त्योहारी सीजन में जब कमरों के हर कोने की धुलाई और रंग-रोगन की तैयारी चलती है, तब अकसर पैरों के नीचे फर्श की गड़बड़ी सामने आ जाती है। कई मकानों में चलने के दौरान टाइलों के भीतर से अजीब सी खोखली खटखट सुनाई देती है, अथवा पैर का वजन पड़ते ही टाइल अपनी जगह से डगमगाती महसूस होती है। जब फर्श के नीचे का आधार कमजोर पड़ जाता है, तब ऐसी दिक्कतें उभरती हैं और त्योहार की भागदौड़ से पूर्व इन्हें दुरुस्त करना समझदारी माना जाता है।
फर्श के नीचे से खोखली आवाज आने की मुख्य वजहें
फर्श निर्माण के जानकार राजेश शर्मा इस परेशानी के पीछे बुनियादी कमियों की ओर इशारा करते हैं। उनके मुताबिक, टाइल बिछाते वक्त मसाले या गोंद की सही मात्रा न मिलना ही इसकी जड़ होता है। राजेश शर्मा के अनुसार, "टाइल्स लगाते समय नीचे पर्याप्त सीमेंट या टाइल एडहेसिव का इस्तेमाल नहीं होना प्रमुख कारण है।" जब कारीगर सतह को बराबर नहीं भरते, तो पत्थर और जमीन के बीच हवा की खाली जेबें बन जाती हैं।
इसके अलावा मौसमी उतार-चढ़ाव और सीलन का असर भी फर्श के जुड़ाव पर पड़ता है। लगातार नमी सोखने अथवा अत्यधिक गर्मी व ठंड से जोड़ों की पकड़ ढीली पड़ने लगती है। समय गुजरने के साथ जब किनारों की भराई घिस जाती है, तब खाली जगह में हवा भर जाने के कारण चलने पर आवाज गूंजने लगती है।
नुकसान की पहचान के लिए जांचने का आसान तरीका
कमरे के किस हिस्से में फर्श कमजोर हो चुका है, इसका पता लगाना बेहद सीधा है। किसी लकड़ी के हल्के हत्थे अथवा ठोस प्लास्टिक के टुकड़े को लेकर टाइलों के ऊपर धीरे-धीरे ठोक कर देखें। जिस हिस्से में नीचे मसाला ठोस होगा, वहां की आवाज भारी और सपाट आएगी, जबकि खाली जगह वाली जगह पर खटखट की स्पष्ट गूंज सुनाई देगी।
यदि किसी पत्थर से केवल हल्की आवाज आ रही हो और वह अपनी जगह पर मजबूती से चिपका हुआ है, तो तुरंत घबराने की जरूरत नहीं होती। ऐसी स्थिति में केवल अनुभवी मिस्त्री से स्थिति परखवा लेना पर्याप्त होता है। दूसरी तरफ, यदि पत्थर का कोना बाहर निकल रहा हो, वह पैर रखने पर हिलने लगे या उसमें दरार नजर आए, तो उसे नए सिरे से फिट करवाना ही सुरक्षित रास्ता है।
मरम्मत की सही विधि और जरूरी सावधानियां
ढीली पड़ चुकी टाइल को ठीक करने के लिए सबसे पहले उसे बहुत एहतियात के साथ उखाड़ा जाता है ताकि बगल की सही टाइलें न टूटें। इसके बाद पुरानी परत और सीमेंट के चूरे को पूरी तरह साफ किया जाता है। सतह बिल्कुल समतल और साफ होने के पश्चात उच्च गुणवत्ता वाले टाइल एडहेसिव या ताजे मोर्टार का लेप लगाकर उसे दोबारा बिठाया जाता है। अंत में उसके चारों तरफ के खांचों को ग्रोटिंग से सील कर दिया जाता है ताकि पानी का रिसाव भीतर न पहुंचे।
कई लोग मिस्त्री बुलाने से बचने के चक्कर में किनारों से फेविकोल या सूखा सीमेंट झोंक देते हैं, मगर यह कोई पक्का समाधान नहीं है और कुछ ही हफ्तों में समस्या फिर लौट आती है। इसके अलावा जब तक जोड़ों की मरम्मत न हो, तब तक फर्श पर बाल्टियों से पानी उलीचकर धोने से बचना चाहिए। यदि पत्थर हिल रहा हो या चटक चुका हो, तो उसके ऊपर भारी सामान रखकर अत्यधिक दबाव डालने की भूल न करें।























