीन एक 24 वर्षीय युवक ने कथित तौर पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इस घटना के तुरंत बाद केंद्र में मौजूद बाकी मरीजों में भारी दहशत फैल गई। डर और घबराहट के माहौल के बीच लगभग 45 मरीज परिसर का मुख्य दरवाजा खोलकर बाहर भाग निकले। भागते हुए मरीजों का एक वीडियो भी सामने आया है।
ध्यान सत्र के दौरान हुई बेचैनी, कमरे में मिला शव
इस पूरे मामले को लेकर रावजी बाजार थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि जान गंवाने वाले युवक की शिनाख्त सचेंद्र लोधी के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 24 वर्ष थी। सचेंद्र नशा मुक्ति केंद्र में अपना इलाज करा रहा था और वहीं रह रहा था।
थाना प्रभारी के अनुसार, शनिवार को केंद्र के भीतर नियमित ध्यान (मेडिटेशन) की कक्षा आयोजित की जा रही थी। उसी सत्र के दौरान सचेंद्र लोधी को अचानक तेज बेचैनी महसूस होने लगी। उसने वहां मौजूद लोगों को खुद अपनी अस्वस्थता और घबराहट के बारे में बताया था। इसके बाद वह सत्र बीच में ही छोड़कर अपने कमरे में चला गया। कुछ समय बाद जब लोग वहां पहुंचे, तो उसका शव कमरे के अंदर फंदे पर लटका हुआ मिला।
कमरे से नहीं मिला सुसाइड नोट, जांच में जुटी पुलिस
घटनास्थल की शुरुआती पड़ताल में पुलिस को कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। सुसाइड नोट न मिलने के कारण फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि सचेंद्र ने इतना कठोर कदम किन परिस्थितियों में और किस वजह से उठाया। पुलिस की जांच टीम घटना के सभी पहलुओं की गहनता से तफ्तीश कर रही है ताकि असल कारणों का पता लगाया जा सके।
थाना प्रभारी मनीष मिश्रा ने बताया कि जब केंद्र का स्टाफ सचेंद्र के शव को नीचे उतारकर तत्काल अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहा था, उसी दौरान वहां दूसरी अनहोनी घट गई। एक साथी मरीज की इस तरह अचानक मौत देखकर केंद्र में भर्ती अन्य मरीजों के भीतर गहरा खौफ पैदा हो गया। घबराहट में इन मरीजों ने केंद्र का मुख्य गेट खोला और एक साथ वहां से भाग खड़े हुए।
मरीजों की संख्या पर प्रबंधन और पुलिस की पड़ताल
घटना के बाद केंद्र से भागे मरीजों की संख्या को लेकर शुरुआत में भ्रम की स्थिति बनी रही। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि नशा मुक्ति केंद्र प्रबंधन ने शुरुआत में पुलिस को यह जानकारी दी थी कि करीब 70 मरीज भाग गए हैं। हालांकि, जब पुलिस अधिकारियों ने केंद्र के उपस्थिति रजिस्टर और रिकॉर्ड से मौजूद लोगों का मिलान किया, तो वास्तविक संख्या सामने आई। रिकॉर्ड की जांच के बाद पुष्टि हुई कि केंद्र से भागने वाले मरीजों की वास्तविक संख्या करीब 45 है।
पुलिस के अनुसार, केंद्र से भागने वाले मरीजों में से कई सीधे अपने-अपने घरों को चले गए हैं। वहीं अन्य मरीजों और पूरी घटना के संबंध में पुलिस लगातार पूछताछ और जांच कर रही है ताकि व्यवस्थाओं और सुरक्षा मानकों की स्थिति भी स्पष्ट हो सके।
























