मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में शुमार जबलपुर की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली एक बड़े और सकारात्मक बदलाव के दौर से गुजरने वाली है। शहरवासियों के लिए रोजमर्रा के सफर को अधिक सुगम, आरामदायक और प्रदूषण से पूरी तरह मुक्त बनाने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ जल्द ही नई अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। लंबे समय से शहर के लोग एक बेहतर और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की उम्मीद कर रहे थे, और अब आने वाले अगस्त महीने से उनका यह लंबा इंतजार आखिरकार खत्म होने जा रहा है। सड़कों पर इन हाईटेक ई-बसों के उतरने के साथ ही आम जनता का शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक आवागमन बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगा।
कई चरणों में होगा नए बेड़े का विस्तार
प्रशासन द्वारा तैयार की गई योजना के पहले चरण के अंतर्गत, इसी सप्ताह बीस नई पूर्णतः इलेक्ट्रिक बसें जबलपुर पहुंच रही हैं। अधिकारियों की तैयारी है कि अगले महीने यानी अगस्त की शुरुआत तक बीस अतिरिक्त बसें भी शहर को प्राप्त हो जाएं, ताकि संचालन से पहले एक मजबूत बेड़ा तैयार हो सके। इस तरह शुरुआत में कुल चालीस बसें शहर की सड़कों पर दौड़ना शुरू कर देंगी। स्थानीय अधिकारियों ने 15 अगस्त के आसपास या फिर अधिकतम अगस्त के अंतिम सप्ताह तक इन सभी चालीस बसों का नियमित संचालन शुरू करने की पूरी संभावना जताई है। हालांकि, विकास का यह क्रम यहीं नहीं रुकेगा। लक्ष्य रखा गया है कि आने वाले समय में धीरे-धीरे इन ई-बसों की कुल संख्या को बढ़ाकर सौ तक ले जाया जाए। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए दूसरे चरण के दौरान पैंतीस और बसें शामिल की जाएंगी, जबकि तीसरे चरण में पच्चीस और नई बसों को बेड़े का हिस्सा बनाया जाएगा।
दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष और आधुनिक ट्रॉली सिस्टम
इन अत्याधुनिक वातानुकूलित ई-बसों की सबसे बड़ी और सराहनीय खासियत यह है कि इन्हें पूरी तरह से दिव्यांग यात्रियों की जरूरतों को केंद्र में रखकर डिजाइन किया गया है। आमतौर पर शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को सार्वजनिक वाहनों में चढ़ने और उतरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए इन बसों में एक विशेष और हाई-टेक इलेक्ट्रिक ट्रॉली सिस्टम इंस्टॉल किया गया है। यह सिस्टम एक लिफ्ट की तरह काम करता है, जो सड़क पर व्हीलचेयर में बैठे यात्री को बहुत ही आसानी से और पूरी सुरक्षा के साथ ऊपर की तरफ उठाता है तथा बस के भीतर सुरक्षित स्थान पर सेट कर देता है। इस आधुनिक प्रणाली की बदौलत दिव्यांग यात्री बिना किसी बाहरी व्यक्ति की मदद या असुविधा के पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना सफर पूरा कर सकेंगे।
यात्री क्षमता, लंबी रेंज और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
यात्रियों के आरामदायक सफर को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बस में बीस से पच्चीस सीटें लगाई गई हैं। इसके अलावा पीक आवर्स की भीड़ को देखते हुए पच्चीस अतिरिक्त यात्रियों के खड़े होकर सफर करने के लिए भी पर्याप्त जगह (स्टैंडिंग स्पेस) छोड़ी गई है। अपनी बैटरी क्षमता और परफॉरमेंस के मामले में भी ये बसें बेहद शानदार हैं। एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद ये बसें एक सौ पचास किलोमीटर से लेकर एक सौ अस्सी किलोमीटर तक की बेहतरीन रेंज प्रदान करेंगी। इस लंबी रेंज की वजह से बसें दिन भर में बिना बार-बार चार्ज किए शहर के कई फेरे आसानी से लगा सकेंगी। इन बसों के सुचारू संचालन, नियमित रखरखाव और चार्जिंग की भारी जरूरत को पूरा करने के लिए कठौंदा इलाके में एक एकड़ विशाल जमीन पर एक भव्य डिपो और अत्याधुनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा और नई डिजिटल तकनीक
यात्रियों की सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए, इन वाहनों को पूरी तरह से स्मार्ट और डिजिटल बस के रूप में संचालित किया जाएगा। यात्रियों को अब टिकट के लिए नकद पैसे देने या छुट्टे की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं होगी, क्योंकि इनमें ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम और डिजिटल पेमेंट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। हर बस में उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे लगाए गए हैं, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मांगने के लिए पैनिक बटन दिया गया है, और बसों की सटीक लोकेशन पता करने के लिए GPS ट्रैकिंग सिस्टम भी मौजूद है। इसके साथ ही, सफर के दौरान अगले स्टॉप या रूट की जानकारी देने के लिए पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम और रियल-टाइम पब्लिक इंफॉर्मेशन डिस्प्ले जैसी आधुनिक तकनीक भी इन बसों का अहम हिस्सा हैं।
शहर के प्रमुख 11 रूटों पर हाई-फ्रीक्वेंसी संचालन
प्रशासन ने शहर के भीतरी हिस्सों और आसपास के ग्रामीण इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के लिए कुल ग्यारह रूट निर्धारित किए हैं, जिन पर ये प्रदूषण मुक्त बसें दौड़ेंगी। जबलपुर के सभी प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर यात्रियों को हर पांच से दस मिनट के छोटे अंतराल पर बसें आसानी से उपलब्ध होंगी। आधिकारिक योजना के अनुसार फिलहाल जिन रूटों को तय किया गया है, वे इस प्रकार हैं
- मदर टेरेसा से रांझी, घाना और सोनपुर, जो घमापुर के रास्ते से होकर जाएगा।
- करमेता से रांझी और घाना, जो कोचघर मार्ग से गुजरेगा।
- पनागर से पनागर, जो तिलवारा और घमापुर होते हुए अपनी यात्रा पूरी करेगा।
- आईएसबीटी से बरेला शारदा मंदिर, जो तीन पत्ती मार्ग से होकर संचालित होगा।
- आईएसबीटी से भेड़ाघाट, जो अंधमूक बायपास के रास्ते से गुजरेगा।
- आईएसबीटी से गौरीघाट, जिसका संचालन त्रिमूर्ति नगर से होकर किया जाएगा।
- रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट, जो सगड़ा और चौकीताल होते हुए जाएगा।
- आईएसबीटी से बरगी डैम, जो तिलवारा होते हुए चलेगा।
- आईएसबीटी से सहपुरा, जो तीन पत्ती और अंधमूक से होकर गुजरेगा।
- रेलवे स्टेशन से पाटन, और आईएसबीटी एयरपोर्ट जो यूनिवर्सिटी होते हुए जाएगा।
इन तय मार्गों पर नियमित संचालन शुरू होने से न केवल शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि सार्वजनिक परिवहन अधिक विश्वसनीय भी बन सकेगा।



















