ग्वालियर से गुजरने वाले रेल यात्रियों के लिए राहत की खबर है। रेलवे प्रशासन ने झांसी मंडल के कई अहम खंडों पर ट्रेनों की अधिकतम स्पीड सीमा बढ़ा दी है, जिसमें कुछ हिस्सों पर गाड़ियां अब 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। यह बदलाव मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार की देखरेख में पटरियों, सिग्नल प्रणाली और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के बाद संभव हुआ है।
धीमी ट्रेनों की शिकायत से मिली सीख
लंबे समय से रेलवे यात्रियों की एक आम शिकायत रही है कि ट्रेनें रास्ते में जरूरत से ज्यादा रुकती हैं और तय समय से देर से मंजिल तक पहुंचती हैं। इसमें बीतने वाले घंटों की वजह से लोगों का कामकाजी समय भी प्रभावित होता है और सफर में अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है। इसी वजह से रेलवे ने अपने नेटवर्क को दुरुस्त करने और यात्रा को तेज, आरामदायक व सुरक्षित बनाने का अभियान तेज किया है, जिसका सीधा असर झांसी मंडल के अंतर्गत आने वाले खंडों पर दिख रहा है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह पूरी कवायद कई महीनों की तैयारी के बाद अंजाम तक पहुंची है।
किन रूटों पर कितनी बढ़ी रफ्तार
सबसे ज्यादा फायदा संदलपुर और सिथौली के बीच के सफर करने वालों को मिलेगा। संदलपुर-सिथौली की ए केबिन लाइन और दतिया-डबरा की तीसरी लाइन पर गाड़ियों की स्पीड सीमा 100 से बढ़ाकर सीधे 110 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। इसी तरह ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज लाइन के रायचू-जौरा अलापुर हिस्से पर भी रफ्तार 90 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचा दी गई है। जौरा अलापुर से कैलारस के बीच चलने वाली मेमू और बाकी पैसेंजर गाड़ियों के लिए यह सीमा 75 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जिससे इस ग्रामीण इलाके में सफर करने वालों को खासा फायदा होगा। हेतमपुर-धौलपुर खंड पर भी गाड़ियां अब 75 के बजाय 100 किलोमीटर प्रति घंटे की चाल से दौड़ेंगी, जबकि इसी खंड की तीसरी लाइन पर स्पीड 80 से बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। बांदा-खुरहंड यानी खैरार-मानिकपुर की दूसरी डाउन लाइन पर भी रफ्तार 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है। इन सभी बदलावों को मिलाकर देखें तो झांसी मंडल के आधे से ज्यादा प्रमुख खंडों की स्पीड सीमा में इजाफा हो चुका है।
तीन व्यस्त फाटक हमेशा के लिए बंद
रफ्तार बढ़ाने के साथ ही रेलवे ने हादसों की आशंका को खत्म करने के मकसद से तीन व्यस्त समपार फाटकों को स्थाई तौर पर सील कर दिया है। इनमें झांसी-मानिकपुर खंड का फाटक नंबर 476, महोबा-खजुराहो खंड का फाटक नंबर 2 और झांसी-ग्वालियर खंड का फाटक नंबर 409 शामिल हैं। इन फाटकों के बंद होने से गाड़ियों को अब सिग्नल के इंतजार में या पटरी पर आने वाली किसी मानवीय बाधा की वजह से बार-बार ब्रेक नहीं लगाना पड़ेगा, जिससे सड़क और रेल यातायात दोनों की सुरक्षा में सुधार होगा और आसपास रहने वाले लोगों को भी दुर्घटना के खतरे से राहत मिलेगी।
लूप लाइनों की स्पीड भी दोगुनी
रेलवे ने एक और अहम बदलाव करते हुए उदयपुर-टीकमगढ़, खैरार-मानिकपुर और झांसी-ग्वालियर खंड के अलग-अलग स्टेशनों की लूप लाइनों पर स्पीड सीमा 15 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़ाकर 30 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी है। मतलब जब कोई ट्रेन मुख्य लाइन छोड़कर साइड ट्रैक पर जाएगी, तो उसे पहले जैसी बहुत धीमी रफ्तार पर नहीं आना पड़ेगा, जिससे स्टेशनों पर बीतने वाला अतिरिक्त समय भी बचेगा और आगे की गाड़ियों का परिचालन भी सुगम होगा।
यात्रियों को कैसे मिलेगा फायदा
पटरियों, सिग्नल सिस्टम और फाटकों को लेकर हुए इन तमाम सुधारों का सबसे बड़ा नतीजा यह होगा कि झांसी मंडल की गाड़ियों का टाइम-टेबल अब कहीं ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। गाड़ियां तय समय पर स्टेशनों पर पहुंचेंगी और यात्रियों को देरी, अनावश्यक हॉल्ट और बार-बार लगने वाले ब्रेक की झंझट से छुटकारा मिलेगा। कुल मिलाकर इस पूरे बदलाव से इस इलाके में सफर करने वाले लोगों को तेज, सुरक्षित और ज्यादा सुखद यात्रा अनुभव मिलने की उम्मीद है, और लंबी दूरी की गाड़ियों के साथ-साथ छोटी दूरी की पैसेंजर व मेमू सेवाओं को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।




















