ग्वालियर में हुई एक झकझोर देने वाली घटना में प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े और स्थानीय कांग्रेस नेता राजेश राजपूत ने सूदखोरों के उत्पीड़न से आजिज़ आकर खौफनाक कदम उठा लिया। पीड़ित ने सोमवार के दिन एसपी कार्यालय पहुंचकर जहर का सेवन कर लिया। आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के बाद पुलिस ने मृतक की जेब से बरामद दो पन्नों के सुसाइड नोट के आधार पर कुल आठ आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का संगीन मामला दर्ज कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार को राजेश राजपूत अचानक एसपी कार्यालय पहुंचे थे और वहीं उन्होंने जहर खा लिया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें फौरन नजदीकी चिकित्सालय पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचाया नहीं जा सका और उनकी मौत हो गई। उनकी तलाशी लेने पर एक सुसाइड नोट हाथ लगा, जिसमें उन्होंने कर्ज देने वालों यानी सूदखोरों की तरफ से दी जा रही मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का सिलसिलेवार जिक्र किया था। इस पत्र में उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के साथ-साथ ग्वालियर के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई थी कि उन्हें न्याय दिलाया जाए और इन आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
कई गुना रकम चुकाने के बाद भी जारी थी वसूली
राजेश राजपूत द्वारा छोड़े गए दो पन्नों के उस विस्तृत सुसाइड नोट में प्रॉपर्टी के काम से जुड़े वित्तीय लेन-देन का ब्योरा दिया गया था। उन्होंने बताया कि अपने कारोबार के सिलसिले में उन्होंने कुछ लोगों से पैसे उधार लिए थे। इन लोगों को वह उधार ली गई मूल रकम से कई गुना ज्यादा पैसा चुका चुके थे, इसके बावजूद सूदखोरों की भूख शांत नहीं हुई और वे लगातार और पैसों की मांग कर रहे थे। तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया।
सुसाइड नोट में इन आठ लोगों के नाम आए सामने
मृतक ने अपने सुसाइड नोट में जिन आठ लोगों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज किए हैं, वे पप्पू गुर्जर, भारत गुर्जर, रामकुमार घुरैया, दर्शन गुर्जर, रुस्तम गुर्जर, विक्रम गुर्जर, राजेंद्र गुर्जर और कुलदीप गुर्जर हैं। राजेश ने लिखा था कि इन सभी की प्रताड़ना और लगातार दबाव से तंग आकर वे अपनी जान दे रहे हैं। पुलिस ने इस सुसाइड नोट को मुख्य साक्ष्य बनाते हुए विश्वविद्यालय थाने में इन सभी आठों नामजद आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस आकस्मिक और दर्दनाक घटना के बाद से मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। राजेश राजपूत के परिवार में उनके दो बेटे हैं। बड़े बेटे का विवाह इसी साल जून के महीने में बेहद धूमधाम के साथ संपन्न हुआ था, जबकि उनका छोटा बेटा उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में रहकर नौकरी कर रहा था। घटना की सूचना मिलने के बाद छोटा बेटा सोमवार की रात को ग्वालियर पहुंचा, जिसके बाद उसी रात पिता का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया। इस पूरे मामले ने स्थानीय राजनीति और व्यापारिक हलकों में सनसनी फैला दी है और लोग सूदखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



















