मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत निर्मित मॉडल रोड की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गए हैं। बड़ा गणपति क्षेत्र से कृष्णपुरा छत्री तक लगभग 40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार की गई इस सड़क पर सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। गोराकुंड चौराहे के समीप जलापूर्ति लाइन की प्रेशर टेस्टिंग की जा रही थी, उसी दौरान दबाव सहन न कर पाने के कारण सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। पाइपलाइन फटने से पानी भारी दबाव के साथ सड़क चीरकर बाहर बहने लगा, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के बीच हड़कंप मच गया।
प्रेशर टेस्टिंग के दौरान फटा पाइप, सड़क पर फैला पानी
स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री वाले मार्ग को अत्याधुनिक सुविधाओं और टिकाऊ तकनीक से युक्त बनाने का दावा किया गया था। इस मार्ग के नीचे पेयजल वितरण प्रणाली, सीवरेज लाइन और अन्य जनसुविधाओं के लिए underground नेटवर्क बिछाया गया था। सोमवार सुबह जब संबंधित विभाग द्वारा नई पाइपलाइन की प्रेशर टेस्टिंग की जा रही थी, तब अचानक अत्यधिक दबाव के कारण पाइपलाइन के आसपास की जमीन नीचे धंस गई। इसके तुरंत बाद पानी तेज धार के साथ सड़क फाड़कर ऊपर आ गया। राहगीरों और वाहन चालकों ने जब अचानक सड़क से पानी का तेज फव्वारा और जलभराव निकलते देखा तो वे घबराकर पीछे हट गए। सीसीटीवी कैमरे में पूरी घटना दर्ज हुई है, जिसमें जल का तेज प्रवाह स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है।
निर्माण कार्यों के स्तर पर उठे गंभीर सवाल
सड़क के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उंगलियां उठने लगी हैं। इंदौर नगर निगम के एमआईसी सदस्य तथा जानकारी समिति प्रभारी राजेन्द्र राठौड़ ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हुए निर्माण कार्यों पर प्रत्यक्ष सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इंदौर में लगभग 1,000 करोड़ रुपये के बजट से संचालित स्मार्ट सिटी योजना के कई कार्य आरंभ से ही गुणवत्ता की कमियों के चलते विवादों में रहे हैं। उन्होंने उजागर किया कि निर्माण काल के दौरान उन्होंने तत्कालीन नगर निगम आयुक्त और तत्कालीन महापौर को लगातार घटिया निर्माण की शिकायतें दी थीं, लेकिन अधिकारियों ने कठोर दंडात्मक कदम उठाने के बजाय केवल कारण बताओ नोटिस जारी करने तक ही मामला सीमित रखा।
अधिकारियों के तबादले पर चिंता और उच्च स्तरीय जांच की मांग
एमआईसी सदस्य राजेन्द्र राठौड़ ने यह भी आरोप लगाया कि जिन जिम्मेदारों और इंजीनियरों के कार्यकाल में यह कमजोर निर्माण कार्य संपन्न हुआ, वे बाद में अपना स्थानांतरण कराकर इंदौर से चले गए। अब उन गड़बड़ियों का खमियाजा शहर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जिस सड़क के निर्माण पर चार वर्ष पहले करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, उस पर नगर निगम को बार-बार डामरीकरण और पैचवर्क करना पड़ रहा है, जो इसकी खराब गुणवत्ता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। मामले में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र भेजा है। उन्होंने इस पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।



















