वैश्विक गिरावट और कच्चे तेल में उछाल से सहमे भारतीय बाजार, 20 अगस्त को निफ्टी और सेंसेक्स में देखने को मिल सकता है दबावघर में डेंगू का मरीज होने पर परिवार को सुरक्षित रखने की गाइड: फोर्टिस मानेसर के विशेषज्ञ से जानें जरूरी सावधानियांकर्नाटक के दावणगेरे में पति रघु की हत्या, अवैध संबंध छिपाने के लिए पत्नी श्रुति और प्रेमी उबैदुल्लाह गिरफ्तारपाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देने अदालत पहुंची शहबाज सरकार, अडियाला जेल में ही इमरान खान को रखने पर अड़ीपीलीभीत में पुराना बकाया मांगने पर परचून कारोबारी की जान ली, पुलिस ने तीन अभियुक्तों को दबोचाचमोली के नारायणबगड़ में खूंखार कुत्तों का हमला, 10 शिक्षण संस्थान चार दिनों के लिए बंदरिश्वत की मांग साबित न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के ग्राम पंचायत कर्मचारियों को 1996 के केस में बरी कियाअमरीकी ट्रेजरी की बायबैक घोषणा के बाद डॉलर सुस्त, सोना $4,500 के पार निकलने को तैयारचीन की मेट्रो में बैग से फर्श पर फैले दर्जनों सांप, 15 मिनट तक बेखौफ यात्रियों ने की पकड़ने में मददपेपर लीक पर पटना में RJD का राजभवन मार्च, पुलिस की पानी की बौछार के बीच बैरिकेड पर चढ़कर गरजे तेजस्वी यादव
राम मंदिर चढ़ावा मामले में वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार की मांग, नेताओं के दावों की भी हो पड़तालमध्य प्रदेश
5 जुल॰ 2026, 9:04 pm (45 दिन पहले)· 2

राम मंदिर चढ़ावा मामले में वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार की मांग, नेताओं के दावों की भी हो पड़ताल

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को चिट्ठी लिखकर प्रियंका गांधी, अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं के राम मंदिर चढ़ावे को लेकर दिए बयानों की भी जांच कराने की मांग की है।

राम मंदिर चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने मामले की जांच कर रहे अधिकारी को चिट्ठी लिखकर एक बड़ी मांग रखी है। उनका कहना है कि सिर्फ शिकायतों की जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट और चढ़ावे की राशि को लेकर सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाने वाले नेताओं और जानी-मानी हस्तियों के बयानों की भी बाकायदा पड़ताल होनी चाहिए।

आलोक कुमार का तर्क है कि अलग-अलग समय पर कई राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों ने राम मंदिर में चढ़ाए गए धन के इस्तेमाल को लेकर बड़े-बड़े दावे किए हैं। उनका कहना है कि जब जांच एजेंसी शिकायतों की पड़ताल कर ही रही है, तो ऐसे सार्वजनिक बयानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर किसी ने सार्वजनिक मंच से गंभीर आरोप लगाया है, तो उसे उसी एजेंसी के सामने अपने दावे का आधार भी स्पष्ट करना चाहिए, जो फिलहाल इससे जुड़ी शिकायतों की जांच कर रही है।

ये भी पढ़ें

चिट्ठी में किन नेताओं के नाम

पत्र में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह समेत कई नेताओं के बयानों का हवाला दिया गया है। इनमें से कुछ नेताओं ने दावा किया था कि राम मंदिर के चढ़ावे में करीब 20,000 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हुई है। वहीं कुछ अन्य बयानों में मंदिर के नाम पर करोड़ों रुपये की चोरी और जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए थे।

आधार और सबूत मांगने की मांग

वीएचपी अध्यक्ष ने जांच एजेंसी से आग्रह किया है कि इन सभी नेताओं और संबंधित व्यक्तियों को बुलाकर पूछा जाए कि उन्होंने इतने गंभीर आरोप आखिर किस आधार पर लगाए। उनसे यह भी पूछा जाए कि उन्हें यह जानकारी कहां से मिली और क्या उनके पास अपने दावों की पुष्टि के लिए कोई दस्तावेज, सबूत या अन्य ठोस प्रमाण मौजूद हैं, ताकि ऐसे दावे यूं ही सार्वजनिक दायरे में घूमते न रहें।

सबूत मिले तो क्या, न मिले तो क्या

पत्र के मुताबिक अगर आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय सबूत सामने आते हैं, तो इससे जांच एजेंसी को सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो सकेगी। लेकिन अगर जांच में पता चलता है कि आरोप बेबुनियाद, भ्रामक या बिना किसी सबूत के लगाए गए थे, तो आलोक कुमार के मुताबिक ऐसे लोगों के खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि यह प्रक्रिया दोनों तरफ से बराबर लागू हो।

आलोक कुमार की चिंता

आलोक कुमार ने यह भी कहा कि किसी धार्मिक संस्था या उससे जुड़े मामलों में बिना प्रमाण के गंभीर आरोप लगाना केवल समाज में भ्रम पैदा नहीं करता, बल्कि इससे सामाजिक तनाव और वैमनस्य फैलने का खतरा भी बढ़ता है। इसलिए उनका मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक बयान तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होने चाहिए, न कि अनुमान या राजनीतिक सुविधा पर।

आगे क्या होगा

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पहले से ही राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ था, और आलोक कुमार की इस चिट्ठी ने अब इसे नई दिशा दे दी है। जांच एजेंसी इस पत्र पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है, और आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में रह सकता है।

सवाल-जवाब

आलोक कुमार ने चिट्ठी किसे लिखी है?
आलोक कुमार ने राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रहे अधिकारी को चिट्ठी लिखी है।
आलोक कुमार की मुख्य मांग क्या है?
वे चाहते हैं कि जांच एजेंसी सिर्फ शिकायतों तक सीमित न रहे, बल्कि जिन नेताओं ने चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, उनके बयानों की भी जांच करे।
पत्र में किन नेताओं के नाम हैं?
पत्र में प्रियंका गांधी, राम गोपाल यादव, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह समेत कई नेताओं के बयानों का उल्लेख है।
नेताओं ने कितनी रकम की गड़बड़ी का आरोप लगाया था?
कुछ नेताओं ने राम मंदिर के चढ़ावे में करीब 20,000 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी होने का दावा किया था।
आलोक कुमार जांच एजेंसी से क्या पूछवाना चाहते हैं?
वे चाहते हैं कि नेताओं से पूछा जाए कि उन्होंने आरोप किस आधार पर लगाए और क्या उनके पास इसके सबूत हैं।
अगर आरोप बेबुनियाद निकले तो क्या होगा?
आलोक कुमार के मुताबिक अगर आरोप बिना सबूत के या भ्रामक पाए जाते हैं, तो ऐसा दावा करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR